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लिंग जाँच क्या है और इस लिंग जाँच अपराध पर सजा क्या होगी ?

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नमस्कार मित्रों,
आज के इस लेख में आप सभी को " लिंग जाँच क्या है और इस लिंग जाँच अपराध पर सजा क्या होगी " इसके बारे में विस्तार से बताने वाला हु।  

देश में बढ़ते प्रसव से पहले लिंग जाँच करवाने को लेकर इससे सम्बंधित जैसे अपराधों पर रोकथाम लगाने के लिए और ऐसा करने व् करवाने वालो के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्यवाही कर उनको दण्डित किये जाने के लिए " गर्भधारण पूर्व और प्रसवपूर्व निदान -तकनीक ( लिंग चयन प्रतिषेध ) अधिनियम 1994, यह कानून पारित किया गया। 

इस अधिनियम के तहत स्त्री के गर्भवती होने पर और प्रसव से पहले यानी शिशु के पैदा होने से पहले गर्भ में पल रहे शिशु के लिंग जाँच करवाने या करने को लेकर इस लिंग जाँच पर पूर्णतः प्रतिबन्ध लगाता है। इस अधिनियम में लिंग जाँच की रोकथाम से सम्बंधित कई प्रावधान व् नियम बनाये गए है। अधिनियम के अधीन प्रावधानों व् नियमों के उल्लंघन पर सजा व् जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है।  


इन सभी को विस्तार से जाने। 

क्या है लिंग जाँच ?
लिंग जाँच क्या है इसको समझने के लिए इसका अर्थ समझना आवश्यक है। सामान्यतः लिंग दो प्रकार के होते है पहला स्त्री लिंग व् दूसरा पुरुष लिंग,जाँच का अर्थ मालूम करना। लिंग जाँच का अर्थ यह हुआ कि जहाँ कोई स्त्री गर्भवती है और ऐसे में यदि उसके परिवार वालो के द्वारा उस स्त्री के गर्भ में पल रहे शिशु के सम्बन्ध में यह जानने के लिए उस गर्भवती स्त्री के गर्भ में पल रहा शिशु लड़का है या लड़की है, जिसके लिए प्रसव पूर्व निदान तकनीक जैसे अल्ट्रासाउंड मशीन, इमेजिंग मशीन, या लिंग का पता लगा सकने वाली सक्षम मशीन के माध्यम से जाँच करवाता है तो इसे लिंग जाँच कहाँ जायेगा। 

लिंग जाँच करने व् करवाने वाले दोनों इस अपराध के दोषी होंगे व् लागु अधिनियम के तहत दण्डित किये जायेंगे जहाँ यह दंड करतवास या जुर्माने से या दोनों से दंडनीय होगा। 

लिंग जाँच से सम्बंधित नियम क्या है ?

गर्भधारण पूर्व और प्रसवपूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम 1994 के तहत लिंग जाँच की रोकथाम से सम्बंधित नियम बनाये गए है जो कि निम्न प्रकार से है :-

1.  गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994 की धारा 3 अनुवांशिक परामर्श केंद्र,अनुवांशिक प्रयोगशाला, और अनुवांशिक क्लिनिक इन सभी को इस अधिनियम के अधीन नियमो का पालन करना अनिवार्य है जो कि :
  1. गर्भधारण और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम के तहत पंजीकृत हुए बिना कोई भी अनुवांशिक परामर्श केंद्र,अनुवांशि प्रयोगशाला या अनुवांशि क्लिनिक द्वारा प्रसवपूर्व निदान तकनीक से सम्बंधित क्रियाकलाप का संचालन या सहयोग नहीं किया जायेगा। 
  2. कोई भी अनुवांशिक परामर्श केंद्र या अनुवांशिक प्रयोगशाला या अनुवांशिक क्लिनिक इस अधिनियम के अधीन निर्धारित योग्यता के बिना किसी भी व्यक्ति को न ही नियुक्त करेगा और न किसी व्यक्ति से सेवाएं ही लेगा चाहे वेतन के आधार पर हो या बिना वेतन के। 
  3. इस अधिनियम के तहत कोई भी चिकित्सा अनुवांशिक विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ , बाल रोग विशेषज्ञ , पंजीकृत चिकत्सा व्यवसायी या अन्य कोई भी व्यक्ति स्वयं या किसी अन्य व्यक्ति के जरिये इस अधिनियम के अधीन पंजीकृत स्थान से अलग किसी अन्य स्थान पर प्रसवपूर्व निदान तकनीन से सम्बंधित गतिविधियों का संचालन या इससे सम्बंधित किसी भी प्रकार की कोई भी सहायता नहीं करेगा। 
2. गर्भधारण और प्रसवपूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994 की धारा 3 क लिंग चयन पर प्रतिबन्ध लगाता है, .
जहाँ कोई भी व्यक्ति जो बांझपन के इलाज के क्षेत्र में विशेषज्ञ है या बांझपन के इलाज की एक विशेषज्ञों की टीम में शामिल है, इनके स्वयं या किसी भी व्यक्ति द्वारा किसी स्त्री या पुरुष या दोनों से या उनमे से किसी से या दोनों से लिए गए किसी टिशू, भूर्ण गर्भ उत्पाद, तरल या गोमीट पर परिक्षण कर स्वयं लिंग चयन नहीं करेगा और न ही किसी अन्य व्यक्ति से कराएगा और न ही स्वयं लिंग चयन करने में सहायता करेगा और न ही अन्य किसी व्यक्ति से सहायता लेगा। 

धारा 3 में टिशू, भूर्ण गर्भ उत्पाद,तरल या गोमीट इन शब्दों का उपयोग किया गया है आखिर ये होते क्या है इनको  भी जानना अति आवश्यक है ;-

1. टिशू - टिशू का अर्थ जनन कोशिकाओं में पाए जाने वाले जनन टिशू से है जो पुरुषों में स्पर्म यानी वीर्य का निर्माण करते है और महिला में ओवा यानी अंडाणु का निर्माण करते है। 

2. भूर्ण गर्भ उत्पाद - भूर्ण गर्भ उत्पाद का अर्थ शिशु (प्राणी) के विकास की शुरुवाती अवस्था से है, जिसमे उस प्राणी का विकास शुरू होने लगता है। 

3. तरल - तरल का अर्थ भूर्ण आवरण द्रव्य यानी उल्व तरल से है जो कि स्त्री के गर्भाशय से लिया गया नमूना , जिसे लिंग चयन के उद्देश्य से परीक्षण के लिए अनुवांशिक प्रयोगशाला या क्लिनिक में भेजा जाता है। 

4. गोमीट - गोमीट का अर्थ ऐसी कोशिकाओं से है जो कि शिशु (जीव) के लिंग को निर्धारित करता है यानी किसी भी प्राणी का लिंग इसी गोमीट पर निर्भर करता है। गोमीट को नर व् मादा दो भागों में विभाजित किया गया है, जहाँ नर गोमीट उत्पन्न करने वाले को नर और मादा गोमीट उत्पन्न करने वाले को मादा कहाँ जाता है। 


3.गर्भधारण और प्रसवपूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994 की धारा 3 ख के तहत अल्ट्रासाउंड मशीन या लिंग का पता लगाने वाली अन्य मशीनों की बिक्री पर प्रतिबन्ध लगाता है। 
 जहाँ उन सभी व्यक्तियों, अनुवांशिक प्रयोगशालाओं, अनुवांशिक सलाह केंद्रों, अनुवांशिक क्लीनिकों आदि जो इस अधिनियम के तहत पंजीकृत नहीं है इन सभी के द्वारा अल्ट्रासाउंड मशीन, इमेजिंग मशीन या स्कैनर मशीन या भूर्ण के लिंग का पता लगाने वाली सक्षम मशीनों की बिक्री नहीं की जाएगी। 


4. गर्भधारण और प्रसवपूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994 की धारा 6 लिंग के निर्धारण पर प्रतिबन्ध लगाती है। 
  1. अधिनियम के खंड क के तहत कोई भी व्यक्ति अपने अनुवांशिक सलाह केंन्द्र, अनुवांशिक प्रयोगशाला या अनुवांशिक क्लिनिक में प्रसवपूर्व निदान तकनीक के अंतर्गत उपयोग में लाई जाने वाली अल्ट्रासोनोग्राफी मशीन का उपयोग भूर्ण के लिंग का पता लगाने के उद्देश्य से नहीं करेगा और न ही इस मशीन का उपयोग कराएगा। 
  2.  अधिनियम के खंड ख के तहत कोई भी व्यक्ति प्रसवपूर्व निदान तकनीक के अंतर्गत उपयोग में लायी जाने वाली अल्ट्रासोनोग्राफी मशीन का उपयोग भूर्ण के लिंग का पता लगाने के उद्देश्य नहीं करेगा और न ही इस मशीन का उपयोग कराएगा। 
  3. अधिनियम के खंड ग के तहत कोई भी व्यक्ति गर्भधारण से पहले या गर्भधारण के बाद लिंग का चयन किसी भी ढंग से नहीं करेगा और लिंग का चयन करवाने के लिए अनुमति भी नहीं देगा। 

लिंग जाँच के सम्बन्ध में किये जाने व् होने वाले अपराधो के लिए सजा का प्रावधान। 

1. लिंग जाँच व् लिंग चयन के विज्ञापन पर प्रतिबंध। 

गर्भधारण और प्रसवपूर्व निदान तकनीक अधिनियम की धारा 22 के अंतर्गत गर्भधारण से पहले और प्रसव से पहले जन्म लेने वाले शिशु के लिंग के निर्धारण से सम्बंधित विज्ञापनों पर पूर्ण रूप से प्रतिबन्ध लगाता है और यदि कोई इस ऐसे प्रतिबंधों का उल्लंघन करता है तो ऐसे में उलंघन करने वाले को दण्डित किये जाने का भी प्रावधान किया गया है। 

1. जो कोई भी व्यक्ति, संगठन, अनुवांशिक सलाह केंद्र, अनुवांशिक प्रयोगशाला या अनुवांशिक क्लिनिक जिनके अंतर्गत ऐसा कोई भी क्लिनिक या प्रयोगशाला है , जिसमे अल्ट्रासाउंड मशीन, इमेजिंग मशीन या स्कैनर या कोई अन्य ऐसी सक्षम तकनिकी मशीन है जिसके जरिये भूर्ण के लिंग का पता लगाया जा सकता है, ऐसी प्रसवपूर्व निदान तकनीक मशीन की सुविधा के बारे में जो केंद्र, प्रयोगशाला, क्लिनिक में या ऐसे अन्य स्थान पर उपलब्ध है, लिंग चयन के सम्बन्ध में किसी भी प्रकार से कोई भी विज्ञापन किसी भी रूप में वो चाहे इंटरनेट के माध्यम से ही क्यों न हो, लिंग चयन या लिंग जाँच के सम्बन्ध कोई भी विज्ञापन का प्रसारण, प्रचार या प्रकशित, वितरित या सूचित नहीं करवाया जायेगा।
यदि धारा 22  के तहत लिंग चयन व् लिंग जाँच के सम्बन्ध में किये जाने वाले विज्ञापन पर लगे प्रतिबन्ध का उल्लंघन किया जाता है तो ऐसे दोषी व्यक्ति को 3 वर्ष तक कारावास की सजा से और 10 हजार रूपये जुर्माने से दण्डित किया जायेगा। 

2.जो कोई भी व्यक्ति, संगठन, जिसके अंतर्गत अनुवांशिक प्रयोगशाला, अनुवांशिक सलाह केंद्र या अनुवांशिक क्लिनिक है जिसमे प्रसवपूर्व निदान तकनीक सम्बन्धी किसी भी प्रकार की कोई भी साधन उपलब्ध है, इनके द्वारा लिंग जाँच या लिंग चयन के सम्बन्ध में किसी भी प्रकार से विज्ञापन वो चाहे इंटरनेट के माध्यम से ही क्यों न हो ऐसा विज्ञापन जारी, प्रकाशित, वितरित या सूचित नहीं करवाएगा चाहे वैज्ञानिक हो या न हो। 
यदि धारा 22 के तहत  लिंग जाँच जाँच या लिंग चयन के सम्बन्ध में किये जाने वाले विज्ञापन पर प्रतिबन्ध का उल्लंघन किया जाता है तो ऐसे दोषी व्यक्ति को 3 वर्ष तक कारावास की सजा से और 10 हजार रूपये जुर्माने से दण्डित किया जायेगा। 






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