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क्या रुपया उधार देना अपराध है अगर हाँ तो सजा क्या होगी? जानिए मनी लेंडिंग कानून के बारे में।

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नमस्कार मित्रों,
आज के इस लेख में आप सभी को "क्या रुपया उधार देना अपराध है " इसके बारे में बताने जा रहा हु। 

रुपया व्यक्ति की अधिकतर हर एक जरूरतों को एक हद तक पूरा करता है। अब ये रुपया कहाँ से उसके लिए व्यक्ति कार्य करता है जैसे कि मज़दूरी, कारखानों व् फैक्ट्री में काम, कंपनी में काम व् सरकारी या गैर सरकारी कार्य जिसको करने पर एक निर्धारित राशि मिलती है, जिसे कई नामों से जाना जाता है जैसे कि मजदूरी व् मेहनताना, सैलरी व् अन्य। 

अब व्यक्ति जब कमाता है तो अपनी अवश्यकताओं को भी पूरा करता है लेकिन कई आवश्यकताएं ऐसी होती है जो कि आय से पूरी नहीं हो पाती है जिसके लिए व्यक्ति अन्य स्त्रोतों से रकम लेने की आवश्यकता पड़ती है। जिसके लिए देश में कई पंजीकृत वित्तीय संस्थाएं है जिनका कार्य ही जरूरतमंदों को उनके मांगे जाने पर किये गए आवेदन के आधार पर कुछ निर्धारित समयावधि के लिए लोन के रूप में रकम दी जाती है। 

लेकिन व्यक्ति अपनी आवश्यकतों की पूर्ति के लिए पंजीकृत वित्तय संस्थाओं से रुपया न लेकर किसी व्यक्ति से लेता है जो ऐसा करने के लिए न तो अधिकृत है और न ही रकम देने के लिए उस व्यक्ति के पास पंजीकरण प्रमाणपत्र है। 

क्या रुपया उधार देना अपराध है अगर हाँ तो सजा क्या होगी?


तो ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या उधार रुपया लेना व् देना अपराध है ?

तो इसका सीधा सा जवाब है "हाँ "


तो चलिए आपके इन्ही सवालों के जवाब विस्तार से जाने। 

रूपये उधार देना यानी जिसे मनी लेंडिंग कहाँ जाता है। रूपये उधार देने के सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश में कानून पारित किया गया, जो कि उत्तर प्रदेश रेगुलेशन ऑफ़ मनी लेंडिंग एक्ट 1976 के नाम से जाना जाता है। इस अधिनियम में मनी लेंडिंग को लेकर प्रावधान किया गया है, ताकि उधार रकम देने व् लेने वाले इस प्रकार के अवैध लेनदेन पर नियंत्रण व् रोक लगाई जा सके और ऐसा करने वाले को दण्डित किया जा सके। 

कौन व्यक्ति रुपया उधार दे सकता है ?

रुपया उधार देना यानी मनी लेंडिंग के लिए अधिकृत वही व्यक्ति होगा जिसके पास मनी लेंडिंग अधिनियम के तहत रुपया उधार देने के लिए अधिनियम के प्रावधानों व् नियमों के अधीन वैध पंजीकृत प्रमाणपत्र है।  

उत्तर प्रदेश में कोई भी व्यक्ति मनी लेंडिंग यानी रुपया उधार देने के लिए तभी अधिकृत होगा जब उसके पास  उधार दिए जाने के लिए वैध प्रमाण पत्र हो। 

उत्तर प्रदेश रेगुलेशन ऑफ़ मनी लेंडिंग एक्ट 1976 की धारा 7 के अनुसार मनी लेंडिंग का व्यवसाय चालू करने के लिए व्यक्ति को मनी लेंडर के रूप में पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त करना होगा जिसके लिए अधिनियम के तहत रजिस्ट्रार जनरल मनी लेंडर के समक्ष मनी लेंडिंग के पंजीकरण के लिए आवेदन कर एक निर्धारित फीस देनी होगी। रजिस्ट्रार द्वारा पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने के बाद व्यक्ति मनी लेंडनिंग का व्यसवय प्रारंभ कर सकेगा। 
जहाँ कोई व्यक्ति इस अधिनियम के पारित होने से पहले मनी लेंडिंग यानी रकम उधार देने का व्यवसाय कर रहा है, तो ऐसे में उस व्यक्ति को अधिनियम के पारित होने के बाद 3 माह के भीतर पंजीकरण प्रमाणपत्र के लिए अपने क्षेत्र के रजिस्ट्रार के पास आवेदन करना होगा। 

कौन व्यक्ति रुपया उधार नहीं दे सकता ?
उत्तर प्रदेश रेगुलेशन ऑफ़ मनी लेंडिंग एक्ट 1976 , की धारा 10 के अधीन मनी लेंडिंग यानी रकम उधार देने का व्यवसाय वही व्यक्ति कर सकता है, जिसके पास इस अधिनियम के अधीन वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र है। 

इस अधिनियम के तहत मनी लेंडिंग व्यवसाय के लिए वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त हो जाने के बाद उस हर एक मनी लेंडिंग व्यवसाय करने वाले पंजीकृत मनी लेंडर व्यक्ति को इस मनी लेंडिंग पंजीकरण प्रमाणपत्र को निर्धारित रीति के अनुसार अपने व्यावसायिक कार्यालय में लगा कर दर्शाना होगा। 

बिना वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र के मनी लेंडिंग व्यवसाय करने पर सजा क्या होगी? 
उत्तर प्रदेश रेगुलेशन ऑफ़ मनी लेंडिंग एक्ट 1976 की धारा 22 के तहत जो कोई भी व्यक्ति वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र के बिना मनी लेंडिंग व्यवसाय प्रारंभ करता है तो उसे 6 महीने की कारावास की सजा से और 5 हजार रूपये जुर्माने से या दोनों से दण्डित किया जायेगा। 

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