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न्यायालय द्वारा कब किसी व्यक्ति के हाजिर होने व् उसकी संपत्ति की कुर्की की उद्घोषणा जारी की जाती है ?

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नमस्कार मित्रो, 
आज के इस लेख में आप सभी को "दंड प्रक्रिआ संहिता 1973 धारा 82, धारा 83, धारा 84 व् धारा 85 के बारे" में बताने जा रहा हु। इस सभी धाराओं के बारे में यह जानना चाह रहे होंगे कि :-
  1. दंड प्रक्रिया संहिता 1973, की धारा 82, धारा 83, धारा 84 व् धारा 85 किसी व्यक्ति पर कब लगती है। 
  2. उपरोक्त सभी धाराएँ क्या कहती है ?
तो चलिए आपके इन्ही सभी सवालों के जवाबों को विस्तार से जानते है ?

Proclamation and attachment of property under crpc sec 82, sec83, sec84,and sec85.


1. कब किसी व्यक्ति पर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82, धारा 83, धारा 84 व् धारा 85 के तहत कार्यवाही की जाती है ?

जब न्यायालय किसी व्यक्ति के खिलाफ न्यायालय में उपस्थित होने के लिए वारंट जारी करती है और वह व्यक्ति उस वारंट के निष्पादन को बाधित करने के उद्देश्य से अपने निवास स्थान से फरार रहता है या स्वयं को छिपाता है तो ऐसे में उस फरार या छिपने वाले व्यक्ति के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82, धारा 83, धारा 84 व् धारा 85 के तहत फरार व्यक्ति के सम्बन्ध में उद्घोषणा व् उसकी संपत्ति की कुर्की की प्रक्रिया की जाती है। 

दंड प्रक्रिया संहिता 1973 के तहत उद्घोषणा व् कुर्की के सम्बन्ध में धाराएँ। 
  1. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82 - फरार व्यक्ति के लिए उद्घोषणा प्रकाशित करना। 
  2. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 83 - फरार व्यक्ति की संपत्ति की कुर्की। 
  3. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 84 - कुर्की के बारे में दावा या आपत्तियां। 
  4. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 85 - कुर्क हुई संपत्ति को निर्मुक्त करना, विक्रय करना या वापस करना।
इन सभी धाराओं को विस्तार से समझने का प्रयास करते है। 

1. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82 - फरार व्यक्ति के उद्घोषणा प्रकाशित करने के सम्बन्ध में प्रक्रिया। 

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82 की उपधारा 1 -साक्ष्य लेने के बाद या साक्ष्य लिए बिना यदि न्यायालय को यह विश्वास करने का कारण है कि कोई व्यक्ति, जिसके विरुद्ध उसने न्यायालय में उपस्थित होने के लिए वारंट जारी  किया है, फरार हो गया है या अपने को छिपा रहा है, जिससे कि उस जारी किये गए वारंट का निष्पादन नहीं किया जा सकता है तो ऐसे में न्यायालय लिखित उदघोषणा प्रकाशित कर सकता है कि वह व्यक्ति उदघोषणा में लिखित स्थान व् निश्चित समय पर हाजिर हो, ऐसी उद्घोषणा के प्रकाशित होने की तिथि से कम से कम 30 दिन के भीतर हाजिर होना होगा। 

2. फरार व्यक्ति के हाजिर होने के सम्बन्ध में उद्घोषणा कैसे और कहाँ होगी ?
दंड प्रक्रिया संहिता कि धारा 82 की उपधारा 2 - फरार या छिपे हुए व्यक्ति की हाजिरी के लिए न्यायालय ऐसी उद्घोषणा को लिखित रूप में प्रकाशित करा सकती है।  

1. खंड 1 उपखण्ड क - ऐसी उद्घोषणा उस ग्राम व् नगर के किसी दिखने वाले स्थान पर सार्वजानिक स्थान पर पढ़ी जाएगी, जिसमे ऐसा व्यक्ति मामूली तौर पर निवास करता है। 

2. उपखंड ख - ऐसी उद्घोषणा उस गृह या निवासस्थान में दिखने वाले भाग पर या ऐसे नगर या ग्राम के किसी दिखने वाले स्थान पर लगाई जाएगी, जिसमे ऐसा व्यक्ति मामूली तौर पर निवास करता है। 

3. उपखंड ग -उद्घोषणा की एक प्रति उस न्यायालय सदन के सहज दिखाई देने वाले भाग पर लगाई जाएगी। 

4. खंड 2 - यदि न्यायालय ठीक समझता है तो वह यह निदेश भी दे सकता है कि उद्घोषणा की एक प्रति उस स्थान में जहाँ वह व्यक्ति मामूली रूप से निवास करता है वहां आने वाले समाचार पत्र में प्रकाशित की जाये। 

5. उपधारा 3. -  उद्घोषणा जारी करने वाले न्यायालय द्वारा यह लिखित कथन कि उद्घोषणा विनिर्दिष्ट दिन उपधारा 2 खंड 1 में बताये गए रीती से सम्यक रूप से प्रकशित कर दी गयी है, इस बात का निश्चायक साक्ष्य होगा कि इस धारा की उपेक्षाओं का अनुपालन कर दिया गया है और उद्घोषणा उस दिन प्रकाशित कर दी गयी है।  

3. न्यायालय कब फरार या छिपे हुए व्यक्ति को उद्घोषित अपराधी प्रकट कर सकती है। 

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 83 की उपधारा 4 - भारतीय दंड संहिता की धारा 302, धारा 304, धारा 364, धारा 367, धारा 382, धारा 392, धारा 393, धारा 394, धारा 395, धारा 396, धारा 397, धारा 398, धारा 399 , धारा 400, धारा 402, धारा 436, धारा 499, या धारा 460 के अधीन दंडनीय अपराध के अभियुक्त व्यक्ति के सम्बन्ध में जहां दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82 उपधारा 1 के अधीन न्यायालय को यह विश्वास करने कारण है कि कोई व्यक्ति जिसके विरुद्ध वारंट जारी किया गया है फरार या छिप गया है जिससे कि वारंट का निष्पादन नहीं किया जा सकता है तो न्यायालय द्वारा उस व्यक्ति को हाजिर होने के लिए लिखित उद्घोषणा प्रकाशित कर दी गयी है जिसमे निश्चित स्थान व् समय लिखित है ,ऐसा व्यक्ति ऐसी उद्घोषणा में लिखित स्थान व् समय पर उपस्थित होने पर असफल रहता है तो न्यायालय ऐसी जाँच करने बाद जैसा ठीक समझता है, उसे उद्घोषित अपराधी प्रकट कर सकता है और उस प्रभाव की घोषणा कर सकता है। 

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 83 उपधारा 5 -  उपधारा 2  और उपधारा 3 के उपबंध न्यायालय द्वारा उपधारा 4 के अधीन की गयी उद्घोषणा को उसी प्रकार लागु होंगे जैसे वे उपधारा 1 के अधीन प्रकाशित उद्घोषणा को लागु होते है। 
4. न्यायालय कब फरार व्यक्ति के सम्बन्ध में उसकी संपत्ति की कुर्की के आदेश दे सकती है ?
दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 83 फरार व्यक्ति की संपत्ति की कुर्की की प्रक्रिया का प्रावधान करती है जहाँ उपधारा 1 के तहत अधिनियम की धारा 82 के अधीन जहाँ न्यायालय को यह विश्वास करने का कारण है कि कोई व्यक्ति जिसके खिलाफ वारंट जारी किया गया है वो उस वारंट के निष्पादन को रोकने के लिए फरार या छिपा रहता है तो ऐसे फरार या छिपे व्यक्ति के सम्बन्ध में न्यायालय उपस्थित होने के लिए उद्घोषणा प्रकाशित करेगा, यदि ऐसा व्यक्ति उद्घोषणा  में लिखित स्थान व् निश्चित समय में उपस्थित होने में बिना किन्ही उचित कारणों से असफल रहता है तो उद्घोषणा प्रकाशित करने वाला न्ययालय ऐसे कारणों को लेखबद्ध करेगा, और  उद्घोषणा जारी करने के बाद किसी भी समय उद्घोषित व्यक्ति की चल व् अचल अथवा दोनों प्रकार की किसी भी संपत्ति की कुर्की के आदेश दे सकती है।
5.  कब न्यायालय उद्घोषणा जारी करने के साथ कुर्की का आदेश दे सकती है ?
दंड प्रक्रिया संहिता की धारा की 83 की उपधारा 1 के परन्तुक में यह कहा गया है कि यदि उद्घोषणा जारी करते समय न्यायालय को शपथपत्र द्वारा या अन्यथा यह समाधान हो जाता है कि वह व्यक्ति जिसके सम्बन्ध में उद्घोषणा निकाली जाती है :-
  1. वह व्यक्ति अपनी समस्त संपत्ति या उसके भाग को बेचने वाला है, या 
  2. वह व्यक्ति अपनी समस्त संपत्ति या उसके किसी भाग को उस न्यायालय की स्थानीय अधिकारिता से हटाने वाला है , 
तो उपरोक्त दशा में न्यायालय उद्घोषणा जारी करने के साथ-साथ कुर्की के आदेश भी दे सकती है। 

6. कुर्की का आदेश कहाँ किया जायेगा ?

दंड प्रकिया संहिता की धारा 83 की उपधारा 2 के तहत संपत्ति की कुर्की का आदेश उस जिले में जिसमे वह दिया गया है, उस व्यक्ति की किसी भी संपत्ति की कुर्की प्राधिकृत करेगा और उस जिले से बाहर उस व्यक्ति की संपत्ति की कुर्की  तब प्राधिकृत करेगा जब वह उस जिले के मजिस्ट्रेट द्वारा, जिसके जिले में ऐसी संपत्ति स्थिति है, अनुमति दे दी जाये। 

7. कुर्की की संपत्ति यदि ऋण या जंगम संपत्ति है तो कुर्की कैसे की जाएगी ?

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 83 की उपधारा 3 के अधीन यदि वह संपत्ति जिसको कुर्क किये जाने का आदेश दिया गया है,  ऐसी संपत्ति ऋण या जंगम संपत्ति हो तो, इस धारा के अधीन संपत्ति की कुर्क निम्न रीतियों से की जाएगी जो कि :-
  1. अभिग्रहण द्वारा कुर्की की जाएगी,
  2. रिसीवर की नियुक्ति द्वारा कुर्की की जाएगी,
  3. उद्घोषित व्यक्ति को या निमित्त किसी को भी उस संपत्ति का परिदान करने का प्रतिषेध करने वाले लिखित आदेश द्वारा कुर्की की जाएगी। 
  4. इन रीतियों में से सभी रीतियों से या किन्ही दो से संपत्ति की कुर्की की जाएगी, जैसा न्यायालय ठीक समझे।  
8. कुर्की कीए जाने वाली सम्पति यदि स्थावर संपत्ति है तो कुर्की कैसे की जाएगी ?

 दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 83 की उपधारा 4 के तहत यदि वह संपत्ति जिसको कुर्क  किये जाने का आदेश दिया गया है , वह संपत्ति स्थावर है तो इस धारा के अधीन कुर्की राज्य सरकार को राजस्व देने वाली भूमि की दशा में उस जिले के कलेक्टर के माध्यम इ की जाएगी जिसमे वह भूमि स्थिति है, और ने सब मामलों में कुर्की इन निम्न रीतियों से की जाएगी जो कि :-
  1. स्थावर सम्पति पर कब्ज़ा लेकर कुर्की की जाएगी,
  2. स्थावर संपत्ति में रिसीवर की नियुक्ति कर कुर्की की जाएगी,
  3. उद्घोषित व्यक्ति को या उसके निमित्त किसी को भी संपत्ति का किराया देने  संपत्ति का परिदान करने का प्रतिषेध करने वाले लिखित आदेश द्वारा कुर्की की जाएगी,
  4. इन रीतियों में से सब या किन्ही दो से स्थावर संपत्ति की कुर्की की जाएगी जैसा न्यायालय ठीक समझे। 
9. कुर्क किये जाने  वाली संपत्ति यदि जीवनधन या विनश्वर प्राकृत की है तो कुर्की कैसे की जाएगी।  

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 83 की उपधारा 5 के तहत यदि वह संपत्ति जिसे कुर्क किये जाने का आदेश दिया गया है, यदि वह संपत्ति जीवन धन या विनश्वर प्रकृति की है तो, यदि न्यायालय उचित समझता है तो वह उस संपत्ति की बिक्री के आदेश तुरंत दे सकता है और ऐसी दशा में बिक्री के अगम न्यायालय के आदेश के अधीन रहेंगे। 

10. कुर्क किये जाने वाली संपत्ति के सम्बन्ध में रिसीवर की शक्तियाँ व् दायित्व क्या होंगे ?

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 83 की उपधारा 6  के अधीन कुर्क किये जाने वाली संपत्ति के नियुक्त रिसीवर की शक्तियां और दायित्व वे ही होंगे जो सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के अधीन नियुक्त रिसीवर के होते है।  

11. कुर्क किये जाने वाली संपत्ति पर कौन व्यक्ति दावा या आपत्ति कर सकेगा ?

दंड प्रक्रिया संहिता धारा 84 में कुर्क किये जाने वाली संपत्ति के सम्बन्ध में दावे व् आपत्ति की प्रक्रिया के सम्बन्ध में प्रावधान किया गया है, जहाँ की उपधारा 1 के तहत यदि धारा 83 के अधीन कुर्क की गयी किसी संपत्ति के बारे में उस कुर्की की तिथि से 6 महीने के भीतर उद्घोषित व्यक्ति के अलावा कोई अन्य व्यक्ति इस आधार पर दावा या आपत्ति करता है कि दावेदार या आपत्तिकर्ता व्यक्ति का उस कुर्की की संपत्ति में कोई हित है और संपत्ति में ऐसा हित धारा 83 अधीन कुर्क नहीं किया जा सकता तो उस दावे या आपत्ति की जाँच की जाएगी की क्या ऐसा दावा या आपत्ति सही है, ऐसे दावे या आपत्ति को न्यायालय द्वारा पूर्णतः या भागतः मंजूर या नमंजूर किया जा सकता है।   

12. यदि दावेदार या आपत्तिकर्ता की मृत्यु हो जाती है तो क्या होगा ?

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 84 की उपधारा 1 के परन्तुक के तहत संपत्ति कुर्क किये जाने की तिथि से 6 महीने के भीतर संपत्ति के दावेदार या आपत्तिकर्ता द्वारा दावा या आपत्ति की जाती है और इस दौरान इनकी मृत्यु हो जाती है तो इस दशा में इनके विधिक उत्तराधिकारी द्वारा दावे या आपत्ति की प्रक्रिया को चालू रखा जा सकता। 

13. कुर्क संपत्ति के सम्बन्ध में दावा या आपत्ति किस न्यायालय में किया जायेगा ?
  1. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 84 की उपधारा 2 के तहत उपधारा 1 के अधीन कुर्क सम्पति में हित रखने वाला व्यक्ति उस संपत्ति के लिए दावा या आपत्ति उस न्यायालय में करेगा जिसके द्वारा उस संपत्ति के लिए कुर्की का आदेश दिया गया गया था।  यदि दावा या आपत्ति ऐसी संपत्ति के बारे में है जो की धारा 83 की उपधारा 2 के तहत मजिस्ट्रेट के आदेश के तहत कुर्क की गयी है, तो उस जिले के जिसमे कुर्क की जाती है, वहाँ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में दावा या आपत्ति की जा सकती है। 
  2. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 84 की उपधारा 3 के तहत कुर्क संपत्ति के सम्बन्ध में किये गए दावे या आपत्ति की जाँच उस न्यायालय द्वारा की जाएगी जिसमे ऐसा दावा या आपत्ति की गयी है या किया गया है। 
  3. दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 84 की उपधारा 3 के परन्तुक के तहत यदि संपत्ति की कुर्की का दावा या आपत्ति मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में किया गया है या की गयी है, तो मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की न्यायालय ऐसे दावे या आपत्ति के निपटारे के लिए अपने अधीनस्थ किसी मजिस्ट्रेट को दे सकता है। 
14. कुर्क संपत्ति के दावा या आपत्ति पूर्णतः या भागतः मंजूर या नामंजूर कर दिया जाये तो क्या होगा ?
दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 84 की उपधारा 4 के तहत यदि कुर्क संपत्ति में हित रखने वाले किसी व्यक्ति द्वारा का दावा या आपत्ति की जाती है और उसके दावे या आपत्ति को धारा 84 की उपधारा 1 के अधीन आदेश द्वारा पूर्णतः या भागतः मंजूर या नामंजूर कर दिया गया हैं, तो ऐसे आदेश की तिथि से 1 वर्ष की अवधि के भीतर, अपने उस अधिकार को सिद्ध करने के लिए, जिसका दावा वह विवादग्रस्त संपत्ति के बारे में करता है, वह व्यक्ति न्यायालय में वाद दायर कर सकता है। किन्तु वह आदेश ऐसे वाद के, यदि कोई हो, परिणाम के अधीन रहते हुए निश्चायक होगा।  

15. न्यायालय द्वारा कब कुर्क की हुई सम्पति को निर्मुक्त किया जा सकेगा ?

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 85 की उपधारा 1 के तहत यदि उद्घोषित व्यक्ति उद्घोषणा में लिखित निश्चित समय के भीतर निश्चित स्थान पर हाजिर हो जाता है तो न्यायालय उस व्यक्ति की संपत्ति को कुर्की से निर्मुक्त करने का आदेश देगा। 

16.  न्यायालय द्वारा कब कुर्क संपत्ति का विक्रय किया जा सकेगा ?

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 85 की उपधारा 2 के तहत यदि उद्घोषित व्यक्ति उद्घोषणा में लिखे समय के भीतर न्यायालय में हाजिर नहीं होता है तो कुर्क संपत्ति सरकार के विक्रय के अधीन रहेगी, और उसका विक्रय कुर्की की तिथि से  6 महीने समाप्त हो जाने पर या धारा 84  के अधीन कुर्क संपत्ति के बारे में किये गए किसी दावे या आपत्ति का उस धारा के अधीन निपटारा हो जाने पर  विक्रय किया जा सकता है, किन्तु यदि कुर्क संपत्ति जल्द नष्ट हो जाने वाली या उस संपत्ति की प्राकृत ही ऐसी है कि वह नष्ट हो सकती है या न्यायालय के विचार में उस संपत्ति की बिक्री करना उस संपत्ति के स्वामी के लिए फायेदमंद होगा तो इन दोनों दशाओं में से किसी भी दशा में न्यायालय, जब कभी ठीक समझे, उस संपत्ति का विक्रय करा सकती है। 

17. क्या कुर्क संपत्ति की वापसी हो सकती है ?

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 85 की उपधारा 3 के तहत यदि कुर्की की तिथि से 2 वर्षो के भीतर कोई व्यक्ति, जिसकी संपत्ति धारा 85 की उपधारा 2 के अधीन राज्य सरकार के पास विक्रय के अधीन है या विक्रय के अधीन रही है, उस न्यायालय के समक्ष, जिसके आदेश से संपत्ति कुर्क की गयी थी या उस न्यायालय के समक्ष जिसके ऐसा न्यायालय अधीनस्थ है, वहां अपनी इच्छा से हाजिर हो जाता है या पकड़ कर लाया जाता है और उस न्यायालय के समाधान में यह साबित कर देता है कि वह वारंट के निष्पादन से बचने के लिए फरार या छिपा नहीं था या उसे उद्घोषणा की ऐसी कोई सूचना नहीं मिली थी जिससे वह उसमे लिखित निश्चित समय के भीतर न्यायालय हाजिर हो सकता तो, ऐसी संम्पत्ति का यदि वह विक्रय कर दी गयी है तो विक्रय के शुद्ध आगमों का यदि उसका केवल कुछ भाग विक्रय किया गया है तो ऐसे विक्रय के शुद्ध आगमो और अवशिष्ट संपत्ति का, कुर्की के परिणामस्वरूप उपगत सब खर्चों को उसमे से चूका कर, वह संपत्ति उस व्यक्ति को वापस कर दी जाएगी। 
  

न्यायालय द्वारा कब किसी व्यक्ति के हाजिर होने व् उसकी संपत्ति की कुर्की की उद्घोषणा जारी की जाती है ? न्यायालय द्वारा कब किसी व्यक्ति के हाजिर होने व् उसकी संपत्ति की कुर्की की उद्घोषणा जारी की जाती है ? Reviewed by Advocate Pushpesh Bajpayee on August 01, 2020 Rating: 5

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