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पुनर्बीमा -reinsurance और दोहरा बीमा -double insurance क्या है और पुनर्बीमा और दोहरा बीमा में अंतर् क्या है

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नमस्कार मित्रों,
आज के इस लेख में आप सभी को पुनर्बीमा -reinsurance और दोहरा बीमा -double insurance क्या है और पुनर्बीमा और दोहरा बीमा में अंतर् क्या है इसके बारे में विस्तार से बताने जा रहा हु। 

आप सभी लोग बीमा के बारे में ये तो जानते ही होंगे की बीमा जोखिमों से बचाव करता है। समय समय पर बीमित व्यक्ति की आर्थिक सहायता भी करता है। ऐसा इसलिए क्योकि बीमित व्यक्ति अपनी पॉलिसी के लिए एक निर्धारित  समय के भीतर प्रीमियम की राशि भुगतान किया करते है और बीमा की शर्तो का पालन करते है। जैसी पॉलिसी होती है उसी के आधार पर पॉलिसी परिपक्क होने पर या किसी घटना के घटित होने पर बीमित व्यक्ति या उसके आश्रितों के द्वारा दावा करने पर बीमा कंपनी दावे की राशि का भुगतान करती है। लेकिन दावे की राशि का भुगतान करने से पहले बीमा कंपनी अपनी तरफ से जाँच करवाती है कि दावा सही है या गलत है। 

पुनर्बीमा -reinsurance और दोहरा बीमा -double insurance क्या है और पुनर्बीमा और दोहरा बीमा में अंतर् क्या है

ये तो रहा बीमा के बारे में अब मुख्य बिंदु की बात करे। 

पुनर्बीमा(Reinsurance) क्या है ?
प्रत्येक बीमा कंपनी का कार्य ही होता है कि व्यक्ति या उसकी संपत्ति का बीमा कर उनको एक सुरक्षा प्रदान करना,जहाँ बीमा कंपनी के पास कोई भी व्यक्ति स्वयं का या अपनी संपत्ति का बिमा करवाने आता है। जब कोई व्यक्ति स्वयं का या अपनी संपत्ति का बीमा करवाने आता है तो बीमा कंपनी बीमा करती है लेकिन कभी कभार बीमा कंपनी को ऐसा प्रतीत होता है कि उसने अपनी शक्ति और क्षमता से अधिक का बीमा कर लिया है या अधिक जोखिम का भार ले लिया है तो, ऐसे में बीमा कंपनी अपनी शक्ति और क्षमता से अधिक बीमा के उक्त जोखिम के भाग का बीमा फिर से किसी अन्य बीमा कंपनी से करा लेती है। जिसका मुख्य उद्देश्य जोखिम बाटना होता है। जोखिम के भाग को फिर से बीमा कराने की बीमा कंपनी की इस विधि को पुनर्बीमा कहा जाता है। 

उदाहरण :- 
क अपनी ट्रांसपोर्ट कंपनी के सभी वाहनों का 10 लाख रूपये का बीमा ख बीमा कंपनी से करवाता है। ऐसे में ख बीमा कंपनी को अनुभव होता है उसने अपनी शक्ति और क्षमता से अधिक जोखिम का बीमा कर लिया है। इस जोखिम में से ख बीमा कंपनी आधे जोखिम का बीमा ग बीमा कंपनी के साथ कर देता है। इसी विधि को पुनर्बीमा कहा जाता है, जहाँ एक बीमा कंपनी दूसरी बीमा कंपनी से बीमा करवाती है। यह एक जोखिम कम करने का बीमा कंपनी का एक सिद्धांत है। 

दोहरा बीमा (Double-Insurance) क्या है ?
दोहरा बीमा जिसका आशय यह है कि जब एक ही व्यक्ति स्वयं अपना और अपनी एक ही सम्पति का बीमा कई अलग-अलग बीमा कम्पनियों से एक साथ करवाता है तो इस विधि को दोहरा बीमा कहा जाता है। 

उदाहरण :- 
क 1 लाख रु का अपना स्वयं का जीवन बीमा ख बीमा कंपनी से करवाता है और 1 लाख रु का जीवन बीमा ग बीमा कंपनी से करवाता है और 80 हजार रु का जीवन बीमा घ बीमा कंपनी से करवाता है। यहाँ पर क ने अपने जीवन का बीमा कई अलग अलग बिमा कंपनी से करवाया है तो कहा जायेगा कि क ने दोहरा बीमा करवाया है। 

दोहरे बीमा में जीवन बीमा में राशि क्या सभी बीमा कंपनी से पूर्ण मिलेगी ?
जीवन बीमा जो कि क्षतिपूर्ति का बीमा नहीं है तो, ऐसे में जहाँ एक व्यक्ति अपना जीवन बीमा कई अलग अलग बीमा कंपनी से करवाता है तो उसे हर बीमा कंपनी से बीमा पॉलिसी का पत्र प्राप्त होगा और जीवन के बाद यानी मृत्यु होने पर उसके परिवार वालो द्वारा दावा करने पर या निश्चित आयु के पूर्ण बाद उसके द्वारा दावा करने पर सभी बीमा कम्पनियो से बीमा की पूर्ण राशि प्राप्त होगी। 

दोहरे बीमा में संपत्ति बीमा में क्षतिपूर्ति क्या सभी बीमा कंपनी से पूर्ण मिलेगी ?
संपत्ति बीमा, अग्नि बीमा व् समुद्री बीमा जो कि एक क्षतिपूर्ति अनुबंध का बीमा है तो जहाँ व्यक्ति अपनी संपत्ति का बीमा अलग अलग बीमा कम्पनी से करवाता है। वहां संपत्ति में हुई क्षतिपूर्ति की राशि वास्तविक क्षतिपूर्ति के आधार पर ही सभी बीमा कंपनी से प्राप्त होगी। ऐसा इस लिए क्योकि किसी भी व्यक्ति को वास्तविक क्षति से अधिक क्षतिपूर्ति की राशि प्राप्त करने का अधिकार नहीं है। 

उदाहरण :-
क अपनी दुकान का बिमा 50000 रु से ख बीमा कंपनी से, 20000 रु का बीमा ग बीमा कंपनी से और 50000 रु का बीमा घ बीमा कंपनी से करवाता है। क की दुकान का वास्तविक मूल्य 80000 रु है। किसी वजह से क की दुकान आग लग जाने से पूर्णतः जल कर राख हो जाती है। क द्वारा सभी बीमा कंपनी से इस क्षतिपूर्ति का दावा किया जाता है। इस स्थिति में क को ख,ग,घ बीमा कंपनी से दुकान का जो वास्तविक मूल्य 80000 रु है वही प्राप्त होगा।  

पुनर्बीमा और दोहरे बीमा में अंतर् क्या है ?

पुनर्बीमा और दोहरा बीमा के मध्य अंतर् को एक -एक कर के समझेंगे। 

पुनर्बीमा दोहरे बीमा से कैसे अलग है ?
  1. पुनर्बीमा बीमा कंपनी पर निर्भर करता है जहाँ उसको प्रतीत होता है कि उसने किसी व्यक्ति या संपत्ति का बीमा अपनी शक्ति और क्षमता से अधिक का कर लिया है तो बीमा कम्पनी पुनर्बीमा की विधि अपनाता है। 
  2. पुनर्बीमा में बीमा कंपनी जोखिमों के आधे भाग का बीमा अन्य दूसरी बीमा कंपनी से करवाती है, जिसका मुख्य उद्देश्य अपने ऊपर से जोखिम को कम करना होता है। 
  3. पुनर्बीमा में बीमित व्यक्ति या बीमित संपत्ति की बीमा पॉलिसी का एक ही पत्र होता है , जो कि बीमा करने वाली प्रथम बीमा कंपनी से प्राप्त होता है। 
  4. बीमित व्यक्ति और बीमित संपत्ति के सम्बन्ध में बीमा की शर्ते वही होती है जो कि प्रथम बीमा कंपनी द्वारा निर्धारित की गयी है। 
  5. पुनर्बीमा में बीमा कराने वाले व्यक्ति को पुनर्बीमा की कोई भी जानकारी नहीं होती है तो, ऐसे में पूर्ण राशि प्राप्त करने का अधिकार प्रथम बीमा कंपनी से होता है और यह राशि दोनों बीमा कंपनी मिलकर देती है। 
दोहरा बीमा पुनर्बीमा से कैसे अलग है ?
  1. दोहरा बीमा, बीमा करवाने वाले व्यक्ति पर स्वयं निर्भर करता है, जहाँ व्यक्ति अपना या अपनी संपत्ति का बीमा कई अलग-अलग बीमा कंपनियों से स्वयं करवाता है। 
  2. दोहरा बीमा करवाने का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति का जोखिमों को कई अलग-अलग बीमा कंपनियों पर बाटना होता है। 
  3. दोहरे बीमा में बीमित व्यक्ति व् बीमित संपत्ति के अलग-अलग बीमा पॉलिसी यानी बीमा पत्र होते है। 
  4. दोहरे बीमा में अलग-अलग बीमा कंपनियों से बीमा करवाने पर बीमा पॉलिसी की शर्ते भी बीमा कंपनी के आधार पर अलग होती है। 
  5. दोहरे बीमा मामले में व्यक्ति को स्वयं या संपत्ति की क्षति होने पर क्षतिपूर्ति दावा प्राप्त करने के लिए उन सभी बीमा कंपनी को अलग-अलग सूचना देना आवश्यक हो जाता है। 
  6. दोहरे बीमा में जीवन बीमा की राशि अलग-अलग बीमा कंपनी से पूर्ण प्राप्त होती है। 
  7. दोहरे बीमा में बीमित संपत्ति में हुई क्षतिपूर्ति की राशि बीमित संपत्ति की वास्तविक राशि के आधार पर ही प्राप्त होती है। 

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