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UGC विनियम 2026 का उद्देश्य क्या है ?

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नमस्कार मित्रों,

आज के इस लेख में हम जानेंगे कि UGC विनियम 2026 का उद्देश्य क्या है ?  UGC - यूनियन ग्रांट कमीशन / विश्वविद्यालय अनुदान आयोग जो कि उच्च शिक्षा संस्थानों को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए नियम विनियम बनाती है। 

जैसे कि भेदभाव को रोकना, समानता, रैगिंग की रोकथाम और प्रतिबंधित करना साथ ही दण्ड का प्रावधान करना, ताकि रैगिंग करने वाले को सजा दी जा सके , अन्य नियम जो कि उच्च शिक्षा संस्थाओं के आवश्यक है। पीड़ित छात्रों , शिक्षक और कर्मचारियों को शिकायत दर्ज कराने के शिकायत समिति का गठन करना और निष्पक्ष रूप से शिकायत का समाधान करना। 

UGC विनियम 2026 का उद्देश्य क्या है ?


1.UGC विनियम 2026 क्या है ?

UGC विनियम 2026 जिसका पूरा नाम विश्वविद्यलय अनुदान आयोग ( उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु विनियम ) 2026 है। 

इस विनियम की मुख्य विशेषताएँ है ;-
  1. अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति , अन्य पिछड़ा वर्ग से मतभेद को रोकना और समता को बढ़ावा देना है। 
  2. जाति आधारित भेदभाव को रोकना। 
  3. सामान अवसर केंद्र की स्थापना करना। 
  4. समता समिति का गठन करना , ताकि पीड़ित पक्ष शिकायत दर्ज कर सके। 
  5. लोकपाल का गठन ताकि अपील कर सके। 
2.UGC विनियम 2026 के उद्देश्य क्या है ?

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ( उच्च शिक्षा संसथान में समता के संवर्धन हेतु विनियम ) 2026 का मुख्य उद्देश्य है कि धर्म, जाति, लिंग,  जन्म स्थान या दिव्यांगता के आधार पर विशेष रूप से अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति, सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों , आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों , दिव्यांगजनों अथवा इसमें से किसी भी सदस्यों के विरुद्ध भेदभाव को रोकना और उच्च शिक्षा संस्थानों के हितधारकों के मध्य पूर्ण समता एवं समावेशन को संवर्धन देना है। 

1.समता के संवर्धन का कर्तव्य। 

प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थानों का कर्तव्य होगा कि :-
  1. भेदभाव को रोकना। 
  2. हितधारकों के मध्य समता के संवर्धन। 
  3. हितधारकों के विरुद्ध भेदभाव को रोकने तथा जाति, संप्रदाय, धर्म, भाषा, नृजातीयता यानी जातीय/नस्ल, लिंग या दिव्यांगता के पूर्वाग्रह के बिना उसके हितों की रक्षा करने के लिए उचित संरक्षात्मक एवं निवारक उपाय करेगा। 
  4. कोई भी उच्च शिक्षा संसथान भेदभाव के किसी भी रूप की अनुमति नहीं देगा या उसे नदरअंदाज नहीं करेगा। 
  5. यह सुनिचित करना की संतान के प्रमुख का कर्तव्य होगा कि इस विनियमों का विधिवत पालन हो और इस उद्देश्य के लिए उसके पास सभी आवश्यक शक्ति होगी। 
2 . सामान अवसर केंद्र के कार्य। 

सामान अवसर केंद्र के निम्लिखित कार्य होंगे :-
  1. उच्च शिक्षा संस्थानों में समुदाय को समग्र रूप से समता एवं सामान अवसर सुनिश्चित करना और सामाजिक समावेशन लाना। 
  2. छात्रों , शिक्षण एवं गैर शिक्षण कर्मचारियों के मध्य समता को बढ़ावा देना और साथ ही भेदभाव की धारणा का उन्मूलन करना। 
  3. विभिन्न सामाजिक पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों के मध्य शैक्षणिक संवाद तथा स्वस्थअंतर्वैयक्तिक सम्बन्ध यानी दो अधिक लोगो के मध्य संबंधों के विकास के लिए एक सामाजिक रूप से अनुकूल वतावरण बनाना। 
  4. हितधारकों को सामाजिक समावेशन के प्रति संवेदनशील बनाने के प्रयास करना। 
  5. समाज के वंचित वर्ग से सम्बंधित व्यक्तियों या छात्रों के समूह की सहायता करना। 
  6. किसी भी भेदभाव की घटना की शिकायत करने वाले पीड़ित व्यक्ति को प्रतिशोध से बचाना।  
  7. सामाजिक रूप से वंचित वर्ग के कल्याण हेतु योजनाओं एवं कार्यक्रमों से सम्बंधित सूचना , साथ ही समय समय पर जारी सरकार तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग या अन्य सम्बंधित एजेंसियों / संगठनों के अधिसूचनाएं / ज्ञापन , कार्यालय आदेश का प्रसार करना। 
  8. उन कार्यों की एक उदाहरणात्मक सूची तैयार करना एवं प्रसारित करना जिन्हे भेदभाव माना  जायेगा। 
  9. समाज के वंचित समूहों से सम्बंधित छात्रों के प्रवेश के लिए समावेशी प्रक्रियाएं तैयार करना। 
  10. वंचित समूहों से सम्बंधित छात्रों की सहायता प्रदान करने के लिए शैक्षणिक एवं वित्तीय संसाधन जुटाने हेतु सरकार एवं अन्य एजेंसियों / संगठनों के साथ तालमेल स्थापित करना। +
  11. भेदभाव की किसी भी घटना ककी शिकायत करने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल बनाए रखना। 
  12. उच्च शिक्षा संसथान में समता को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक समझे जंव वाले अन्य कार्य करना। 
3 . समता हेल्पलाइन। 
  1. प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थानों  एक समता हेल्पलाइन नंबर स्थापित एवं संचालित करेगा जो 24 घण्टे चालू  रहेगी,यदि किन्ही कारणवश किसी महाविद्यालय की समता हेल्पलाइन चालू नहीं है , तो उस कॉलेज के हितधारकों के लिए सम्बद्ध विश्वविद्यालय की समता हेल्पलाइन सुलभ होगी। 
  2. समता हेल्पलाइन किसी भी ऐसे हितधारक के लिए सरलता से मिलने वाली होगी जो किसी भेदभाव से सम्बंधित घटना के कारण संकट में हों। 
  3. यदि सूचना देने वाला व्यक्ति अनुरोध करता है ,तो भेदभाव  सुचना देने वाले हितधारक की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। 
4 . भेदभाव की घटना के मामले में प्रक्रिया ( शिकायत , समाधान / निवारण )
  1. कोई भी पीड़ित व्यक्ति किसी भी भेदभाव की घटना की सूचना ऑनलाइन पोर्टल , लिखित रूप से या सामान अवसर केंद्र के समन्वयक को ईमेल भेजकर दे सकता।  पीड़ित व्यक्ति की पहचान अनुरोध किये जाने पर गोपनीय रखी जाएगी। 
  2. पीड़ित व्यक्ति के पास घटना की सूचना मामला हेल्पलाइन पर देने का विकल्प भी होगा। हेल्पलाइन पर प्राप्त सूचना यदि प्रथम दृष्ट्या दंड विधियों के अंतर्गत कोई मामला बनता है ,तो सम्बंधित पुलिस प्राधिकारियों को अग्रेषित कर दी जाएगी। 
  3. समता समिति , ऐसी सुचना प्राप्त होने पर उचित कार्यवाई करने के लिए 24 घंटे के भीतर बैठक करेगी।  समता समिति मामले को विश्वविद्यालया अनुदान आयोग के किसी अन्य विनियमों या वर्तमान में लागु किसी अन्य कानून के तहत गठित किसी समिति को भी विनिर्दिष्ट कर सकती है , यदि उसकी राय है कि मामले को उस समिति द्वारा भीतर ढंग से निपटाया जा सकता है या विनियमों या कानून के प्रावधानों के अनुसार उस समिति द्वारा उस पर कार्रवाई की जनि आवश्यक है या वह समिति पहले से ही मामले की जाँच में है। 
  4. समता समिति 15 कार्य दिवसों के भीतर अपनी रिपोर्ट संसथान के प्रमुख को प्रस्तुत करेगी।  समता समिति की रिपोर्ट की एक प्रति पीड़ित व्यक्ति को भी भेजी जाएगी। 
  5. समता समिति से रिपोर्ट प्राप्त होने पर संस्थान का प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थान के नियमों के अमुसार 7 कार्य दिवसों के भीतर आगे की कार्रवाई शुरू करेगा हालाकिं यदि दंड विधि के तहत कोई मामला बनता है , तो पुलिस अधिकारीयों को तुरंत सूचित किया जायेगा। 
  6. यदि संस्थान के प्रमुख के विरुद्ध कोई शिकायत की जाती है , तो समता समिति की बैठक की अध्यक्षता समाना अवसर केंद्र के समन्यवयक द्वारा की जाएगी और समता समिति की रिपोर्ट संस्थान के प्रमुख के अगले उच्चतर प्राधिकारी को अग्रेषित की जाएगी। 

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