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दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 29 के अधीन वे दण्डादेश जो मजिस्ट्रेट दे सकेंगे।

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नमस्कार मित्रों,

आज के इस लेख में हम जानेंगे कि दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 29 के अधीन वे दण्डादेश जो , मजिस्ट्रेट दे सकेंगे। 

भारतीय दंड संहिता 1860 में विभिन्न अपराधों के बारे में उल्लेख किया , ऐसे अपराध के कारित  किये जाने पर दंड का भी प्रावधान किया गया है , इसमें मृत्युदण्डादेश , आजीवन कारावास का दण्डादेश , एक निश्चित अवधि तक के लिए कारावास का दण्डादेश और जुर्माने कादण्डादेश ।  इन दण्डादेश को कौन से मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय , प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट का न्यायालय , द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट का न्यायालय या मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट न्यायालय  महानगर मजिस्ट्रेट का न्यायालय ये सभी विभिन्न न्यायालय कौन सा दण्डादेश दे सकते है , इसका उल्लेख दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 29 में किया गया है , वे दंडादेश जो मजिस्ट्रेट दे सकेंगे। 

इन न्यायालय को इनके क्षेत्राधिकार के आधार पर दंडादेश पारित करने की शक्ति विधि द्वारा प्राधिकृत की गयी है।  
 
दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 29 के अधीन वे दण्डादेश जो मजिस्ट्रेट दे सकेंगे।



मजिस्ट्रेट कौन से दंड से सकते है ?
दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 29 मजिस्ट्रेट द्वारा दंड दिए जाने के प्रावधान के बारे में उपबंध करती है, यानी वे दण्डादेश जो मजिस्ट्रेट से सकेंगे। 

1. धारा 29 उपधारा 1 के तहत मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का न्यायालय  मृत्यु दंड या आजीवन कारावास या सात वर्ष से  अधिक अवधि के लिए कारावास के दण्डादेश के सिवाय कोई ऐसा दंड दे सकता जो विधि द्वारा प्राधिकृत है।     

2. धारा 29 उपधारा 2 के तहत प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट का न्यायालय तीन वर्ष से अनाधिक अवधि के लिए कारावास या दस हजार रूपये से अनाधिक जुर्माने का या दोनों दण्डादेश दे सकता है। 

3. धारा 29  उपधारा 3 के तहत द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट का न्यायालय 1 वर्ष से अनाधिक अवधि के लीयूए कारावास व पांच हजार रूपये से अनाधिक जुर्माने का या दोनों का दण्डादेश दे सकता है। 

4. मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट के न्यायालय को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय की शक्तियां प्राप्त होंगी , जिसमे वह मृत्यु दंड या आजीवन कारावास या सात वर्ष से अधिक अवधि के लिए कारावास से दण्डादेश के सिवाए कोई भी दण्डादेश दे सकता है जो विधि द्वारा प्राधिकृत है, महानगर मजिस्ट्रेट  न्यायालय को प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट के न्यायालय की शक्तियां प्राप्त होगी जिसमे वह तीन वर्ष से अनाधिक अवधि के लिए कारावास का या दस हजार रुपए से अनाधिक जुर्माने का या दोनों का दण्डादेश दे सकता है।    

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