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जाने संपत्ति अंतरण अधिनियम 2005 की धारा 108 के तहत पट्टाकर्ता और पट्टेदार के अधिकार और दायित्व क्या है ?

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नमस्कार मित्रों,
आज के इस लेख में आप सभी को " संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 108 के तहत पट्टाकर्ता और पट्टेदार के अधिकार और दायित्व" के बारे में बताने जा रहा हु। 

अधिनियम के तहत किसी अचल संपत्ति का पट्टा होने के लिए दो पक्षकारों की आवश्यकता होती है। 
  1. पट्टाकर्ता।
  2. पट्टेदार। 
  1.  पट्टाकर्ता वह व्यक्ति है जो अपनी किसी अचल संपत्ति का पट्टा करता यानी अपनी किसी अचल संपत्ति के उपयोग के अधिकार का अंतरण एक नियत अवधि के लिए करता जिसके बदले में वह प्रतिफल के रूप में धन, फसल का अंश या मूल्यवान वस्तु प्राप्त करता है। 
  2. पट्टेदार वह व्यक्ति है जिसके पक्ष में पट्टा किया जाता है यानी वह व्यक्ति जो पट्टाकर्ता से उसकी किसी अचल संपत्ति के उपयोग का अधिकार एक नियत अवधि के लिए प्राप्त करता है और उसके बदले में धन , फसल का अंश या मूल्यवान वस्तु देता है। 
 जब कभी किसी अचल संपत्ति का पट्टा दो पक्षकारों के मध्य होता है तो दोनों के मध्य पट्टे को लेकर एक करार होता है, जिसमे पट्टे के उपयोग के अधिकार से लेकर प्रतिफल और पट्टे की समाप्ति की शर्तों का लिखित विवरण होता है।  
ऐसे में दोनों पक्षकरों के पास पट्टे की संपत्ति को लेकर कुछ अधिकार होते है और पट्टे की ही संपत्ति को लेकर उनके कुछ दायित्व होते है जिनका पालन करना दोनों के लिए अनिवार्य है। 

तो चलिए जान ले, पट्टे की सम्पति में पट्टाकर्ता और पट्टेदार के अधिकार और दायित्व  क्या है। 

The Transfer of Property Act Rights and liabilities of lessor and lessee

 संपत्ति अंतरण अधिनियम 2005 के तहत पट्टाकर्ता और पट्टेदार के अधिकार और दायित्व क्या है ? 

संपत्ति अंतरण अधिनियम 2005 की धारा 108 के अनुसार पट्टाकर्ता और पट्टेदार के अधिकार और दायित्व का प्रावधान किया गया है जिसके अनुसार तत्प्रतिकूल संविदा या स्थानीय प्रथा न हो तो अचल संपत्ति में पट्टाकर्ता और पट्टेदार एक दूसरे के विरुद्ध अधिकार रखते है और उन दायित्वों के अधीन होते है जो निम्नलिखित नियमो में या उनमे से ऐसो में जो उस पट्टाकृत संपत्ति को लागु होते है , जो की वर्णित है :-

पट्टाकर्ता के अधिकार और दायित्व। 

अधिनियम की धारा 108 के खंड क से खंड ग तक पट्टाकर्ता के अधिकार और दायित्वों का उल्लेख किया गया है। 

 क - पट्टाकर्ता का यह दायित्व है कि यदि पट्टा की संपत्ति में किसी तात्विक कमी हो जिसके के बारे में पट्टाकर्ता जानता है और पट्टेदार नहीं जानता और मामूली सावधानी बरतने पर भी उस कमी को मालूम नहीं किया जा सकता तो पट्टे की संपत्ति की उस कमी को पट्टेदार के समक्ष प्रकट करने के लिए पट्टाकर्ता बाध्य होगा। 

ख - पट्टाकर्ता का यह दायित्व है कि पट्टेदार की प्रार्थना पर उसे संपत्ति पर कब्ज़ा दे और ऐसा करने के लिए पट्टाकर्ता बाध्य है। 

ग - पट्टेदार से पट्टाकर्ता यह संविदा करता है कि यदि पट्टेदार पट्टे में आरक्षित किराया देता रहे और पट्टेदार अनिवार्य संविदाओं का पालन करता रहे, तो उस पट्टे द्वारा परिसीमित समय के दौरान वह संपत्ति को बिना किसी बाधा के धारण कर सकेगा। 
ऐसी संविदा का फायदा पट्टेदार के उस हित से मिला होगा और उसी के साथ जायेगा , जो उसका पट्टेदार के नाते हो और ऐसे हर व्यक्ति द्वारा लागु कराया जा सकेगा जिसमे वह पूर्ण हित 
या उसका कोई भाग समय समय पर निहित हो। 

 पट्टेदार के अधिकार और दायित्व। 


घ - यदि पट्टे के चालू रहने के दौरान संपत्ति में कोई अनुवृद्धि होती है तो ऐसी अनुवृद्धि  जलोढ़ सम्बन्धी उस समय लागु विधि के अधीन पट्टे में सम्मिलित समझी जाएगी। 

ड - पट्टेदार को पट्टा शुन्य करने का अधिकार होगा, यदि अग्नि, तूफान या बढ़ से या किसी सेना या भीड़  द्वारा की गयी हिंसा से या अन्य ऐसा बल जो रोका न सके उससे संपत्ति का कोई आवश्यक भाग पूर्णतः नष्ट हो जाता है या उन उद्देश्यों के लिए  जिनके लिए वह संपत्ति पट्टे पर दी गयी थी, पर्याप्त रूप में और स्थायी तौर पर उपयोग करने के अयोग्य हो जाये। 
परन्तु यदि पट्टे की संपत्ति पर नुकसान पट्टेदार के दोषपूर्ण कार्य या उसकी चूक के कारण से होता है तो वह इस प्रावधान का फायदा उठाने का हक़दार नहीं होगा। 

-  यदि पट्टेदार द्वारा पट्टाकर्ता को पट्टे की संपत्ति में मरम्मत करने की सूचना दी जाती है और पट्टाकर्ता सूचना प्राप्त करने के बाद उचित समय के भीतर ऐसी मरम्मत करने को लेकर ध्यान नहीं देता है जिसे करने के लिए वह बाध्य है, तो पट्टेदार ऐसी मरम्मत को स्वयं करा सकेगा और ऐसी मरम्मत का खर्चा किराये में से ब्याज सहित काट सकेगा या पट्टाकर्ता से वसूल कर सकेगा। 

छ - यदि पट्टाकर्ता ऐसा भुगतान करने में लापरवाही करता, जिसे करने के लिए वह बाध्य है और जो यदि उस द्वारा भुगतान न किया जाये तो पट्टादार से या उस संपत्ति से वसूलनीय होगा।पट्टेदार ऐसा भुगतान स्वयं कर सकेगा और उसे पट्टे की संपत्ति के किराये से ब्याज सहित काट सकेगा या पट्टाकर्ता से वसूल कर सकेगा। 

ज-  पट्टेदार पट्टे के समाप्त हो जाने के बाद भी किस भी समय जब तक पट्टे की संपत्ति पर उसका कब्ज़ा है उन सभी वस्तुओं को जो उसने भुबद्ध की है यानी उस पट्टे की भूमि में लगाई है हटा सकेगा लेकिन उन वन संपत्ति को उसी अवस्था में वैसे ही छोड़ देगा जब उसने जैसा पट्टा प्राप्त किया था। 

झ - जब अनिश्चित कालावधि का पट्टा पट्टेदार की चूक के सिवाय किसी अन्य कारण द्वारा समाप्त कर दिया जाता है तब पट्टेदार या पट्टेदार के विधिक प्रतिनिधि द्वारा रोपित या बोई गयी और जब पट्टे का समापन किया जाता है उस समय उस संपत्ति पर उगी हुई फसलों का और उन्हें इकठ्ठा करने का और ले जाने के लिए मुक्त रूप से उस पट्टे की संपत्ति में आने जाने का हक़दार होगा। 

ञ्-  पट्टेदार संपत्ति में के अपने पूर्ण हित को या उसके भाग को पूर्ण रूप से या बंधक या उपपट्टे द्वारा अंतरित कर सकेगा और ऐसे हित या भाग का अंतरिती उसे पुनः अंतरित कर सकेगा। पट्टेदार का पट्टे से जुडी दायित्वों से किसी के अधीन रहना केवल ऐसे अंतरण के कारण समाप्त नहीं हो जायेगा। 
 इस खंड की कोई भी बात कब्जे का अनंतरणीय अधिकार रखने वाले किसी कब्जाधारी को, उस सम्पदा के किसान को जिस सम्पदा के लिए राजस्व देने में चूक हुई है या किसी प्रतिपाल्य अधिकरण (वार्ड ऑफ़ कोर्ट) के प्रबंध के अधीन संपत्ति के पट्टेदार को, ऐसे कब्जाधारी, किसान या पट्टेदार के नाते अपने हित का  निर्धारण करने के लिए प्राधिकृत करने वाली नहीं समझी जाएगी। 

ट - पट्टेदार उस हित को जिसे पट्टेदार लेने वाला है प्रकृति या विस्तार के बारे में ऐसा तथ्य जिसे पट्टेदार जनता ही और पट्टाकर्ता नहीं जनता और उससे ऐसे हित के मूल्य में आवश्यक वृद्धि होती है तो पट्टाकर्ता को ऐसे हित के बारे में बताने के लिए पट्टेदार बाध्य है। 

ठ - पत्तेदार उचित समय और स्थान पर पट्टाकर्ता या उसके अभिकर्ता को प्रीमियम या किराया देने या निविदत्त करने के लिए बाध्य है। 

ड - पट्टेदार संपत्ति में युक्तियुक्त टूट-फुट या न रोके जाने वाले बल के द्वारा हुए परिवर्तनों के सिवाय संपत्ति को वैसी ही अच्छी हालत में रखने के लिए जैसी वह उस समय थी जब उस पर पट्टेदार को कब्ज़ा कराया गया था और पट्टे के समापन पर परिवर्तन करने के लिए और पट्टाकर्ता और उसके अभिकर्ता को पट्टे की अवधि के दौरान उचित समय पर प्रवेश करने और उसकी हालत का निरिक्षण करने देने और उसकी हालत में किसी खराबी की सूचना देने या सूचना वहां छोड़ने की आज्ञा देने के लिए बाध्य होगा या ऐसी खराबी पट्टेदार या उसके सेवकों या अभिकर्ताआं के किसी कार्य या चूक द्वारा होती है तो तब वह ऐसी सूचना के दिए जाने या चोदे जाने से 3 माह के भीतर उसे ठीक करने के लिए बाध्य होगा। 

ढ - यदि संपत्ति या उसके किसी भाग के  पुनः प्राप्ति  के लिए किसी कार्यवाही की या ऐसी संपत्ति से संयुक्त पट्टाकर्ता के अधिकारों पर किसी अतिक्रमण की या उनमे किसी हस्तक्षेप की जानकारी पट्टेदार को हो जाये तो वह पट्टाकर्ता को उसकी सूचना उचित समय पर तुरंत देने के लिए बाध्य है। 

ण- पट्टेदार संपत्ति का और उसमे होने वाली पैदावार का यदि कोई हो तो उसका उपयोग ऐसे ही कर सकेगा जैसे साधारण विवेक वाला व्यक्ति करता यदि वह संपत्ति और पैदावार उसकी होती लेकिन जिस उद्देश्य के उपयोग के लिए वह पट्टे की संपत्ति पट्टेदार को दी गयी थी उससे विभिन्न उद्देश्य के लिए न स्वयं उपयोग करेगा और न किसी अन्य व्यक्ति को करने देगा , न लकड़ी काटने देगा, न पट्टाकर्ता के द्वारा किये गए निर्माण को गिरायेगा न उसके निर्माण को नुकसान पहुँचायेगा, न ऐसी खानों या खाद्यानों को खुदवायेगा जो पट्टा देने समय खुली नहीं थी , न कोई ऐसा अन्य कार्य करेगा जो उस संपत्ति के लिए नाशक हो या स्थायी रूप से क्षतिकर हो। 

त- पट्टाकर्ता की सहमति के बिना पट्टेदार उस संपत्ति पर कोई स्थायी संरचना कृषि उद्देश्य से भिन्न किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं खड़ी कैराग। 

थ - पट्टेदार पट्टे के समापन पर पट्टाकर्ता को संपत्ति पर कब्ज़ा देने के लिए बाध्य है। 
जाने संपत्ति अंतरण अधिनियम 2005 की धारा 108 के तहत पट्टाकर्ता और पट्टेदार के अधिकार और दायित्व क्या है ? जाने संपत्ति अंतरण अधिनियम 2005 की धारा 108 के तहत पट्टाकर्ता और पट्टेदार के अधिकार और दायित्व क्या है ? Reviewed by Advocate Pushpesh Bajpayee on April 24, 2020 Rating: 5

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