किरायेदारी कानून 2019 के तहत मकानमालिक और किरायेदार के अधिकार। landlord and tenants right under tenancy law 2019.

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नमस्कार दोसतों,
आज का यह लेख खासकर मकानमालिक और किरायेदारों के लिए है, क्योकि आज के इस लेख में आप सभी को किरायेदारी कानून 2019 के तहत मकानमालिक और किरायेदार के अधिकार। 


 किरायेदारी कानून 2019 के तहत मकानमालिक और किरायेदार के अधिकार। landlord and tenants right under tenancy law 2019.

मकानमालिक और किरायेदार के मध्य उनके आपसी सम्बन्ध को अच्छा बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने किरायेदारी के लिए नए कानून का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, जो की मंजूरी मिलते है पारित कर दिया जायेगा। इस कानून के लागु होने से मकानमालिक और किरायेदार के मध्य होने वाले (छोटे मोटे) झगड़ो को निपटाने का पूर्ण प्रयास किया गया है। इस कानून के आ जाने से मकानमालिक और किरायेदार के हितों की रक्षा भी होती रहेगी। यदि आप किरायेदार या मकानमालिक है, तो आपको इन झगड़ो को जानते होंगे कि कैसे होते है में आपको कुछ बता देता है :-
  1. किराये में बढ़ोत्तरी को लेकर अक्सर जगड़े होते है,
  2. मकान को मरम्मत को लेकर,
  3. बिजली व्यवस्था को लेकर,
  4. पानी को लेकर,
  5. अन्य। 
अब ऐसे ही झगड़ो के निपटारे के लिए हर एक राज्य और केंद्रीय शासित प्रदेशों में स्पेशल रेंट कोर्ट अथवा रेंट ट्रिब्यूनल को स्थापित किया जायेगा। मकानमालिक और किरायेदार के मध्य होने वाले झगड़ो का निपटारा स्पेशल रेंट कोर्ट या रेंट ट्रिब्यूनल के द्वारा  60 दिनों के भीतर किया जायेगा।  
 इससे पहले मकानमालिक और किरायेदार के मध्य होने वाले झगड़ो के निपटारे के लिए सिविल कोर्ट जाना पड़ता था लेकिन अब मकानमालिक और किरायेदार के मध्य होने वाले झगड़ो का निपटारा स्पेशल रेंट कोर्ट या रेंट ट्रिब्यूनल द्वारा होगा।

द मॉडल टेनेंसी एक्ट ,2019 क्या है। 
द मॉडल टेनेंसी एक्ट ,2019 किरायेदारी कानून से सम्बंधित है, जिसमे किरायेदारी को नियंत्रित करने के लिए नियमों का प्रावधान किया गया है। ऐसा इसलिए ताकि मकानमालिक और किरायेदार के मध्य उनके आपसी रिश्तों को बनाये रखना है। अक्सर किरायेदार और मकानमालिक के मध्य आपस में मकान को लेकर छोटे मोटे झगडे हुआ करते। अब ऐसे होने वाले झगड़ो के निपटारे के लिए इस अधिनियम में विशेष प्रावधान किये गए है।
  1. मकानमालिक और किरायेदार के मध्य किराये के मकान में रहने के लिए रेंट एग्रीमेंट होता है, जिसमे मकान से सम्बंधित विवरण लिखे होते है, जिसमे दोनों की अपनी इच्छा होती है। अब इस रेंट एग्रीमेंट की एक कॉपी जिला किराया प्राधिकरण को देनी होगी। 
  2. जिला किराया प्राधिकरण के पास मकानमालिक या किरायेदार के द्वारा अनुरोध करने पर किराये की जाँच या उसे तय करने की शक्तियां होंगी। 
  3. जिला किराया प्राधिकरण को मासिक किराया और किराये की अवधि की जानकारी देनी होगी। 
  4. राज्यों और केंद्रीय शासित प्रदेशों को स्पेशल रेंट कोर्ट अथवा रेंट ट्रिब्यूनल स्थापित करना होगा। 
  5. मकानमालिक और किरायेदार के मध्य होने वाले विवादों के निपटारे के लिए दोनों पक्षों को स्पेशल रेंट कोर्ट या रेंट ट्रिब्यूनल के पास जाना होगा। 
  6. मकानमालिक और किरायेदार के मध्य हुए विवाद का निपटारा 60 दिनों के भीतर कर दिया जायेगा। 
  7. मकानमालिक  किरायेदार से मकान खाली कराने को लेकर बिजली, पानी व् अन्य जरुरी सुविधाएं बाधित नहीं करेंगे। 
मकानमालिक और किरायेदार के अधिकार और जिम्मेदारियां क्या होंगी। 

मकानमालिक के अधिकार। 
जब भी कोई मकानमालिक अपना मकान या दूकान किराये पर किसी व्यक्ति को देता है, जो उस मकान या दुकान के स्वामी के अधिकार कुछ इस प्रकार के होंगे :-
  1. रेंट एग्रीमेंट के समाप्त हो जाने के बाद भी यदि मकानमालिक के कहने पर भी किरायेदार मकान खाली नहीं कर रहा है ,तो ऐसे में मकानमालिक 4 गुना तक मासिक किराया मांगने का पूर्ण अधिकार होगा। 
  2. यदि किरायेदार रेंट एग्रीमेंट के तहत निर्धारित समय सीमा के भीतर मकान या दुकान खाली नहीं करता ,तो ऐसे में मकान या दुकान के मालिक द्वारा अगले 2 महीने तक के किराये की मांग की जा सकेगी और 2 महीने के बाद 4 गुना तक किराया वसूलने का पूर्ण अधिकार होगा। 
  3. यदि मकान के ढांचे में मकानमालिक के द्वारा कोई सुधार किया जाता है, तो ऐसे नवीकरण के बाद 1 महीने के बाद किराया बढ़ाने का अधिकार होगा, लेकिन इसके लिए किरायेदार की सलाह भी ली जाएगी।
  4. यदि किरयेदार द्वारा किराये के मकान का इस्तेमाल किसी गलत कार्य के लिए किया जा रहा है. तो ऐसे में किरायेदार को मकान से निकालने का अधिकार मकानमालिक को होगा। 
मकानमालिक की जिम्मेदारियां। 
  1. यदि मकानमालिक द्वारा किराये पर दिए गए मकान का किराया बढ़ाना चाहता है, तो ऐसे में मकानमालिक को 3 महीने पहले किरायेदार को सूचना नोटिस देकर देनी होगी। 
  2. जिस मकान को मकानमालिक ने किराये पर दिया उसकी देखभाल की जिम्मेदारी मकानमालिक की होगी। 
  3. मकानमालिक द्वारा मकान के मुआयने, नवीरकण, मरम्मत या अन्य किसी काम के लिए आने से पहले 24 घंटे का लिखित नोटिस पहले देनी होगी। 
किरायेदार के अधिकार। 
  1. मकानमालिक रेंट एग्रीमेंट के बीच किराया नहीं बढ़ायेगा। 
  2. मकानमालिक किराये पर मकान देते समय सुरक्षा राशि 2 महीने के किराये से अधिक नहीं मांग सकता।
  3. मकानमालिक और किरायेदार के मध्य किसी बात को लेकर कोई वाद-विवाद होता है, तो मकान मालिक किराये के मकान जहाँ किरायेदार रह रहे है उस मकान  की बिजली, पानी जैसे जरुरी सुविधाएं नहीं रोकेंगे। 
  4. रेंट एग्रीमेंट में लिखित समय सीमा से पहले मकानमालिक किरायेदार को तब तक नहीं निकाल सकेगा, जब उसने लगातार 2 महीने तक का किराया नहीं दिया हो। 
किरायेदार की जिम्मेदारियां। 
  1. किराये पर रह रहे व्यक्ति के द्वारा उस किराये के मकान को किसी दूसरे व्यक्ति को किराये पर या किसी अन्य काम के लिए नहीं दिया जायेगा। 
  2. किरायेदार जिस मकान का उपयोग कर रहे है, उसकी सुरक्षा और अच्छे से देखभाल करने की जिम्मेदारी किरायेदार की होगी। 
  3. किरायेदार के द्वारा मकान में किसी भी प्रकार का कोई भी नुकसान नहीं किया जायेगा, यदि किसी उचित कारण से ऐसा होता भी है तो ऐसे में मकानमालिक को इस नुकसान की सूचना देनी होगी।  
किरायेदारी कानून 2019 के तहत मकानमालिक और किरायेदार के अधिकार। landlord and tenants right under tenancy law 2019.  किरायेदारी कानून 2019 के तहत मकानमालिक और किरायेदार के अधिकार। landlord and tenants right under tenancy law 2019. Reviewed by Advocate Pushpesh Bajpayee on July 14, 2019 Rating: 5

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