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क्या है किसान बही ? किसान बही तैयार कैसे होती है ? किसान बही में क्या-क्या लिखा होता है ?

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नमस्कार मित्रों,

आज के इस लेख में आप सभी को " किसान बही " के बारे में बताने जा रहा हु। यदि आप सिविल की वकालत  करने की सोच रहे है या हाल ही में शुरू कर दी है, तो आपको किसान बही के बारे में जानना जरुरी है। थोड़ा बहुत अंदाजा तो लग ही रहा होगा कि इसका सम्बन्ध किसानों से है।  

kisan bahi क्या है किसान बही ? किसान बही तैयार कैसे होती है ? किसान बही में क्या -क्या लिखा होता है ?


तो चलिए इसके बारे में विस्तार से जाने। 

क्या है किसान बही ?

राजस्व संहिता 2006 की धारा 41 में किसान बही के बारे में प्रावधान किया गया है। जिले का कलेक्टर हर साल जिले के लेखपाल से उनके क्षेत्र में भूमि से संबंधित हर एक खातेदार की अलग -अलग खतौनी तैयार करने का आदेश देगा, प्रति 6 वर्ष के बाद किसान बही तैयार की जाएगी। इस किसान बही में प्रत्येक किसान यानी खातेदार वो चाहे भूमिधर हो या सह भूमिधर हो उसकी जिले में सभी भूमि से सम्बंधित ब्यौरा लिखित रूप में दर्ज होता है।  इस भूमि के सम्बन्ध में किसी भी प्रकार का कोई संशोधन यानी बदलाव, इंद्राज आदि होता है तो खातेदार के आवेदन पर उसे इस किसान बही में अंकित किया जाता है। 

किसान बही तैयार कैसे होती है ?

राजस्व संहिता की धारा 41 में किसान बही के संबंध में प्रावधान किया गया है जिसके अंतर्गत :-
  1. अधिनियम के तहत प्रत्येक जिले के कलेक्टर को शक्ति प्राप्त है कि वह अपने जिले में प्रत्येक खातेदारों के उनके सभी भूमि के सम्न्बंध में एक किसान बही तैयार करवाए। 
  2. कलेक्टर अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए जिले के प्रत्येक लेखपाल को आदेशित कर प्रत्येक वर्ष प्रत्येक खातेदार के नाम से अलग -अलग खतौनी तैयार करवाएगा। 
  3. प्रत्येक 6 वर्ष के लेखपाल द्वारा तैयार अलग-अलग-खातेदारों की खतौनी में दर्ज खाते की भूमि से सम्बन्ध में किसान बही तैयार करवा कर प्रत्येक खातेदार वो चाहे भूमिधर हो या सह भूमिधर हो इस किसान बही को प्रदान कराएगा। 
किसान बही में क्या -क्या लिखा होता है ?

राजस्व संहिता 2006 की धारा 41 में किसान बही के सम्बन्ध में प्रावधान किया गया है, जिसके तहत किसान बही में खाते की भूमि के सम्बन्ध में निम्न प्रकार का विवरण अभिलखित / दर्ज होता है :-
  1. किसान बही में किसी भी खातेदार के द्वारा उसके कब्जे में समस्त जोत यानी खेती की भूमि के सम्बन्ध में विवरण लिखा होता है। 
  2. जब किसी खातेदार को धन -राशि की आवश्यकता होती है, तो वह किसी बैंक या वित्तीय संस्था के पास ऋण के लिए आवेदन करता है, ऋण के लिए वह सिक्योरिटी के रूप में अपनी किसान बही में अभिलखित जोट का धारक है ऐसा दावा करता है, ऐसे दवे के आधार पर बैंक या अन्य वित्तीय संस्था ऋण प्रदान करती है। ऐसे प्रत्येक ऋण के सम्बन्ध में ब्यौरा किसान बही में अभिलिखित होता है। सरल शब्दों में ऋण की धनराशि का विवरण। 
  3. बैंक या अन्य वित्तीय संस्था से खातेदार द्वारा लिए गए ऋण के अंतिम पुनर्भुगतान का विवरण किसान बही में अभिलिखित किया जायेगा। 
  4. बैंक या अन्य वित्तीय संस्था से खातेदारों द्वारा लिए गए ऋण के अंतिम पुनर्भुगतान की पृष्ठि किसान बही में की जाएगी। 
संयुक्त जोत के सम्बन्ध में कौन किसको किसान बही मिलेगी ?

राजस्व संहिता 2006 की धारा 41 उपधारा 3 के अनुसार संयुक्त जोत की स्थिति में किसान बही केवल ऐस एक या अधिक अभिलिखित सह-खातेदारों को दी जाएगी जो इसके लिए आवेदन करेगा।  

किसान बही का शुल्क क्या होगा ?

राजस्व संहिता 2006 धारा 41 की उपधारा 4 के अनुसार खातेदार किसान बही के लिए एक निर्धारित मूल्य ऐसी रिरित से भुगतान करेगा जैसी रीती निर्धारित की जाये।  

किसान बही में संशोधन ?

राजस्व संहिता 2006 की धारा 41 उपधारा 5 के अनुसार किसान बही रखने वाला हर एक खातेदार अतिरिक्त भुगतान किये बिना समय -समय पर अधिकार अभिलेख (खतौनी) में किये किये गए संशोधन को अपनी किसान बही में सम्मिलित कराने का हक़दार होगा। 

क्या किसान बही के आधार पर ऋण लेने के लिए एक शपथ पत्र देना होगा ?

राजस्व संहिता 2006 की धारा 41 उपधारा 7 के तहत खातेदार द्वारा किसी भी बैंक या अन्य वित्तीय संस्था से  ऋण प्राप्ति के लिए आवेदन करेगा, तो ऐसे में बैंक या अन्य वित्तीय संस्था के समक्ष घोषणा करते हुए एक शपथ पत्र देना होगा, जिसमे वह सशपथ बयान करेगा कि उसने किसान बही में सम्मिलित जोट को प्रतिभूति के रूप में रख कोई अन्य ऋण जो पूर्णतः या अंशतः भुगतान नहीं किया गया है ऐसा ऋण नहीं प्राप्त किया है और खातेदार ने जोत या उसके अंश को किसी भी व्यक्ति को किसी अन्य रीति से चाहे जो भी हो, अंतरित नहीं किया है। 

सरल शब्दों में कहे तो, खातेदार द्वारा यह शपथ की जाती है कि वह उस अमुक जोत का मालिक है, उसने उस जोट को गिरवी रख किसी भी बैंक या वित्तीय संस्था से कोई अन्य ऋण नहीं प्राप्त किया है और न ही उस जोत व उसमे से किसी अंश को किसी व्यक्ति को किसी अन्य रीती से चाहे जो भी हो अंतरित नहीं किया है। 


यदि ऋण की प्राप्ति के लिए दिए शपथपत्र में झूठा कथन किया जाता है तो क्या दंड होगा।  

राजस्व संहिता 2006 की धारा 41 उपधारा 8 के अनुसार खातेदारों द्वारा बैंक या अन्य किसी वित्तीय संस्था से ऋण लेते समय शपथ पत्र द्वारा एक घोषणा करनी होती है, इस घोषणा में जो सशपथ बयान करते है कि जो कथन इस शपथ पत्र में लिखित है, वह कथन उनकी जानकारी या विश्वास के अनुसार सत्य है और उसके सत्य होने के विषय में उसका विश्वास है, यदि ऐसे कथन उसकी जानकारी या विश्वास के अनुसार असत्य हुए या कथन के सत्य होने के विषय में उसको विश्वास नहीं है तो दण्डित किया जायेगा। 

दंड :-  3 वर्ष तक कारावास की सजा से और जुर्माने से भी दण्डित किया जायेगा। 



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