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परीक्षा के पेपर लीक होने पर सजा क्या होगी ? सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम ) विधयेक 2024

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नमस्कार मित्रों ,

आज के इस लेख में हम जानेंगे कि परीक्षा के पेपर लीक होने पर सजा क्या होगी ?  छात्र प्रतियोगिता परीक्षाओं , भर्ती परीक्षाओं के लिए कड़ी महेनत करते है, इस मेहनत के साथ वे अपना कीमती समय भी लगाते है,  लेकिन इन छात्रों को सबसे बड़ा दुःख, पीड़ा और मानसिक तनाव तब होता है , जब उन्हें इस बात की खबर मिलती है कि जिस परीक्षा को वे देने जा रहे है या देके आये है उस पीरक्षा का पेपर लीक हो गया है या परीक्षा केंद्र में नकल हुई है। 

परीक्षा पेपर लीक, नकल , परीक्षा केंद्र में गड़बड़ी सम्बंधित गड़बड़ी की रोकथाम, नियंत्रण निवारण के लिए केंद्रीय सरकार ने विधयेक लोक सभा में प्रस्तुत किया। 

सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम ) विधयेक 2024 जिसमे परीक्षा पेपर गड़बड़ी सम्बन्धी प्रावधान है। 

इस विधयेक को विस्तार से समझे। 

परीक्षा के पेपर लीक होने पर सजा क्या होगी ? सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम ) विधयेक 2024



1. सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम ) विधयेक 2024 क्या है ?

हाल ही में देश में प्रतियोगिता परीक्षाओं , भर्ती परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लीक होने और नकल होने की ख़बरें अत्यधिक संख्या  आयी , विभिन्न श्रोतों के अंकों से मालूम पड़ा कि पिछले पांच वर्षों में 16 राज्यों में परीक्षा पेपर लीक और नकल की कई घटनाएं हुई जिसके परिणामस्वरूप देश में सरकारी नौकरियों में होने वाली भर्ती प्रक्रिया बाधित हुई। इन परीक्षा पेपर लीक से नौकरी भर्ती प्रक्रिया को बाधित होने से रोकने के लिए इन पर नियंत्रण के लिए और निवारण के लिए इस विधेयक को पारित किया गया। 

इस विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के उपयोग को रोकना है सार्वजनिक परीक्षाओं का तात्पर्य विधेयक की अनुसूची के तहत निर्दिष्ट अधिकारीयों द्वारा या केंद्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित परीक्षाओं से है इनमें शामिल है :-
  1. संघ लोक सेवा आयोग। 
  2. कर्मचारी चयन आयोग। 
  3. रेलवे भर्ती बोर्ड। 
  4. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी। 
  5. बैंकिंग कार्मिक चयन संस्था। 
  6. केंद्रीय सरकार के विभाग और भर्ती के लिए उनके संलग्न कार्यालय। 
2. सार्वजानिक परीक्षाओं से सम्बंधित अपराध और सजा क्या होगी ? 

सार्वजनिक परीक्षा ( अनुचित साधनों की रोकथाम ) विधेयक 2024 की धारा 3 के तहत सार्वजनिक परीक्षाओं के संबंध में कई अपराधों को परिभाषित करता है। यह सार्वजनिक परीक्षा में किसी भी अनुचित तरीके से लिप्तता को सुविधाजनक बनाने के लिए मिलीभगत या साजिश पर रोक लगाता है।  यह विधेयक अनुचित साधनों को निर्दिष्ट करता है जिसमे शामिल है :-
  1. प्रश्न पत्र या उत्तर कुंजी या उसके किसी भाग  लीक होना। 
  2. प्रश्न पत्र या उत्तर कुंजी को लीक करने के लिए दूसरों के साथ मिलीभगत में भगा लेना। 
  3. बिना अधिकार के प्रश्न पत्र  ऑप्टिकल मार्क रिकॉग्निशन रिस्पॉन्स शीट तक पहुँच या उसे अपने कब्जे में लेना। 
  4. किसी सार्वजनिक परीक्षा के दौरान अनाधिकृत व्यक्ति द्वारा एक या अधिक प्रश्नों का समाधान प्रदान करना। 
  5. सार्वजनिक परीक्षा में अनाधिकृत रूप से किसी भी तैरके से उम्मीदवार की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहायता करना। 
  6. ऑप्टिकल रिकॉग्निशन रिस्पॉन्स शीट सहित उत्तर पुस्तिकाओं के साथ छेड़खाड़। 
  7. बिना किसी अधिकार के किसी वास्तविक त्रुटि को सूधारने के अलावा मूल्याङ्कन में बदलाव करना। 
  8. केंन्द्र द्वारा स्वयं या अपनी एजेंसी के माध्यम से सार्वजनिक परीक्षा आयोजित करने के लिए स्थापित मानदंडों मानकों का जानबूझकर उल्लंघन। 
  9. किसी सार्वजनिक परीक्षा में उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग या किसी उम्मीदवार की योग्यता या रैंक को अंतिम रूप देने के लिए आवश्यक किसी भी दस्तावेज़ के साथ छेड़खाड़ करना। 
  10. सार्वजनिक परीक्षा के सञ्चालन  में अनुचित साधनों की सुविधा के लिए सुरक्षा उपायों का जानबूझकर उल्लंघन। 
  11. कंप्यूटर नेटवर्क या कंप्यूटर संसाधन या कंप्यूटर सिस्टम के साथ छेड़खाड़ करना। 
  12. परीक्षाओं में अनुचित साधन अपनाने की सुविधा के लिए उम्मीदवारों  बैठने की व्यवस्था हेरफेर , तारीखों और पालियों का आवंटन। 
  13. सार्वजनिक परीक्षा प्राधिकरण या सेवा प्रदाता या सरकार की किसी अधिकृत एजेंसी से जुड़े व्यक्तियों के जीवन , स्वतंत्रता धमकी देना या गलत तरीके से रोकना या किसी सार्वजनिक परीक्षा के सञ्चालन में बाधा डालना। 
  14. धोखा देने या आर्थिक लाभ के लिए फर्जी वेबसाइट बनाना। 
  15. धोखाधड़ी या आर्थिक लाभ के लिए फर्जी परीक्षा आयोजित करना फर्जी प्रवेश पत्र या प्रस्ताव जारी करना। 
3. परीक्षा पेपर लीक होने और अन्य अनुचित साधनों के होने पर सजा क्या होगी ?

सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम ) विधेयक 2024 की धारा 10 उपधारा 1 के तहत अनुचित साधनों और अपराधों का सहारा लेने वाले किसी व्यक्ति को कम से कम 3 वर्ष तक कारावास की सजा से दण्डित किया जायेगा  जिसे 5 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और 10 लाख रूपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। 

जुर्माने की राशि के भुगतान में चूक की स्थिति में भारतीय न्याय संहिता 2023 के प्रावधानों के अनुसार कारावास की अतिरिक्त सजा दी जाएगी , बशर्ते की जब तक भारतीय न्याय संहिता  2023 लागु नहीं  हो जाती है , तब तक भारतीय दंड संहिता , उक्त अधिनियम के स्थान पर लागु  होगी। 

4. क्या सेवा प्रदाता भी दाननीय होगा ? 

 सार्वजनिक परीक्षा  (अनुचित साधनों की रोकथाम ) विधयेक 2024 की धारा 10 उपधारा 2 के तहत सेवा प्रदाता भी दंड के भागी होंगे जो अनुचित साधनों और अपराधों का सहारा लेंगे।  ऐसे सेवा प्रदाता से 1 करोड़ रूपये तक का जुर्माना परीक्षा की अनुपातिक लागत भी वसूली जाएगी और उस सेवा प्रदाता को चार वर्ष की अवधि के लिए किसी भी सार्वजनिक परीक्षा के सञ्चालन के कोई भी जिम्मेदारी नहीं सौंपने दिया जायेगा। 

5. सेवा  प्रदाताओं की जिम्मेदारियों क्या होंगी ?
  1. सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम ) विधयेक 2024 के प्रावधानों के उल्लंघन की स्थिति में सेवा प्रदाताओं को पुलिस  सम्बंधित परीक्षा अधिकरण को सूचना देनी होगी। 
  2. सेवा प्रदाता एक ऐसा संगठन होता है जो सार्वजनिक परीक्षा प्राधिकरण कंप्यूटर रिसोर्स अन्य सहायता प्रदान करता है। ऐसी घटनाओं की सूचना न देना अपराध होगा। 
  3. अगर सेवा प्रदत स्वयं कोई परीक्षा से सम्बंधित कोई अपराध करता है तो परीक्षा प्राधिकरण को इसकी सूचना पुलिस को देनी होगी। 
  4. विधेयक सेवा प्रदाताओं को परीक्षा प्राधिकरण की अनुमति के बिना परीक्षा केंद्र स्थानांतरित करने  से रोक सकता है। 
5. अपराध सहमति से या मिलीभगत से किया गया तो क्या सजा होगी ?

सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम ) विधेयक 2024 की धारा 10 उपधारा 3 के तहत जहाँ जाँच के दौरान यह स्थापित हो जाए कि इसके तहत अपराध हुआ है , यह कार्य किसी वरिष्ठ प्रबंधक निदेशक या प्रदाता फर्म के प्रभारी व्यक्तियों की सहमति से या मिलीभगत  है , तो सूए कम से कम ३  कारावास की सजा से दण्डित किया जायेगा जिसे 10 वर्ष तक कारावास की सजा तक बढ़ाया जा सकता है और 1 करोड़ रूपये तक जुर्माना से दण्डित किया जायेगा। 

जुर्माने की राशि के भुगतान में चूक की स्थिति में भारतीय न्याय संहिता 2023 के प्रावधानों के अनुसार कारावास की अतिरिक्त सजा दी जाएगी , बशर्ते कि जब तक भारतीय न्याय संहिता 2023 लागु नहीं हो जाती , तब तक उक्त अधिनियम के स्थान भारतीय दंड संहिता 2860 के प्रावधान लागु होंगे। 

6. सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधनों के अपराध की पूंछताछ और जाँच कौन करेगा ? 

सार्वजनिक परीक्षा ( अनुचित साधनों की रोकथाम ) विधेयक 2024 के अनुसार सभी अपराध संज्ञेय , गैर जमानतीय और गैर शमनयोग्य होंगे ,  कार्यवाही अपराध  जाएगी अगर यह साबित हो जाये की आरोपी ने सम्यक उद्द्यम ( due diligence ) किया  था। 

जाँच उपाधीक्षक सहायक पुलिस आयुक्त की रैंक से काम रैंक वाले अधिकारी एक्ट के तहत अपराधी की जाँच करेंगे। 

केंद्र सरकार जाँच को किसी भी केंद्रीय जाँच एजेंसी को हस्तांतरित कर सकती है। 


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