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जाने संपत्ति अंतरण अधिनियम 2005 के तहत कब एक पट्टा समाप्त किया जा सकता है ?

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नमस्कार मित्रों,
आज के इस लेख में आप सभी को " संपत्ति अंतरण अधिनियम 2005, की धारा 111 के बारे में बताने जा रहा हु  जिसमे पटटे की समाप्ति का प्रावधान किया गया, या यह भी कह सकते है कि एक पट्टा किन विभन्न तरीके से समाप्त किया जा सकता है या समाप्त हो जाता है। 

संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 105 के तहत पट्टे को परिभाषित किया गया है जिसके अंतर्गत पट्टाकर्ता अचल संपत्ति का अंतरण एक नियमित समय या अवधि के लिए पट्टेदार को उस संपत्ति के उपयोग करने के अधिकार से करता है जिसके प्रतिफल में पट्टाकर्ता  धन, फसलों के अंश या सेवा या किसी अन्य मूलयवान वस्तु को पट्टेदार से प्राप्त करता है।

Different ways a lease can be terminated , termination of lease under transfer of property act 2005

संपत्ति अंतरण अधिनियम 2005 के तहत कब एक पट्टा समाप्त किया जा सकता है ?

संपत्ति अंतरण अधिनियम 2005 , की धारा 111 के तहत पट्टे की समाप्ति सम्बंधित 8 निम्न तरीको का उल्लेख  किया गया है। यह धारा अधिनियम के लागु होने से पहले हुए पट्टो पर लागु नहीं होती इसके अतिरिक्त यह धारा कृषि के पट्टे पर भी लागु नहीं होती है। पट्टे के समापन के निम्न तरीके है जो कि :-
  1. नियत समय के बीत जाने पर। 
  2. उल्लिखित किसी घटना के घटित होने या न होने पर। 
  3. पट्टाकर्ता के हित की समाप्ति पर। 
  4. पट्टाकर्ता और पट्टेदार के हित के विलयन द्वारा पट्टे की समाप्ति। 
  5. समपर्ण द्वारा पट्टे की समाप्ति। 
  6. विवक्षित समपर्ण। 
  7. जब्ती द्वारा पट्टे की समाप्ति। 
  8. पट्टा छोड़ने की आशय से दी गयी सूचना के समाप्त होने पर। 
इन उपरोक्त पट्टे के समापन के 8 तरीको को और विस्तार से जानेगे

1. नियमित समय के बीत जाने पर पट्टे की समापन -  संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 111 क के तहत  पट्टे में लिखित समय के पूर्ण हो जाने पर पट्टे का समापन हो जाता है इसलिए प्रत्येक पट्टे में उस अवधि का उल्लेख होता है जितने अवधि के लिए वह पट्टा किया गया होता है इसके अंतर्गत उस पट्टे के प्रारम्भ होने की तिथि और समाप्ति की तिथि का उल्लेख होता है। यदि किसी पट्टे में लिखित संविदा या स्थानीय प्रथा के आभाव में पट्टे के प्रारम्भ व् समाप्ति की अवधि का उल्लेख नहीं किया गया तो ऐसे पाटों में समय का निर्धारण अधिनियम की धारा 106 के तहत किया जायेगा। इसके अनुसार कृषि या विनिर्माण के उद्देश्य के लिए अचल संपत्ति का पट्टा वर्षानुवर्ष पट्टा समझा जायेगा जो पट्टाकर्ता या पट्टेदार द्वारा 6 माह की सूचना द्वारा समापन है। किसी अन्य उद्देश्य के लिए अचल संपत्ति का पट्टा माह दर माह माना जायेगा को पट्टाकर्ता या पट्टेदार द्वारा 15 दिन की सूचना द्वारा समापन है।

2. उल्लिखित घटना के घटित होने या न होने पर पट्टा समापन - संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 111 ख के तहत जहाँ की पट्टे समाप्ति का समय किसी घटना के घटित होने की शर्त पर समाप्त है वहां ऐसी घटना के घटित होने पर पट्टे का समापन हो जाता है।
पट्टाकर्ता और पट्टेदार के मध्य पट्टे को लेकर होने वाली संविदा में यदि यह शर्त लिखित है कि भविष्य में होने वाली घटना के घटित होने पर पट्टे का समय समाप्त हो जायेगा अगर ऐसी घटना जो पट्टे की संविदा में लिखित घटना घटित हो जाती है,तो ऐसा पट्टा घटना के घटित होते ही समाप्त हो जाएगी।

उदाहरण :-
  1. एक पट्टा 20 वर्ष के लिए इस शर्त पर किया गया था कि पट्टेदार की मृत्यु पर पट्टा समाप्त हो जायेगा। यदि पट्टेदार की मृत्यु पट्टे के होने के 5 वर्ष बाद हो जाती है तो पट्टा पट्टेदार की मृत्यु से समाप्त हो जायेगा। क्योकि पट्टे की अवधि पट्टेदार के जीवन काल तक ही सिमित थी। 
  2. आम के बाग़ का पट्टा इस शर्त पर हुआ कि जिस वर्ष आम के पेड़ में फल नहीं आएंगे उस साल के लिए पट्टा शून्य होगा। यदि इस पट्टे की अवधि में किसी एक साल आम के पेड़ में फल नहीं आता तो उस वर्ष के लिए पट्टा शून्य माना जायेगा। 
3. पट्टाकर्ता के हित की समाप्ति पर पट्टे की समाप्ति - संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 111 ग के तहत जहाँ कि पट्टे की उस संपत्ति पर पट्टाकर्ता का हित किसी घटना के घटित होने पर समाप्त होता है या पट्टे की संपत्ति के उपयोग करने के अधिकार का विस्तार किसी घटना के घटित होने तक ही सिमित है तो वहां ऐसी घटना के घटित होने पर पट्टा समाप्त हो जाता है।

उदाहरण -
  1. हिन्दू विधवा द्वारा किसी अचल संपत्ति का पट्टा उसकी मृत्यु पर समाप्त हो जाता है। क्योकि पट्टाकर्ता जो हिन्दू विधवा है उस पट्टे की संपत्ति पर उसका हित उसके जीवनकाल तक है, उसकी मृत्यु हो जाने पर उस संपत्ति के उयपोग के अधिकार का विस्तार समाप्त हो जाता है। 
  2. एक बन्धकदार द्वारा किसी बन्धककर्ता की बंधक संपत्ति का पट्टा किया जाता है, तो बांधककदार द्वारा उस बंधक सम्पत्ति के विमोचन पर यानी बंधक धन के भुगतान कर देने पर विमोचन के अधिकार का  उपयोग कर अपनी बंधक संपत्ति को वापस पाना है, तो विमोचन पर यह पट्टा समाप्त हो जायेगा।  क्योकि बन्धकदार का हित उस बंधक संपत्ति पर तब तक ही है जब तक वह उसके पास बंधक है। 
4. पट्टाकर्ता और पट्टेदार के हित के विलयन द्वारा पट्टे की समाप्ति - संपत्ति अधिनियम की धरा 111 घ के तहत जहाँ कि उस पट्टे की संपत्ति में पट्टाकर्ता और पट्टेदार का हित एक ही व्यक्ति में , एक ही समय , एक ही अधिकार के समबन्ध में निहित हो जाता है तो हित के विलयन द्वारा पट्टा समाप्त हो जाता है। 

5. अभिव्यक्ति समपर्ण द्वारा पट्टे की समाप्ति - संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 111 ड  तहत जब पट्टेदार पट्टे के अधीन अपना हित आपसी करार द्वारा पट्टाकर्ता के प्रति छोड़ देता है या अपने हित का समर्पण कर देता है तो पट्टा समर्पण द्वारा समाप्त हो जाता है। 
जब किसी पट्टे का समापन अभिव्यक्ति समपर्णआपसी करार द्वारा होगा तो समपर्ण के आशय को अभिव्यक्त या प्रकट करना अनिवार्य होता है और इस पर पट्टाकर्ता अपनी सहमति अभिव्यक्ति करे और इसके बाद संपत्ति का अंतरण हो जाये।   
                          यदि किसी संपत्ति का पट्टा एक या अधिक व्यक्तियों को संयुक्त रूप से किया गया है तो सभी संयुक्त पट्टेदारों द्वारा उस पट्टे का समर्पण आपसी सहमति के द्वारा किया जान चाहिए यदि पट्टे के समपर्ण पर पट्टाकर्ता की सहमति नहीं है, तो ऐसा समर्पण वैध समर्पण नहीं माना जायेगा।

6. विवक्षित समर्पण द्वारा पट्टे की समाप्ति - संपत्ति अंतरण अधिनियम कि धारा 111 च के तहत विवक्षित समर्पण के द्वारा पट्टा समाप्त हो जाता है। एक पट्टेदार अपने पट्टेकर्ता से वर्तमान पट्टे के चालू रहने के दौरान प्रभावी होने के लिए पट्टेकृत संपत्ति का नया पट्टा स्वीकार करता है तो यह पहले पट्टे का विवक्षित समपर्ण है और इस नए पट्टे के फ़ौरन बाद पुराना पट्टा समाप्त हो जाता है क्योकि नया पट्टा तभी होगा जब तक पुराना पट्टा समाप्त नही हो जाता है।

और सरलता से जाने ,
यदि पुराने पट्टे के चालू रहने के दौरान ही पट्टेदार द्वारा नया पट्टा स्वीकार कर लिया जाता है तो यह पट्टे का विवक्षित समर्पण होगा।  

7. जब्ती द्वारा पट्टे की समाप्ति - संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 111 छ के तहत पट्टे की जब्ती द्वारा पट्टे की समाप्ति के लिए निम्न परिस्थितयों का उल्लेख किया गया है :-

1. जब पत्तेदार द्वारा किसी ऐसी शर्त को भंग किया जाता है, जिसके सम्बन्ध में यह शर्त है कि यदि पट्टे की शर्त को भंग किया जाता है या पट्टे की शर्त भंग होती है तो उस दशा में पट्टेदार से पट्टा जब्त कर लिया जायेगा और पट्टाकर्ता पुनः प्रवेश कर लेगा। 

2.जब पट्टेदार किसी अन्य व्यक्ति का हक़ खड़ा करके या यह दावा करके कि वह स्वयं उस पट्टे की संपत्ति का हक़दार है, अपनी पट्टेदारी की हैसियत का त्याग करता है। 

3. जब पट्टेदार दिवालिया घोषित कर दिया जाये या पट्टा विलेख में यह उपबंध हो कि किसी ऐसी घटना के घटित होने पर पट्टाकर्ता पुनः प्रवेश कर लेगा। 

8. पट्टा छोड़ने के आशय से दी गयी सूचना के समाप्त होने पर पट्टे की समाप्ति - संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 111 ज के तहत जब पट्टेदार या पट्टाकर्ता ने पट्टा समाप्त करने के लिए या पट्टे पर दी गयी संपत्ति को छोड़ देने या छोड़ देने के आशय से एक पक्षकार दूसरे पक्षकार को नोटिस के माध्यम से सूचना देता है और ऐसी सूचना के समाप्त होने पर पट्टा समाप्त हो जायेगा।

जहाँ कोई पट्टा एक निश्चित अवधि के लिए किया जाता है तो ऐसा पट्टा उस निश्चित अवधि पर अपने आप ही समाप्त हो जायेगा।  इसमें पट्टाकर्ता द्वारा पट्टेदार को पट्टा समापन के लिए सूचना देने की आवश्यकता नहीं होती है। 


1 टिप्पणी:

  1. संपत्ति अंतरण अधिनियम के तहत स्वस्थ समर्पण लेख और या बैयनामा (सेलडीडी) में क्या अंतर है

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