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यथास्थिति आदेश क्या होता है ? what is status quo order ?

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नमस्कार मित्रों,

आज के इस लेख में हम जानेंगे कि " यथास्थिति आदेश क्या होता है ? / what is status quo order ? अक्सर दीवानी मामलों में यानी जहाँ संपत्ति से सम्बंधित विवाद न्यायालय में विचाराधीन होता है, वहाँ न्यायालय उस विवादित संपत्ति पर स्टे आर्डर या स्टेटस को यानी यथा स्थिति आदेश पारित कर देती है। 
अब ऐसे में आपके मन में सवाल आ रहा होगा :-
  1. यथा स्थिति आदेश क्या होता है ?
  2. यथाशिति आदेश में क्या -क्या रोक लगती है ?
इन सभी सवालों को विस्तार से जानते है। 

यथास्थिति आदेश क्या होता है ? what is status quo order ?



1. यथास्थिति आदेश क्या होता है ?  स्टेटस को / status quo 

यथास्थिति आदेश का अर्थ जैसा है वैसा ही बनाये रखो / यथास्थिति बनाये रखो यानी जो विवादित संपत्ति न्यायालय में विचाराधीन है उस सम्पति का न्यायालय में वाद योजित करने के दौरान जो वर्तमान में जिस स्थिति में उसे वैसे ही बनाये रखो, उस संपत्ति पर किसी भी प्रकार न कोई कार्य हो न कोई निर्माण हो जैसी है वैसी ही रहने दो। 

सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के आदेश 39 नियम 1  व्  धारा 151 जाफ्ता दीवानी तहत वाद के पक्षकार विवादित संपत्ति के सम्बन्ध में स्टे आदेश प्राप्त करने की प्रार्थना कर अपेक्षा करते है , परन्तु न्यायालय सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 धारा 151 अंतर्निहित शकितयों का उपयोग करते हुए न्याय हित में स्टेटस को यानी यथा स्थिति बनाये रखने का आदेश वाद के दोनों पक्षकारों को देती है। 

यथास्थिति आदेश के अंतर्गत विवादित संपत्ति के दोनों पक्षकारों पर उस विवादित संपत्ति पर हस्ताक्षेप करने पर रोक लगा दी जाती है। 

2 . यथास्थिति आदेश में क्या क्या रोक लगती है ? 

यथास्थित आदेश का मुख्य उद्देश्य विवादित संपत्ति का उसके वर्तमान स्थिति में कायम रखना , ताकि वाद के किसी भी पक्षकार द्वारा अमुक विवादित संपत्ति की प्राकृति पर किसी भी प्रकार का कोई भी बदलाव न हो , जब तक न्यायालय द्वारा अन्य कोई आदेश पारित न हो या जब तक विचाराधीन मामले की अंतिम सुनवाई नहीं हो जाती है।  

यथास्थिति आदेश के दौरान विवादित संपत्ति पर रोक लग जाती है जैसे कि :-
  1. वर्तमान स्थिति बनाये रखना , उसपर किसी भी प्रकार का कोई भी हस्ताक्षेप न करना। 
  2. विवादित सम्पति पर किसी भी प्रकार का कोई भी निर्माण कार्य न करना। 
  3. विवादित संपत्ति की बिक्री पर रोक लगना। 
  4. विवादित संपत्ति को किराये या पट्टे पर देने पर रोक। 
  5. विवादित संपत्ति की प्राकृति पर कोई भी बदलाव न हो। 




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