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चेक क्या होता है और चेक कितने प्रकार के होते है ? what is cheque and type of cheque

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नमस्कार मित्रों ,

आज के इस लेख में हम जानेंगे की चेक क्या होता है और चेक कितने प्रकार के होते है ? आप लोगो ने चेक इस शब्द को सबसे पहले कब सुना होगा सायद तब जब आप अपना बैंक अकाउंट खुलवाने बैंक गए होंगे और वहाँ आपको बैंक पासबुक , एटीएम और साथ चेक बुक भी प्रदान की गयी होगी। 

अब ये सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज जिनको बड़ा सुरक्षित रखना पड़ता है क्योंकि इनमें बैंक अकाउंट से सम्बंधित जानकारी का उल्लेख होता है।  एटीएम व् चेक बुक का उपयोग धनराशि की निकासी व् लेनदेन में करते रहते है और यह सुविधाजनक भी है। 

चेक क्या होता है और चेक कितने प्रकार के होते है ? what is cheque and type of cheque



पर क्या हम ये जानते है क्या कि चेक कितने प्रकार के होते है और चेक क्या है ? इसी को विस्तार से जाने। 

1. चेक क्या होता है ?

निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट 1881 यानी परक्राम्य लिखित अधिनियम 1881 की धारा 6 में चेक को परिभाषित किया गया है। चेक एक ऐसा विनिमय पत्र है जो विनिर्दिष्ट बैंककार  पर लिख कर दिया गया है और उसका मांग पर से अन्यथा देय होना अभिव्यक्त नहीं है और इसके अंतर्गत संक्षेपित चक का इलेक्ट्रॉनिक प्रतिरूप और इलेक्ट्रॉनिक रूप में चेक भी है। 

चेक जो की एक ऐसा लिखित शर्तरहित विनिमय पत्र है , जिसके द्वारा एक बैंक खाताधारक अपने बैंक को निर्देशित करता है की दूसरे बैंक खाताधारक को एक निश्चित अवधि जो चेक में लिखित है निश्चित भुगतान जो धनराशि चेक में लिखित है भुगतान करें। चेक में तीन व्यक्तियों / पक्षकारों की मुख्य भूमिका होता है। 
  1. drawer - आहर्ता - वह व्यक्ति को विनिमय पत्र यानी चेक तैयार करता है , जो तीसरे व्यक्ति को धनराशि का भुगतान करने का आदेश देता है। चेक जारी करने वाला प्रथम पक्षकार drawer / आहर्ता। 
  2. drawee -स्वीकारकर्ता - वह व्यक्ति जो चेक में लिखित धनराशि के भुगतान करने के आदेश को स्वीकार करता है , जिसे  विनिमय पत्र दिया जाता है। चेक के भुगतान हेतु स्वीकार करने वाला द्वितीय पक्षकार drawee / स्वीकारकर्ता। 
  3. payee -प्राप्तकर्ता - वह व्यक्ति जिसके पक्ष में विनिमय पत्र यानी चेक में लिखित धनरशि का अंतिम रूप से देय होता है। यानी चेक में लिखित धनराशि को स्वीकार करने वाला तीसरा पक्षकार। चेक में लिखित धनराशि स्वीकार करने वाला तीसरा पक्षकार payee / प्राप्तकर्ता। 
चेक बैंक खाताधारक द्वारा दिया जाने वाला भुगतान का एक साधन है जो की दूसरे बैंक खाताधारक को प्रत्यक्ष धनराशि नही देता है। अब चेक धारक पर निर्भर करता है कि वह कैश ले या अपने बैंक अकाउंट में धनराशि जमा करे। 

2. चेक कितने प्रकार के होते है ?

चेक के प्रकार निर्भर करता है जारीकर्ता और अदाकर्ता कौन है। जारीकर्ता और अदाकर्ता की अनिवार्यता के आधार पर निम्न प्रकार के चेक है :-
  1. Bearer Cheque.
  2. Order Cheque.
  3. Crossed Cheque.
  4. Open Cheque.
  5. Post-Dated Cheque 
  6. Stale cheque.
  7. Bank Cheque.
  8. Travellers Cheque.
  9. Self Cheque
इन सभी को विस्तार से जाने। 

1. Bearer Cheque / बेयरर चेक। 
 बेयरर चेक एक ऐसा चेक है जिसमें लिखित धनराशि का भुगतान उसी व्यक्ति को किया जाता है , जो उस चेक को अपने पास रखता है या उस ले के जाता है। ये चेक वितरण द्वारा हस्तांतरणीय है जिसका मतलब यह है की एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पास हो सकता है, जिसके कारण तेजी व् आसानी से लेनदेन की अनुमति मिलती है। जो व्यक्ति चेक को बैंक में भुनाने के लिए  ले जा रहा है बैंक द्वारा उसको भुगतान किया जा सकता है। बेयरर चेक में लिखित धनराशि के भुगतान के लिए बैंक को चेक जारीकर्ता से किसी अन्य प्राधिकरण की आवश्यकता नहीं पड़ती है।  

बेयरर चेक की पहचान उसपर मुद्रित अंग्रेजी का शब्द pay  or Bearer लिखित होता है। 

2. Order Cheque / आर्डर चेक। 

चेक के ऊपरी भाग में दो शब्द लिखे होते है pay और bearer जब आर्डर चेक पास किया जाता है , तो इसमें बेयरर को कट कर दिया जाता है और pay में उस व्यक्ति का नाम लिखा जाता है जिसको चेक के माध्यम से लिखित धनराशि का भुगतान किया जाना है। बैंक उसी व्यक्ति को चेक का भुगतान करती है जिसका नाम payee  में लिखित है। इस आर्डर चेक का भुगतान बैंक द्वारा नगद के रूप में तभी किया जाता है जब आर्डर चेक जारीकर्ता ने चेक के पीछे वाले भाग में धनराशि पाने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर प्रमाणित किये है। 

बैंक चेक का नगद भुगतान करने से पहले चेक की धनराशि पाने वाले व्यक्ति की पहचान उसके हस्ताक्षर का मिलान कर और आधार कार्ड या कोई अन्य पहचान पत्र उपलब्ध करवाने पर ही करता है। आर्डर चेक में लिखित धनराशि का भुगतान किसी अन्य व्यक्ति को नहीं किया जाता है भले ही वो जानने वाला ही क्यों न है। 

3. Crossed Cheque / क्रॉस्ड चेक 

चेक के ऊपरी बाएं भाग में दो समानांतर रेखाओं के मध्य लिखित अकाउंट पेयी ओनली यह सुनिचित करता है कि चेक में लिखित धनराशि का भुगतान केवल उसी व्यक्ति को किया जायेगा जिसका नाम लिखित होता है। क्रॉस्ड चेक का नगद भुगतान न होकर इसमें लिखित धनराशि का भुगतान चेक प्राप्तकर्ता के बैंक खाते में जमा होता है।  

क्रॉस्ड चेक भगुतान को प्रतिबंधित करता है कि लिखित धनराशि का भुगतान केवल क्रॉस किये गए बैंक में ही देय होगा। 

4.  Open cheque / ओपन चेक। 

ओपन चेक एक ऐसा चेक है जो की किसी भी प्रकार से प्रतिबंधित नहीं किया जाता है , ऐसे चेक धारक द्वारा चेक को किसी भी बैंक में भुनाया जा सकता है और चेक धारक बैंक के कॅश काउंटर से लिखित धनराशि नगद रूप से प्राप्त कर सकता है या अपने बैंक में जमा कर अपने अकाउंट में ट्रांसफर करा सकता है। 

5. Post -dated Cheque / पोस्ट डेटेड चेक। 

पोस्ट डेटेड चेक एक ऐसा चेक है जो की आगे की आने वाली तिथि को ही भुनाया जा सकता है। अर्थात जो तारीख चेक में लिखी है उसी निर्धारित तिथि को ही चेक धारक द्वारा बैंक में भुना कर भुगतान पाया जा सकेगा। पोस्ट डेटेड चेक की वैधता लिखित तिथि के बाद ही है उससे पूर्व नहीं। 

 6.  Stale Cheque /  बासी चेक। 

स्टेल चेक एक ऐसा चेक है जो की कल बाधित चेक होता है। अर्थात चेक एक निर्धारित समयावधि के भीतर भुना लिया जान अनिवार्य है अन्यथा वह चेक वैध नहीं होगा। स्टेल चेक में लिखित धनराशि का भुगतान उसमे लिखित तिथि के 3 माह के भीतर करा लेना चाहिए। लिखित तिथि से 3 माह की अवधि पूर्ण हो जाने के बाद बैंक ऐसा चेक का भुगतान नहीं करती है। 

7. banker cheque / बैंकर चेक। 

बैंकर चेक एक ऐसा चेक है जो कि बैंक द्वारा इस प्रकार से जारी किया जाता है की बैंक इन चेकों को एक खाताधारक की तरफ से उसी शहर में किसी अन्य व्यक्ति को प्रेषण करने के लिए जारी किया जाता है। इस बैंकर चेक के जरिये बैंक खाताधारक के अकाउंट में निर्दिष्ट धनराशि डेबिट की जाती है।   

8.  Traveller Cheque / ट्रैवेलर्स चेक। 

ट्रैवलर चेक एक ऐसा चेक है जो की जब उपयोग में लाया जाता है जब कोई व्यक्ति कहीं यात्रा में निकलता है।  जब कोई एक देश से दूसरे देश यात्री के रूप में जाता है , तो साधारण से बात है की वह अत्यधिक नगद के  साथ यात्रा करना सुरक्षित नहीं होगा। तो यात्री कैश की बजाय ट्रैवलर चेक साथ लेकर यात्रा करते है। ट्रैवलर चेक उन्हें बैंक के द्वारा जारी किया जाता है और किसी अन्य स्थान या देश में स्थिति बैंक में नगद के रूप में भुनाए जा सकते है।  ट्रैवलर चेक की समय सीमा समाप्त नहीं होती और ये चेक भविष्य की यात्राओं में सहायक होते है। 

9.Self Cheque / सेल्फ चेक। 

सेल्फ चेक एक ऐसा चेक होता है जो की व्यक्ति स्वयं अपने लिए जब बैंक से चेक के माध्यम से नगद प्राप्त करना चाहता है , तो चेक में सेल्फ लिख कर स्वयं के लिए भुगतान करवाता है। 




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