lawyerguruji

सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के तहत रिसीवर कौन होता है ?

www.lawyerguruji.com
नमस्कार मित्रों,

आज के इस लेख में हम बात करेंगे कि सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के तहत रिसीवर कौन होता है और रिसीवर के कार्य क्या है ?

जब चल या अचल सम्पति को लेकर किन्ही दो पक्षकारों के मध्य विवाद उत्त्पन्न होता है जिसमे दोनों पक्षकार उस संपत्ति के स्वयं मालिक या अधिकारी होने का दावा करता है, तो ऐसे में वाद के निपटारे की कार्यवाही के दौरान यदि समपत्ति जल्द नष्ट होने वाली प्रकृति की है तो उस वाद संपत्ति की सुरक्षा के लिए सिविल न्यायालय द्वारा एक रिसीवर नियुक्त किया जाता है। 

सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के तहत रिसीवर कौन होता है - order 40 rule 1 appointment of receiver and who is receiver under cpc 1908

संपत्ति 
तो चलिए इस  रिसीवर के बारे और अधिक जाने। 

1. रिसीवर कौन होता है ?
रिसीवर न्यायालय का वह अधिकारी है जो कि न्यायालय के आदेश पर किसी ऐसी चल या अचल संपत्ति की देख रेख, संरक्षण, सुरक्षा के लिए नियुक्त किया जाता है , जिसके सम्बन्ध में क्षेत्राधिकारिता वाले सक्षम न्यायालय के समक्ष उस संपत्ति को लेकर उत्त्पन्न होने वाले विवाद के निपटारे के लिए वाद दायर किया जाता है, जहाँ दोनों पक्ष उस संपत्ति के स्वयं मालिक या अधिकारी होने का दावा करते है। जब तक वाद का निपटारा नहीं हो जाता या  वाद की कार्यवाही चलते दौरान उस संपत्ति के सम्बन्ध में विधि पूर्ण अधिकार किन्ही पक्षों का सिद्ध नहीं हो जाता है तब उस संपत्ति की सुरक्षा और संरक्षण के लिए न्यायालय रिसीवर की नियुक्ति करता है।   

2. रिसीवर की नियुक्ति   वाद की कार्यवाही के किन चरण में की जा सकती है  ?

सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के आदेश 40 में रिसीवर की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है। आदेश 40 नियम 1  उपनियम 1 के तहत जहाँ न्यायालय को न्याय के लिए उचित या किसी वाद में सुविधाजनक मालूम होता है की किसी वाद में रिसीवर नियुक्त किया जाना है तो ;-
  1. न्यायालय किसी संपत्ति के की सुरक्षा व् संरक्षण के लिए रिसीवर वाद की कार्यवाही के दौरान डिक्री के पहले या डिक्री के बाद रिसीवर नियुक्त कर सकेगी।  
  2. न्यायालय  किसी संपत्ति पर से किसी व्यक्ति का कब्ज़ा या उसके संरक्षण से हटा सकेगा,
  3. न्यायालय द्वारा किसी संपत्ति को किसी व्यक्ति के कब्जे से या संरक्षण से हटाने पर उस संपत्ति के कब्जे, संरक्षण या प्रबंध के लिए रिसीवर को सौप देगी,
  4. वादों को लाने और वादों में प्रतिरक्षा/ प्रतिदावा करने के लिए और संपत्ति के प्रबंध, संरक्षण,परिक्षण,और सुधार के लिए उसके किराये  और लाभों के संग्रह के लिए,  ऐसे किराये और लाभों के उपयोग और खर्चे तथा दस्तावेजों को अमल कराने यानी निष्पादन के लिए सभी ऐसी शक्तियां प्राप्त होंगी जो उस संपत्ति के स्वामी की है या उन शक्तियों में से ऐसी शक्ति जो न्यायालय ठीक समझे रिसीवर को प्रदान कर सकेगा। 
लेकिन आदेश 40 नियम 1 उपनियम 2 के तहत इस नियम की भी बात से न्यायालय को यह अधिकार नहीं होगा कि किसी ऐसे व्यक्ति का उस संपत्ति पर से कब्ज़ा या संरक्षण से हटा दे जिसे ऐसे हटाने के लिए किसी पक्षों को वाद करने वाली संपत्ति से हटाने के लिए वर्तमान अधिकार नहीं है।  

3. रिसीवर नियुक्त करने का मुख्य उद्देश्य क्या होता है ?
न्यायालय द्वारा किसी संपत्ति के लिए रिसीवर नियुक्त करने के पीछा इसका मुख्य उद्देश्य यह होता है कि :-
  1. संपत्ति का प्रबंध करना,
  2. संपत्ति की सुरक्षा के लिए,
  3. संपत्ति के संरक्षण के लिए,
  4. ऐसी संपत्ति जो रिसीवर के कब्जे में है वह संपत्ति न्यायालय के आदेश के बिना कुर्क नहीं की जा सकती है ,
  5. रिसीवर स्वयं ऐसे कब्जे वाली संपत्ति को नहीं खरीद सकता है,
  6. ऐसी संपत्ति जो रिसीवर के कब्जे में होगी उस संपत्ति के सम्बन्ध में न तो मुकदमा चलाया जा सकेगा और न ही रिसीवर पर मुकदमा चलाया जा सकता, रिसीवर पर या उसके कब्जे में संपत्ति में मुकदमा दायर करने के लिए पहले न्यायालय से अनुमति लेनी होगी। 
4. रिसीवर के कर्तव्य क्या होते है ?
सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के आदेश 40 नियम 4 के अंतर्गत रिसीवर के कर्त्वत्यों का उल्लेख किया गया है जो कि निम्न है :-
  1. संपत्ति के सम्बन्ध में रिसीवर जो कुछ भी प्राप्त करेगा उसका एक लेखा यानी रिकॉर्ड बनाएगा और समय-समय जैसा न्यायालय ठीक समझे उसको देगा,
  2.  संपत्ति के सम्बन्ध में लेखो को ऐसे प्रारूप में तैयार करेगा व् ऐसी अवधी में देगा जो न्यायालय निर्धारित करे।
  3. रिसीवर जो राशि प्राप्त करेगा उस राशि को न्यायालय में उल्लिखित करेगा,
  4. रिसीवर जिस संपत्ति के प्रबंध व् सुरक्षा के लिए नियुक्त किया गया है उस संपत्ति के सम्बन्ध में जानबूझकर भूल चूक करता है या स्वयं की लापरवाही से संपत्ति को कुछ भी हानि होती है तो उसका वह स्वयं जिम्मेदार होगा।



 

2 टिप्‍पणियां:

lawyer guruji ब्लॉग में आने के लिए और यहाँ पर दिए गए लेख को पढ़ने के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद, यदि आपके मन किसी भी प्रकार उचित सवाल है जिसका आप जवाब जानना चाह रहे है, तो यह आप कमेंट बॉक्स में लिख कर पूछ सकते है।

नोट:- लिंक, यूआरएल और आदि साझा करने के लिए ही टिप्पणी न करें।

Blogger द्वारा संचालित.