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गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को कानूनी अधिकार क्या है ?- Rights of arrested person

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नमस्कार मित्रों,
आज के इस लेख में आप सभी को दंड प्रक्रिया संहिता 1973 और भारतीय संविधान द्वारा प्रदान किये गए उन अधिकारों के बारे में बात करने जा रह हु जो कि किसी गिरफ्तार हुए व्यक्ति को प्राप्त है।  यानी गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को प्राप्त कानूनी अधिकार क्या है ?

इनके बारे में हम विस्तार से जानेंगे आखिर ये अधिकार है क्या ? 

Giraftar kiye gaye vyakti ke adhikar (Rights of Arrested Person).

1. गिरफ़्तारी के आधार जानने का अधिकार (Right to know the ground of arresting)
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22 के अंतर्गत गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को यह अधिकार है कि जब भी किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है, तो ऐसे में वह व्यक्ति अपनी गिरफ़्तारी के आधार जानने का अधिकार रखता है कि किन कारणों से या किस अपराध के लिए मुझे गिरफ्तार किया जा रहा है या गिरफ्तार किया गया है। ऐसी गिरफ़्तारी किये जाने के कारण बताये बिना उस व्यक्ति को कस्टडी में नहीं रखा जायेगा। ऐसे गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को यह भी पूर्ण अधिकार होगा कि वह अपने मन मुताबिक किसी वकील से सलाह ले सकता या अपने बचाव के लिए वकील नियुत्क कर सकता है।  

 गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को अपनी पसंद का वकील तय करने का अधिकार। 
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को यह अधिकार प्रदान किया गया है कि जहाँ कोई भी व्यक्ति गिरफ्तार किया गया है ऐसी गिरफ़्तारी के सम्बन्ध में अपने पसंद के अधिवक्ता से उस गिरफ़्तारी के सम्बन्ध में सलाह ले सकता है और अपने बचाव के लिए अपनी पसंद के किसी भी अधिवक्ता को नियुत्क कर सकता है। 

अपने पसंद के  अधिवक्ता से मिलने का अधिकार। 
दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 41 घ के अंतर्गत जहाँ किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है और ऐसी गिरफ़्तारी में अपराध किये जाने की जाँच के दौरान पुलिस अधिकारीयों द्वारा की जा रही पूछताछ के दौरान गिरफ्तार हुआ व्यक्ति अपनी पसंद के अधिवक्ता से मिलने का अधिकार रखता है।  लेकिन ऐसे अपने पसंद के अधिवक्ता से मिलने का अधिकार सम्पूर्ण पूछताछ की प्रक्रिया के दौरान नहीं होगा।  

बचाव के लिए अधिवक्ता तय करने का अधिकार। 
दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 303 के तहत जिस व्यक्ति को किसी अपराध के किये जाने के सम्बन्ध में गिरफ्तार किया गया है और उसकी गिरफ़्तारी के बाद उस अभियुक्त के खिलाफ न्यायालय में मुकदमा दायर हो गया है तो दंड प्रक्रिया संहिता के अधीन कार्यवाही चालू हो गयी है तो ऐसे में अभियुक्त को यह अधिकार होगा कि वह अपने पसंद के अधिवक्ता से अपना बचाव करवा सकता है। 
 
 गिरफ़्तारी के आधार जानने के साथ जमानत पर रिहा किय जाने के बारे में जानना। 
दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 50 की उपधारा 1 के अंतर्गत गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार और जमानत पर रिहा किये जाने के बारे में बताने के बारे में प्रावधान किया गया है। जहाँ पुलिस या किसी अन्य ऐसे व्यक्ति द्वारा जिसे सरकार द्वारा अधिकृत किया गया है , इनके द्वारा किसी भी व्यक्ति को बिना वारंट के गिरफ्तार किया जाता है या गिरफ्तार किया जा रहा है तो ऐसी गिरफ़्तारी के मामले में उस गिरफ्तार किये या किये जा रहे व्यक्ति को अपनी गिरफ़्तारी के कारण व् आधार जानने का अधिकार है कि उसे किस अपराध के सम्बन्ध में गिरफ्तार किया गया या जा रहा है और ऐसी गिरफ़्तारी के कारण और आधार के बारे में गिरफ्तार किये जा रहे या किये गए व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारण व् आधार बताने होंगे। 

 जमानत पर रिहा किये जाने के अधिकार के बारे में सूचित किये जाने का अधिकार। 
दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 50 की उपधारा 2 के तहत जहाँ पुलिस अधिकारी द्वारा किसी भी व्यक्ति को ऐसे अपराध के किये जाने के सम्बन्ध में बिना वारंट के गिरफ्तार किया जाता है जहाँ ऐसा अपराध जो कि जमानतीय अपराध की श्रेणी में आता है तो वहाँ गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को पुलिस अधिकारी द्वारा यह बताया जायेगा कि वह व्यक्ति जमानत पर रिहा होने का अधिकार रखता है और वह अपनी तरफ अपनी जमानत के लिए जमानती यानी जमानत लेने वालो का इंतज़ाम करे।  

गिरफ्तार किये गए व्यक्ति द्वारा बताये गए उसके परिवारजनों को उसकी गिरफ़्तारी के बारे में बताना। 
दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 50 क की उपधारा 1 के तहत जहाँ किसी भी पुलिस अधिकारी या अन्य किसी व्यक्ति के द्वारा जो की सरकार द्वारा अधिकृत किया गया है ,इनके द्वारा किसी भी व्यक्ति की गिरफ़्तारी की जाती है तो ऐसी गिरफ़्तारी व् गिरफ़्तारी के बाद ऐसे स्थान की जानकारी जहाँ उस गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को कस्टडी में रखा गया है , इसके सम्बन्ध में ऐसी जानकारी उस गिरफ्तार किये गए व्यक्ति के द्वारा बताये गए उसके मित्र, परिवारजनों, नातेदारों या जिस व्यक्ति को वह अपनी गिरफ़्तारी की जानकारी देना चाह रहा है, ऐसी जानकारी उस व्यक्ति को तुरंत दी जाएगी।  

मुफ्त में विधिक सहायता पाने का अधिकार। 
दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 304 के अंतर्गत किन्ही मामलो में अभियुक्त को राज्य की तरफ से राज्य के खर्चे पर विधिक सहायता प्रदान किये जाने का प्रावधान किया गया है।  जहाँ सत्र न्यायालय  के समक्ष किन्ही मामलो में अभियुक्त की तरफ से कोई अधिवक्ता उसके बचाव के लिए नहीं हाजिर होता है और जहाँ सत्र न्यायालय को यह  उचित लगता है कि उस अभियुक्त के पास अपने बचाव के लिए किसी भी अधिवक्ता को नियुक्त करने के लिए उसके पास पर्याप्त साधन यानी रुपया नहीं है तो वहां न्यायालय उस अभियुक्त के बचाव के राज्य के खर्चे पर एक अधिवक्ता नियुक्त कराएगी जो उस अभियुक्त के बचाव  में बोल सके।  

8. Giraftar vyakti ka chikitsya adhikari dwara parikshan.
Criminal Procedure Code ke section 54(1) ke anusar jab kisi vyakti ko police dwara giraftar kiye jaane ke turant bad us vyakti ka chikitsa parikshan karaya jayega jo ki kendriya sarkar ya rajya sarkar ke sevadhen chikitsa adhikari se aur jaha chikitsa adhikari uplabdh nahi hai vahan certified chikitsa vivasayi dwara us vyakti ka parikshan kiya jayega.

Jahan aisi giraftari mahila ki hogi to us samay us mahila ki sharirik parikshan mahila chikitsa vyavsayi  dwara ki jayegi aur aisi sharirik pariksha ki report aur us report ki ek copy chikitsa adhikari ya  chikitsa vyavsayi  dwara giraftar kiya gaye vyakti ko ya uske dwara bataye gaye vyakti ko us report ko diya jayega.

9.Vidhi ke anuar talashi diye jane ka adhikar.
Criminal Procedure Code ke section 51(1) ke anusar giraftar vyakti ki talashi ke samay prapt vastuo ko jabt karne ke bad giraftari vyakti ko jabt cheejo ki ek suchi bna kar di jayegi. Talashi ke sambandh me section 100 ke samanya pravdhan lagu honge.
Is me pehanne wale vastro ko shamil nahi kiya jayega.

10.Shalinta purn achran ki apeksha ka adhikar.
Criminal Procedure Code ke section 51(2) ke anusar yadi talashi kisi mahila ki ho rhi ho to avashyak hai ki us samay shalenta ka dhyan rakha jayega. Is asay ke pravdhan ko section 100(3) me diya gya hai.

11. Giraftari hamesa sanhita ke anusar hi kya jana.
Criminal Procedure Code ke section 60(a) ke anusar police dwara koi bhi giraftar kiya jayega to vah is adhiniyam ke anusar hi giraftar kiya jayega.

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