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जाने भारत में भारतीय निवासियों द्वारा बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया क्या है

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नमस्कार मित्रो,
आज के इस लेख में आप सभी को "भारत में बच्चा गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया के बारे में" बताने जा रहा हु। इस लेख में आप सभी को बच्चा गोद लेने सम्बंधित कानून की आवश्यक धाराओं के बारे में भी बताऊंगा, ताकि आपको बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया व् लगने वाले कानून की जानकारी भी हो जाये, ताकि कही बात चले तो आप किसी अन्य को भी बच्चा गोद लेने  की कानूनी प्रक्रिया के साथ कानून की उन धाराओं को भी बता सके जिनके पालन पर ही बच्चा गोद लेना वैध माना जायेगा। यदि बच्चा गोद लेने में कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन होता है, तो ऐसा करने वाले व्यक्ति को कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ सकता है, और उस व्यक्ति पर भारतीय दंड संहिता की धरा 370 के तहत मानव व्यापर के अपराध में दोषी पाए जाने पर सजा भी हो सकती है। 

जाने भारत में भारतीय निवासियों द्वारा बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया क्या है


बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया जानने से पहले आप लोगो के मन में कई सवाल भी उठ रहे होंगे, जो जरुरी भी है, ये सवाल निम्न हो सकते है जैसे कि :-
  1. भारत में बच्चा गोद लेने से सम्बंधित कानून कौन से है ?
  2. बच्चा गोद कब लिया जा सकता है ?
  3. भारत में बच्चा गोद लेने के लिए  कौन पात्र है ?
  4. भारत में बच्चा गोद लेने के सम्बन्ध में लगने वाले आवश्यक दस्तावेज कौन से है ?
  5. गोद लेने के लिए बालक को उपलब्धता के सम्बन्ध में क्या जवाब है ?
  6. भारत में बच्चा गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया क्या है ?
आपके इन्ही सभी सवालो के जवाब विस्तार से जानेगे ताकि और अच्छे से व् अधिक समझ में आये। हम सबसे पहले उस सवाल के बारे में जानेगे जिसमे कानून की बात हो रही। 

1. भारत में बच्चा गोद लेने के सम्बन्ध में कानून कौन से है ?

भारत में बच्चा गोद लेने के सम्बन्ध में जिन कानून का जिक्र होता है वे निम्न है :-
  1. हिन्दू दत्तक ग्रहण तथा भरण पोषण अधिनियम 1956 , इस अधिनियम में धारा 5 से धारा 17 तक हिन्दू व्यक्ति द्वारा बच्चे को गोद लेने के सम्बन्ध में प्रावधान किया गया है, जिसमे यह बताया गया है कि इस अधिनियम के अनुसार ही दत्तक ग्रहण मान्य होगा, कब एक पुरुष दत्तक ग्रहण के लिए सक्षम होगा, कब महिला दत्तक ग्रहण के लिए सक्षम होगी व् दत्तक माता पिता द्वारा पूरी की जाने वाले शर्ते क्या है व अन्य आवश्यक प्रवधान शामिल है। बच्चा गोद लेने के लिए न्यायालय से अनुमति तब लेनी होती है जब बच्चे के जैविक माता पिता दोनों की मृत्यु हो गयी हो, दोनों ने अंतिम रूप से सन्यास धारण कर लिया हो, माता -पिता दोनों ने बच्चे को छोड़ दिया हो, या सक्षम न्यायलय द्वारा दोनों के सम्बन्ध में यह घोषित कर दिया हो की उनकी मानसिक स्थिति सही नहीं है व् बच्चे संरक्षक की देख रेख में है।  
  2. किशोर न्याय (बालको की देख रेख और संरक्षण ) अधिनियम 2015 जिसे जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 के नाम से भी जाना जाता है। इस अधिनियम के तहत विवाहित जोड़े या कोई अकेला व्यक्ति अधिनयम के अनुसार गोद लेने वाले बच्चे को गोद ले सकते है। 
  3. दत्तकग्रहण विनियम 2017 के तहत भारतीय नागरिक व् दूसरे अन्य देशो द्वारा भारतीय बच्चो को गोद लेने की प्रक्रिया के सम्बन्ध में कानूनी प्रक्रिया का प्रावधान किया गया है। इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार व् केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण द्वारा बनाये गए नियमो के तहत दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को कानूनी रूप से पूर्ण किया जाता है। 

2. कब एक बच्चा गोद लिया जा सकता है ?

दत्तक ग्रहण विनियम 2017 की विनियम 4 के तहत गोद लेने वाले बालक की पात्रता के बारे में प्रावधान किया गया है जो कि निम्न है 
  1.  कोई अनाथ बालक, छोड़ा हुआ बालक व् ऐसा बालक जिसे कानूनी रूप से गोद लेने के लिए बाल कल्याण समिति द्वारा मुक्त घोषित किया गया हो। 
  2. किसी रिश्तदार का बालक, यहाँ उस बालक से अभिप्राय है जो माता पिता के पारिवारिक सस्दयों से है। 
  3. पहले विवाह से हुए पति पत्नी के बालक या सौतेले माता पिता द्वारा दत्तक ग्रहण के लिए जैविक माता पिता द्वारा छोड़े गए बालक। 

3.  भारत में बच्चा गोद लेने के लिए पात्रता मानदंड क्या है ?

दत्तकग्रहण विनियम 2017 के विनियम 5 में उन पात्रता मानदंड का जिक्र किया गया है जो भारत में कानूनी रूप से बच्चे को गोद लेने के लिए बच्चा गोद लेने वाले माता पिता के द्वारा इन पात्रता मानदंड की पूर्ति करना आवश्यक है।

1. दत्तक माता पिता शारीरक, मानसिक व् भावनात्मक रूप से मजबूत, वित्तीय रूप से सक्षम होने चाहिए व् ऐसी गंभीर बीमारी से ग्रसित न हो जो उसके जीवन को जोखिम में डालती हो,

2. विवाहित दत्तक माता पिता हो या उनके पुत्र या पुत्री हो या न हो तो भी किसी बालक को गोद ले सकते है लेकिन इन इससे पहले इन शर्तो का पालन करना होगा :-
  1.  यदि दत्तक माता पिता विवाहित है तो गोद लेने से पहले पति पत्नी दोनों की आपसी सहमति आवश्यक है। 
  2. एक अकेली स्त्री यानी तलाक शुदा, अविवाहित या विधवा स्त्री किसी भी लिंग के बालक को गोद ले सकती है।    
  3. एक अकेला पुरुष जो कि तलाक़ शुदा, अविवाहित या पत्नी की मृत्यु हो गयी है तो वह केवल लड़के को ही गोद ले सकता है। 
3. विवाहित दंपत्ति बालक को तभी गोद ले पाएंगे जब उन्होंने अपने वैवाहिक सम्बन्धो को कम से कम 2 वर्ष तक पूर्ण कर लिया हो। 

4. गोद लेने के लिए दत्तक माता पिता की आयु निर्धारित की गयी है जिसकी गणना पंजीकरण की तिथि से की जाएगी और विभन्न उम्र वर्ग के बालको के लिए दत्तक माता पिता की उम्र की पात्रता निम्नलिखित होगी :-

 गोद लेने वाले बालक की उम्र 

दत्तक माता पिता की संयुक्त उम्र   

 अकेले दत्तक माता पिता की अधिकतम उम्र 
 4 वर्ष तक के बच्चे को गोद लेने के लिए।

 दत्तक माता पिता दोनों की उम्र मिलाकर 90 वर्ष होनी चाहिए।

अकेले माता पिता की उम्र अधिकतम 45 वर्ष होनी चाहिए

 4 वर्ष से 8 वर्ष तक की उम्र के बालक को गोद लेने के लिए।

 दत्तक माता पिता दोनों की उम्र मिलाकर 100 वर्ष होनी चाहिए।        अकेले माता पिता की उम्र अधिकतम 50 वर्ष होनी चाहिए।

 8 वर्ष से 18 वर्ष तक की उम्र के बालक को गोद लेने के लिए।

 दत्तक माता पिता दोनों की उम्र मिलाकर 110 वर्ष होनी चाहिए।

अकेले माता पिता की उम्र अधिकतम 55 वर्ष होनी चाहिए।


5. विवाहित दंपत्ति द्वारा बालक को गोद लेंगे की दशा में उनकी दोनों की संयुक्त उम्र मानी जाएगी। 

6. गोद लेने वाले बालक और दत्तक माता-पिता दोनों की उम्र के मध्य कम से कम 25 साल का अंतर् होना चाहिए। 

7.  रिश्तेदार के बालक और सौतेले माता पिता द्वारा गोद लिए जाने के मामले में दत्तक माता पिता पर उम्र का मानदंड लागु नहीं होगा। 

8. तीन या तीन से अधिक बालको के माता-पिता द्वारा यदि किसी बच्चे को गोद लेना है तो वे केवल किसी विशेष बच्चे या अपने किसी रिश्तेदार के बालक को या सौतेले माता पिता द्वारा गोद देने वाले बालक को ही गोद ले सकते है।  

4. भारत में बच्चा गोद लेने के समय लगने वाले आवश्यक दस्तावेज की सूची क्या है ?

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा स्थापित केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण निकाय द्वारा भारत में बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया में लगने वाले आवशयक दस्तावेजों की एक सूची का उल्लेख किया गया है जो कि निम्न है :-
  1. बच्चा गोद लेने वाले  वैवाहिक दंपत्ति का वर्तमान पारिवारिक फोटो व् एकल व्यक्ति का वर्तमान फोटो। 
  2. गोद लेने वाले माता पिता का पैन कार्ड। 
  3. गोद लेने वाले माता पिता का जन्म प्रमाण पत्र।
  4. गोद लेने वाले माता पिता का निवास का प्रमाण पत्र जैसे आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट, वर्तमान बिजली का बिल, वर्तमन टेलीफोन का बिल। 
  5. पिछले वर्ष की आय का प्रमाण पत्र या इनकम टैक्स रिटर्न, वेतन पर्ची, सरकारी विभाग द्वारा जारी आय प्रमाण पत्र। 
  6. एक अधिकृत चिकत्सा व्यवसायी से प्रमाण जो या प्रमाणित करता है कि गोद लेने वाले माता पिता किसी घातक बीमारी से पीड़ित नहीं है और वे बच्चे को अपनाने के लिए स्वस्थ है। 
  7. विवाहित जोड़े की दशा में दोनों पति पत्नी का चिकत्सा प्रमाण पत्र लगेगा। 
  8. विवाहित जोड़े बच्चा गोद लेना चाह रहे है तो उनके विवाह का प्रमाण पत्र लगेगा। 
  9. यदि तलाक शुदा व्यक्ति बच्चा गोद लेना चाह रहे है तो उनके तलाक की डिक्री जो सक्षम न्यायालय द्वारा पारित की गयी है। 
  10. सक्षम न्यायालय द्वारा घोषणा या शपथ पत्र ऐसे तलाक के मामले में जो पर्सनल लॉ के अंतर्गत लिया गया है जहाँ तलाक की डिक्री की आवश्यकता नहीं है। 
  11. एकल माता पिता द्वारा बच्चे को गोद लेने की दशा में मृतक पति या मृतक पत्नी का मृत्यु प्रमाण पत्र। 
  12. गोद लेने वाले माता पिता के समर्थन में परिचितों या रिश्तेदारों से संदर्भित दो प्रमाण पत्र। 
  13. गोद लेने वाले व्यक्ति के परिवार यदि 5 वर्ष से अधिक उम्र का कोई बड़ा बालक है तो उनकी सहमति आवश्यक है। 

5. गोद लेने के लिए बालक की उपलब्धता से क्या मतलब है ?

दत्तक विनियम 2017 के विनियम 8 में गोद लेने वाले बच्चो की उपलब्धता के बारे में प्रावधान किया गया है। बाल कल्याण समिति द्वारा बालक को जैसे ही गोद लेने के लिए वैध रूप से स्वतंत्र किया जाता है, स्वतंत्र किया जाने की तिथि से ऐसे बालको को भारत के निवासी तथा अनिवासी भारतीय माता पिता को गोद लेने के लिए अनुमति दे दी जाती है। 

लेकिन ऐसे बालको को अंतर् देशीय गोद लेने की दशा में कुछ प्रावधान किये गए जो कि निम्न है :-
  1. यदि बालक 5 वर्ष से कम आयु का है तो बालकल्याण समिति द्वारा बालको को स्वतंत्र घोषित करने की तिथि से 60 दिन बाद गोद लिया जा सकता है। 
  2. यदि बालक 5 वर्ष से अधिक आयु का है तो बल कल्याण समिति द्वारा बालक को स्वत्रंत घोषित करने की तिथि से 30 दिन के बाद गोद लिया जा सकता है। 
  3. यदि बालक में कोई मानसिक या शारीरक असमर्थता है तो बालकल्याण समिति द्वारा बालक को स्वतंत्र घोषित किये जाने की तिथि से 15 दिन के बाद गोद लिया जा सकता है। 

भारत में भारतीय निवासियों द्वारा बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया क्या है  

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) की स्थापना की गयी ताकि भारत में भारतीय निवासियों व् अनिवासी भारतियों व् अंतर -देशीय माता पिता द्वारा बच्चो के गोद लेने की प्रक्रिया को सुगम बनाया जा सके। 1993 के हेग सम्मेलन के प्रावधानों के अनुसार 2003 में भारत सरकार द्वारा अंतर् देशीय गोद प्रक्रिया की अनुमति दी गयी जो की दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण के द्वारा गोद लेने की प्रक्रिया पूर्ण की जाती है। 

दत्तक ग्रहण विनियम 2017 के विनियम 9 के अनुसार गोद लेने वाले माता पिता का पंजीकरण व् गृह अध्यन करने का प्रावधान किया गया है। 

1. गोद लेने के लिए पंजकरण  

1. दत्तक ग्रहण विनियम 2017 के विनियम 9 के उपविनियम 1 के तहत भारतीय माता-पिता अपने धर्म पर ध्यान दिए बिना किसी अनाथ, छोड़े हुए बालक या त्यागे हुए बालक को गोद लेने का इरादा रखते है ऑनलाइन दत्तकग्रहण संसाधन सूचना और मार्गदर्शन प्रणाली के माध्यम से विशेषज्ञ दत्तकग्रहण अभिकरण को आवेदन कर सकते है और इस प्रकार आवश्यक दस्तावेजों को ऑनलाइन अपलोड कर गोद लेने वाले माता पिता के रूप में पंजीकरण करा सकते है।  

2. उपविनियम 2 के अनुसार गोद लेने वाले माता पिता पंजीकरण के लिए आवेदन करते समय दिए गए विशेष राज्यों का विकल्प देखकर अपने राज्य का चयन करेंगे। 

3. उपविनियम 3 के अनुसार बालक दत्तक ग्रहण संसाधन सूचना और मार्गदर्शन प्रणाली पर पंजीकरण उस राज्य या उन राज्यों के सभी विशेषज्ञ दत्तकग्रहण अभिकरणों में जिनका उन्होंने विकल्प दिया है, गोद लेने वाले माता पिता पंजीकृत माने जायेंगे। 

4. गोद लेने वाले माता पिता की पंजीकरण संख्या उस राज्य के सभी विशेषज्ञ दत्तकग्रहण अभिकरणों को, जिसका विकल्प उन्होंने दिया है उपलब्ध हो जाएगी। 


2. दस्तावेज का अपलोड किया जाना। 

दत्तकग्रहण विनियम 2017 के उपनियम 5 बालक दत्तक ग्रहण संसाधन सूचना और मार्गदर्शन प्रणाली पर पूरी तरह से भरे हुए आवेदन पत्र और आवश्यक दस्तावेजों के अपलोड होने की प्रक्रिया से प्राप्त होने पर तुरंत पंजीकरण पूरा माना जायेगा और गोद लेने वाले माता पिता को पुष्टि की जाएगी की वह पंजीकृत हो गये है,
लेकिन एक बात ध्यान देने वाली यह है कि पंजीकरण की तिथि से 1 माह की नियत अवधि के भीतर दस्तावेजों का उपलोड किया जाना चाहिए अन्यथा पुनः पंजीकरण के लिए आवेदन करना होगा। 

3. पंजकरण प्रक्रिया का पूर्ण होना।  

दत्तकग्रहण विनियम 2017 के उपनियम 6 के तहत पंजीकरण प्रक्रिया के पूर्ण हो जाने पर गोद लेने वाले माता पिता को अभिस्वीकृति पर्ची मिलेगी जिसपर पंजीकरण संख्या लिखी होगी व् इसके जरिये वे अपने गोद लेने की प्रक्रिया की प्रगति को ऑनलाइन देख सकेंगे। 

 4. गृह अध्यन की प्रक्रिया। 

1. दत्तकग्रहण  2017 के उपनियम 7 के तहत गोद लेने वाले माता पिता द्वारा गृह अध्यन के लिए अपने सामान्य निवास साथ के पास के विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण अभिकरण का चयन करेंगे। जो गोद लेने वाले माता पिता के घर आकर सम्पूर्ण घर का अध्यन कर एक रिपोर्ट तैयार करेंगे। इस रिपोर्ट में निम्न विवरण दर्ज होगा जैसे कि :-
  1. माता पिता की सम्पूर्ण जानकारी,
  2. सामाजिक स्थिति,
  3. आर्थिक स्थिति,
  4. पारिवारिक पृष्ठ्भूमि,
  5. घर का विवरण,
  6. घर के वातावरण का विवरण,
  7. स्वास्थ्य की स्थिति। 
2. उपनियम 8 के तहत गोद लेने वाले माता पिता द्वारा गृह अधीन किये जाने के लिए चुने गए विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण अभिकरण के सामाजिक कार्यकर्त्ता द्वारा नियत अवधि के भीतर गृह अध्यन रिपोर्ट तैयारकी जाएगी यदि नियत अवधि में गृह अधीन रिपोर्ट तैयार करने में असमर्थ होते है तो वे राज्य दत्तकग्रहण संसाधन अभिकरण या जिला बालक संरक्षण एकक द्वारा उनके पैनल में से सामाजिक कार्यकर्त्ता की मदद लेकर रिपोर्ट तैयार करेंगे। 

3. उपविनियम 9 के तहत विशेषज्ञ दत्तकग्रहण अभिकरण या राज्य दत्तकग्रहण संसाधन अभिकरण या जिला बाल संरक्षण एकक द्वारा उसके पैनल में से सामाजिक कार्यकर्ता गृह अध्यन की रिपोर्ट तैयार करने के दौरान गोद लेने वाले माता पिता को परामर्श भी दे सकेंगे। 

4. उपविनियम 10 तहत गृह अध्यन रिपोर्ट आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने की तिथि से 1 माह के भीतर विनियम की अनुसूची 7 में दिए गए प्रपत्र के अनुसार ही पूरी जाएगी व् उसके पूर्ण होने के बाद गोद लेने वाले माता पिता के साथ साझा की जाएगी। 

5. उपविनियम 11  के तहत गृह अध्यन रिपोर्ट तैयार हो जाने पर विशेषज्ञ दत्तकग्रहण अभिकरण द्वारा बालक दत्तक ग्रहण संसाधन सूचना और मार्गदर्शन प्रणाली डाली जाएगी। 

6. उपविनियम 12 के तहत गृह अध्यन रिपोर्ट 3 वर्ष तक विधिमान्य रहेगी और  इसके आधार पर गोद लेने वाले माता पिता देश  कही से भी बालक को गोद ले सकेंगे। 

7. उपविनियम 13 के तहत ग्रह अध्यन रिपोर्ट और समर्थक दस्तावेज के आधार पर विशेषज्ञ दत्तकग्रहण अभिकरण द्वारा गोद लेने वाले माता पिता को पात्र और उपयुक्त घोषित किया जायेगा। यदि गोद लेने वाले माता पिता को गोद लेने के लिए पात्र व् उपयुक्त घोषित नहीं किया जाता है तो उन कारणों को बालक दत्तकग्रहण संसाधन सूचना और मार्गदर्शन प्रणाली में अभिलिखित किया जायेगा। 

8. उपविनियम 14 के तहत गोद लेने वाले माता पिता अस्वीकृति के इस फैसले के विरुद्ध प्राधिकरण के समक्ष अपील कर सकते है। 

9. उपविनियम 15 के तहत अपील का निस्तारण 15 दिन की अवधि के भीतर किया जायेगा और इस सम्बन्ध में प्राधिकरण निर्णय गोद लेने वाले माता पिता पर बाध्यकारी होगा।  

10. उपविनियम 16 के तहत जिला बाल संरक्षण एकक द्वारा गोद लेने वाले माता पिता को ऑनलाइन पंजीकरण करने, दस्तावेज को अपलोड करने और विशेषज्ञ दत्तकग्रहण अभिकरण के सामने आने वाली सभी तकनिकी समस्याओं को दूर करने में भी मदद करेगा। 

11. उपविनियम 17 के तहत गोद लेने वाले माता पिता द्वारा बालक गोद लेने के लिए उनके पंजीकरण प्रक्रिया और गृह अध्यन रिपोर्ट पूर्ण हो जाने के बाद उपयुक्त बालक की उपलब्धता पर निर्भर करता है कि जिस बालक को वे गोद लेना चाह रहे है वह अभी उपलब्ध है या नहीं। 

5. गोद लेने वाले बालक का चयन करना। 

दत्तकग्रहण विनियम 2017 के विनियम 10 के तहत गोद लेने वाले माता पिता को बालक दत्तकग्रहण संसाधन मार्गदर्शन प्रणाली के माध्यम से विशेषज्ञ दत्तकग्रहण अभिकरण से बालक के सम्बन्ध में परामर्श करना अर्थात बालक का चयन करना। 

1. उपविनियम 1 के तहत बालक के चयन की प्रक्रिया गोद लेने वाले दत्तक माता पिता के बालक दत्तक ग्रहण सूचना और मार्गदर्शन प्रणाली पर दस्तावेज अपलोड करने और पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी होने की तिथि से होगी। 

2.उपविनियम 2 के तहत वरिष्ठता के आधार पर गोद लेने वाले माता पिता को बालक दत्तकग्रहण संसाधन सूचना और मार्गदर्शन प्रणाली के माध्यम से एक या एक से अधिक विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण अभिकरणों के द्वारा 3 बालको की प्रोफाइल उनके वरीयताक्रम के आधार उनका विवरण भेजा जायेगा जिसमे बालको की फोटो, बाल अध्यन रिपोर्ट और चिकित्सा रिपोर्ट शामिल होगी इन्ही के आधार पर बालको का चयन करना होगा। 

 3. उपविनियम 3 के तहत बालको की प्रोफाइल के विवरण का अवलोकन करने के बाद गोद लेने वाले माता पिता द्वारा 48 घण्टे के भीतर गोद लेने के लिए बालक को आरक्षित कर सकते है। बाकी बचे बालक को दत्तक ग्रहण ग्रहण संसाधन सूचना और मार्गदर्शन प्रणाली के माध्यम से प्रतीक्षा सूची में अन्य गोद लेने वाले माता पिता के लिए स्वतंत्र कर दिया जायेगा। 

4. उपविनियम 4 के तहत  विशेषज्ञ दत्तकग्रहण अभिकरण को दत्तक ग्रहण समिति द्वारा गोद लेने वाले माता पिता की उपयुक्तता का मूल्यांकन करने के लिए, मिलान करने के लिए, समय निर्धारित करने के लिए बालक दत्तक ग्रहण संसाधन सूचना और मार्गदर्शन प्रणाली के माध्यम से गोद लेने वाले माता पिता का ब्यौरा मिलगा और दत्तक ग्रहण समिति अनुसूची 27 में उपबंधित प्रपत्र के अनुसार बैठक तैयार करेगी। 

5. उपविनियम 5 के तहत दत्तकग्रहण समिति की बैठक के लिए कोरम में दो सदस्य होंगे और बालक देखरेख संस्था के बालक के गोद लेने के मामले में कोरम में तीन सदस्य होंगे और जिला बाल संरक्षण एकक के अधिकारी का इस बैठक में शामिल होना अनिवार्य होगा। 

 6. उपविनियम 6 के तहत विशेषज्ञ दत्तकग्रहण अभिकरण गोद लेने वाले माता पिता से गोद लेने वाले बालक की  बैठक कराई जाएगी। 

7. उपविनियम 7 के तहत मिलान की प्रक्रिया को बालक के आरक्षित करने की तिथि से 20 दिन के भीतर कर ली जाएगी। 

8. उपविनियम 8 के तहत विशेषज्ञ दत्तकग्रहण अभिकरण गोद लेने वाले माता पिता को तब परामर्श देंगे जब वे  बालक से मिलने के आते है । 

9.  उपविनियम 9 के तहत बालक को स्वीकार करते समय गोद लेने वाले माता पिता विशेषज्ञ दत्तकग्रहण अभिकरण के सामाजिक कार्यकर्ता या मुख्य कृत्यकारी की उपस्थ्ति में बालक अध्यन रिपोर्ट और चिकत्सा रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करेंगे। इस हस्ताक्षर किये दस्तावेज के पीडीऍफ़ फॉर्मेट को बालक दत्तकग्रहण संसाधन सूचना और मार्गदर्शन प्रणाली के माध्यम से डाउनलोड किया जा सकता है।  विशेषज्ञ दत्तकग्रहण अभिकरण गोद लेने वाले माता पिता की स्वीकृति को साइट पर अभिलिखित करेगा। 

10. उपविनियम 10 के तहत यदि दत्तक समिति द्वारा गोद लेने वाले माता पिता को नहीं चुना जाता है तो गोद लेने वाले माता पिता को न चुने जाने का कारण बालक दत्तक ग्रहण संसाधन सूचना और मार्गदर्शन प्रणाली में अभिलिखित करना होगा। 

11. उपविनियम 11  के तहत बालक गोद देने अस्वीकृत प्रणाली की गलती के करण होती है तो गैर-न्यायोचित कारणों की से पाई जाती है तो गोद लेने वाले माता पिता की वरिष्ठता वैसे ही बनी रहेगी। 

12. उपविनियम 12 के तहत यदि गोद लेने वाले माता पिता द्वारा आरक्षित किये गए बालक को स्वीकार नहीं करते है या दत्तकग्रहण समिति गोद लेने वाले माता पिता को उपयुक्त नहीं पाती है तब गोद लेने वाले माता पिता उस तिथि की वरिष्ठता सूची में सबसे निचे आ जायेंगे। उनकी वरिष्ठता आने पर उन्हें पुनः नया मौका दिया जायेगा और पुनः उसी प्रक्रिया का अनुपालन किया जायेगा। 

13. उपविनियम 13 के तहत यदि गोद लेने वाले माता पिता बालक को स्वीकार नहीं करते है या दत्तक ग्रहण समिति उपयुक्त नहीं पाती तो बालक पर विचार न करने के कारणों का बालक दत्तकग्रहण संसाधन सूचना और मार्गदर्शन प्रणाली में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जायेगा। 

14. उपविनियम 14 के तहत गोद लेने वाले माता पिता का पंजीकरण हर एक 3 वर्ष गृह अध्यन रिपोर्ट में पुनः वैधीकरण के साथ बालक के गोद लेने तक जारी रहेगा। 

15. उपविनियम 15 के तहत गोद लेने वाले माता पिता बालक को गोद लेने की स्वीकृति देने से पहले बालक की स्वास्थ परीक्षा की रिपोर्ट की समीक्षा अपने पसंद के चिकित्सक से करा सकते है। 

6. न्यायालय द्वारा गोद लेने के सम्बन्ध में विधिक प्रक्रिया। 


दत्तक ग्रहण विनियम 2017 के तहत विनिनियम 12 में गोद लेने सम्बंधित विधिक प्रक्रिया के सम्बन्ध में प्रावधान किया गया है जहाँ :-
 दत्तकग्रहण आदेश हतु न्यायालय के समक्ष आवेदन करना। 
1. उपविनियम 1 के तहत विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण अभिकरण न्यायालय से दत्तकग्रहण का आदेश प्राप्त करने के लिए गोद लेने वाले माता पिता के साथ बालक के मिलान की तिथि से मूल दस्तावेज के साथ जहाँ विशेषज्ञ दत्तकग्रहण अभिकरण स्थापित है वहा की स्थानीय सक्षम क्षेत्राधिकार वाले न्यायालय के समक्ष आवेदन दाखिल करेगा।
यदि अंतर् देशीय माता पिता द्वारा बालक गोद लिया जा रहा है तो प्राधिकरण से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त होने की तिथि से 10 कार्य दिवस के भीतर न्यायालय के समक्ष आवेदन दाखिल किया जायेगा।

2. उपविनियम 2 के तहत विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण विनियम में दिए गए प्रपत्र के अनुसार ही आवेदन दाखिल करेगा।

3. उपविनियम 3 के तहत यदि बालक किसी देख रेख संस्था में है जो विशेषज्ञ दत्तकग्रहण अभिकरण नहीं है और दूसरे जिले में स्थित है। तो विशेषज्ञ दत्तकग्रहण अभिकरण उस जिले के सम्बंधित न्ययालय में याचिका दाखिल करेगा जहाँ बालक या विशेषज्ञ दत्तकग्रहण अभिकरण स्तिथ है। इस याचिका में विशेषज्ञ  दत्तकग्रहण अभिकरण के साथ बाल देख रेख संस्था भी सह-याचिकाकर्ता होगी और विशेषज्ञ दत्तकग्रहण अभिकरण की मदद करेगी।

4.उपविनियम 4 के तहत भाई-बहन या जुड़वाँ बालको के गोद लेने के सम्बन्ध में विशेषज्ञ दत्तकग्रहण अभिकरण एक ही आवेदन न्यायालय के समक्ष दाखिल करेगा।

5. उपविनियम 5 के तहत यदि गोद लेने के समबन्ध में कोई विरोध नहीं होता है तो विशेषज्ञ दत्तकग्रहण अभिकरण आवेदन में किसी को पक्षकार नहीं बनाएगा।

6.उपविनियम 6 के तहत दत्तकग्रहण की प्रक्रिया के सम्बन्ध में न्ययालय कार्यवाही बंद कमरे में होगी और विशेषज्ञ दत्तकग्रहण द्वारा याचिका करने की तिथि से 2 माह के भीतर मामले  निपटारा करेगी।

7.उपविनियम 7 के तहत दत्तक माता पिता की गृह अध्यन रिपोर्ट और अन्य मानसिक सामाजिक विवरण और वित्तीय स्थिति पहले से सुनिश्चित कर ली गयी है तो दत्तक ग्रहण आदेश में वचन बद्ध निष्पादित करने का या बालक के नाम निवेश करने के लिए नहीं कहा जायेगा।

8. उपविनियम 8 के तहत विशेषज्ञ दत्तकग्रहण अभिकरण न्यायालय से दत्तक आदेश की प्रमणित प्रति प्राप्त करेगा और इसे गोद लेने वाले माता पिता को 10 के भीतर सौप दी जाएगी। दत्तक आदेश की एक प्रति बाल दत्तक ग्रहण संसाधन सूचना  मार्गदर्शन प्रणाली पर डाली जाएगी।

9. उपविनियम 9 के तहत दत्तकग्रहण विलेख का रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के अनुसार अनिवार्य नहीं है।

10. उपविनियम 10 के तहत विशेषज्ञ दत्तकग्रहण अभिकरण दत्तकग्रहण आदेश के जारी होने की तिथि से 3 कार्यदिवस के भीतर माता पिता के रूप में गोद लेने वाले माता पिता के नाम और आदेश में लिखी जन्म तिथि के साथ बालक का जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र जारी करने वाले प्राधिकरण के समक्ष आवेदन करेगा। आवेदन प्राप्त होने की तारीख से 5 कार्य दिवसों के भीतर जन्म प्रमाण पात्र जारी कर दिया जायेगा।

11. उपविनियम 11 के तहत विशेषज्ञ दत्तकग्रहण अभिकरण द्वारा याचिका दायर करते समय शपथपत्र प्रस्तुत करेगा।  

जाने भारत में भारतीय निवासियों द्वारा बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया क्या है जाने भारत में भारतीय निवासियों द्वारा बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया क्या है  Reviewed by Advocate Pushpesh Bajpayee on मई 13, 2020 Rating: 5

2 टिप्‍पणियां:

  1. गोद लेने के बाद दंपति की संपत्ति बालक को मिलती है या सरकार को?

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    1. गोद लेने वाले माता पिता की संपत्ति गोद लिए जाने वाले बालक को मिलती है, क्योकि वह बालक गोद लेने वाले दंपति का विधिक उत्तराधिकारी होता है ।

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