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जाने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955, की धारा 3 व् धारा 7 क्या कहती है ?

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नमस्कार मित्रो, 
आज के इस लेख में आप सभी को " आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955, की धारा 3 व् धारा 7 " के बारे में बताने जा रहा हु। आवश्यक वस्तु को परिभाषित किया जाये, तो कह सकते है कि वे वास्तु जो किसी भी व्यक्ति के जीवन निर्वाह के लिए अय्तंत आवश्यक है, जिनके पूर्ति के आभाव में व्यक्ति के जीवन को क्षति पहुंच सकती है। इस पृथ्वी पर जीवन जीने के लिए व्यक्ति को, खाद्य सामग्री, पेय पदार्थ और औषधि इन मुख्य वस्तुओँ की अय्तंत आवश्यकता पड़ती है, और पड़ती रहेंगी। 

ऐसी ही अन्य महत्वपूर्ण आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, भारतीय सरकार द्वारा सन, 1955 में आवश्यक वस्तुओ के उपत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित करने के लिए, आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 लागु करना पड़ा। 

तो चलिए, आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के बारे में और इस अधिनियम की मख्य धाराओं के बारे में विस्तार से जाने। 

essential commodities act

क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम 1995 ?

आवश्यक वस्तु अधिनयम, 1955, को परिभाषित किया जाये, तो यह अधिनियम आवश्यक वस्तुओं के उप्तादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित करने के लिए पारित किया गया। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य उत्पादन निर्माता खाद्य सामग्री, पेय पदार्थ व् औषधियों का उत्पादन एक सिमित मात्रा में करे, उत्पादन का वितरण एक व्यवस्थ्ति ढंग से करे, और इन उत्पादित सामग्री की बिक्री इस प्रकार से करे कि उपभोक्ताओं को यह सामग्री उचित दाम पर उपलब्ध हो ,ताकि समाज का प्रत्येक नागरिक जिसको इन आवश्यवक सामग्री की आवश्यकता हो वह सामग्री खरीदने में सक्षम हो। 

इस अधिनियम में व्यक्ति के जीवन की आवश्यक जरुरतों की पूर्ति करने वाली प्रत्येक वस्तुओं की उचित बिक्री हेतु प्रावधान किया गया, अधिनियम में राज्य सरकार व् केंद्र सरकार को नियम बनानेव व् उसे लागु करने की शक्तियां प्रदान की गयी। अधिनियम के तहत आवश्यक वस्तुओं के सम्बन्ध में नियम व् कानून  बनाये गए है, यदि इन नियमों व् कानूनों का उल्लंघन होता है ,तो सजा व् आर्थिक दंड का भी प्रावधान किया गया है।  

आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में कौन सी वस्तुए शामिल है ?

आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955, की धारा 2 उपखण्ड (क) के अंतर्गत 7 बड़ी चीजों को आवश्यक वस्तुओं  की श्रेणी में डाला गया है, जो की निम्नलिखित है :-
  1. औषधि।
  2. उर्वरक, चाहे कार्बनिक, अकार्बनिक या मिश्रित हो.
  3. खाद्य पदार्थ जिसके अंतर्गत खाद्य :- दाल, चावल, गेंहूं, गन्ना, गुड़, चीनी, तेल और तिलहन शामिल है। 
  4. पूर्णयता कपास से बना अट्टु सूत। 
  5. पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पाद। 
  6. कच्चा जूट और जूट टेक्सटाइल। 
  7. खाद्य फसलों के बीज और फलो तथा वनस्पतियों की बीज,  पशु चारे के बीज, जूट और कपास के बीज। 
समय समय पर सरकार देश की परिस्थित के अनुसार इन 7 आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में अन्य आवश्यक वस्तुओं को जोड़ भी सकती और हटा ही सकती है।  हाल ही में देश विदेश में फैली कोरोना  वायरस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए इस सूची में दो वस्तुओ को आवश्यक वस्तुओ की सूची में जोड़ा गया ;-
  1. सैनिटाइजर,
  2. मास्क। 

आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3 क्या कहती ?

आवश्यक व स्तु अधिमियम कि धारा 3 - आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण आदि को नियंत्रित करने की शक्तियाँ :-

धारा 3 उपधारा 1 -  यदि केंद्र सरकार का यह विचार हो कि किसी आवश्यक वस्तु की आपूर्ति को बनाये रखने या वस्तु बढ़ाने के लिए या उचित मूल्य पर सामान वितरण और उपलब्धता को बनाये रखने के लिए ऐसा करना आवश्यक या उचित है और भारत की रक्षा के लिए या सैन्य संचालन के कुशल संचालन के लिए किसी आवश्यक वस्तु की प्राप्ति करने लिए ऐसा करना आवश्यक या उचित है, तो केंद्र सरकार आदेश द्वारा वस्तु के उत्पादन आपूर्ति और वितरण तथा उसमे व्यापर और वाण्जिय को नियमित या प्रतिषेध के लिए प्रावधान कर सकेगी। 

धारा 3 उपधारा 2 -  उपधारा 1 में दी गयी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव दाले बिना, एक आदेश द्वारा निम्नलिखित प्रावधान किया जा सकेगा :-

(क) :-  किसी आवश्यक वस्तु के उत्पादन या विनिर्माण के लिए लाइसेंस परमिट द्वारा या अन्यथा विनियमन के लिए प्रावधान,

(ख):- किसी बंजर भूमि या कृषि भूमि को, चाहे वह किसी भवन से जुडी हो या न हो उस पर सामान्यतः खाद्य फसलों या विनिर्दिष्ट फसलों को उगने के लिए खेती के अधीन लाना और सामान्यतः फसलों और विनिर्दिष्ट खाद्य फसलों की खेती को बनाये रखने या बढ़ाये रखने के लिए प्रावधान किये जा सकेंगे,

(ग):-  ऐसी कीमत नियंत्रित करना जिस पर किसी आवश्यक वस्तु को ख़रीदा या बेचा जा सकेगा,

(घ) :- किसी आवश्यक वस्तु के भंडारण ,परिवहन, वितरण, उपयोग, प्राप्ति, प्रयोग या उपभोग का लाइसेंस, परमिट द्वारा अन्यथा विनियमन,

(ड.) :- समान्तयः बेचे जाने के लिए रखी गयी किसी आवश्यक वस्तु को बेचने से रोकने के पर प्रतिबनध लगाना,

(च):- किसी व्यक्ति से , जो किसी आवश्यक वस्तु को स्टाक में रखता है व उसके उत्पादन में या उसे बेचने या खरीदने के कारोबार में लगा हुआ है, यह उम्मीद करना कि वह :-
       (क) :- उस सम्पूर्ण मात्रा या उसके विनिर्दिष्ट भाग का, जिसे वह स्टाक में रखता है या जिसका उसने उत्पादन किया हुआ या जिसे वह प्राप्त करता है, उस उत्पादन की बिक्री करेगा,
      (ख़):- किसी ऐसी वस्तु की दशा में , जिसका वह सम्भवतः उत्पादन करेगा या जिसे सम्भवतः प्राप्त करेगा, उसके द्वारा उत्पादन या प्राप्त करने पर उस सम्पूर्ण वस्तु या उसके विनिर्दिष्ट भाग की बिक्री करेगा। 

केंद्र सरकार या राज्य सरकार या ऐसी सरकार के किसी अधिकारी या अभिकर्ता को या ऐसी सरकार के स्वामित्वाधीन या उसके द्वारा नियंत्रित किसी विभाग को या ऐसे अन्य व्यक्ति या व्यक्ति के वर्ग को और ऐसी परिस्थतियों में जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाये आवश्यक वस्तु की बिक्री करे। 

 स्पष्टीकरण 1 - खाद्यानो, खाद्य तिलहनों या खाद्य तेलों के सम्बन्ध में खण्ड च  के अधीन किये गए किसी आदेश द्वारा, सम्बंधित क्षेत्र में ऐसे, कहदी तिलहनों या खाद तेलों के अनुमानित उपत्पादन का ध्यान में रखते हुए, ऐसे क्षत्र में उप्तादक द्वारा बिक्री की जाने वाली मात्रा नियत की जा सकेगी और श्रेणी के आधार पर ऐसे मात्रा उत्पादकों द्वारा अधिकृत या उनकी जोत के कुल क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए भी नियत की जा सकेगी या उनके नियत के लिए प्रावधान किया जा सकेगा। 

स्पष्टीकरण 2 :- खंड च  के उद्देश्य के लिए "उत्पादन" के अंतर्गत, उसके  व्याकरण के सम्बन्ध में रूप भेदों और सजातीय पदों सहित, खाद्य तेलों और चीनी का विनिर्माण भी शामिल है। 

(छ) ;- खाद्य पदार्थो से सम्बन्ध ऐसे वर्ग के किन्ही वाणिजियक या वित्तीय लेनदेन का विनियमन या प्रतिषेध जो कि आदेश देने वाले प्राधिकारी की राय में लोक हित के लिए हानिकर है या अविनियमित रहे तो हानिकर हो सकते है। 

(ज):- उपरोक्त  मामलो में से किसी का विनियमन या प्रतिषेध करने की दृष्टि से किसी जानकारी या आंकड़ों का संग्रहण करने के लिए आदेश ,

(झ):- किसी आवश्यक वस्तु के उत्पादन, आपूर्ति या वितरण या उसमे व्यापर और वाणिज्य में लगे व्यक्तियों से यह उम्मीद करना कि अपने कारोबार से सम्बंधित ऐसी पुस्तकें, लेखे और अभिकलेख रखे और निरीक्षण के लिए प्रस्तुत करे और उसके सम्बन्ध में ऐसे जानकारी दे जैसा कि आदेश में विनिर्दिष्ट। 

( झझ):- लाइसेंस, परमिट या दस्तवेजों का दिया जाना या जारी किया जाना, उसके लिए फीस लिए जाना, ऐसे किसी लाइसेंस या परमिट या अन्य दस्तावेज की शर्तों के सम्यक पालन के लिए प्रतिभूति के रूप में ऐसी राशि का, यदि कोई है, जो आदेश में विनिर्दिष्ट हो, जमा किया जाना, ऐसी जमा की गयी राशि या उसके किसी  भाग का किन्ही ऐसी शर्तों के उल्लंघन पर जब्त कर ली जाएगी और ऐसे जब्त का ऐसे प्राधिकरण द्वारा जो आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाये, न्यायनिर्णयन। 

(ज):- कोई आकस्मिक और अनुपूरक विषय, जिनके अंतर्गत विशिष्टतया परिसरों, विमानों, गाड़ियों, और अन्य प्रवहणो प्रवेश तथा उनकी पशुओं की तलाशी और परीक्षण एवं ऐसा प्रवेश, तलाशी, या परिक्षण  करने के लिए प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा निम्नलिखित कार्य भी है, जो कि ;-
  1. किन्ही ऐसी चीजों का, जिसके सम्बन्ध में ऐसे व्यक्ति के पास यह विश्वास करने कारण है की आदेश का उल्लंघन किया गया है,  किया ही जाने वाला है और किन्ही ऐसे पैकेज, कवरिंग या डब्बा या पत्रों को , जिसमे ऐसी चीज पाई जाये, जब्त कर ली जाएगी। 
  2. ऐसी चीजों को ले जाने में शामिल विमानों, जलयानों, गाड़ियों या अन्य प्रवाहनो या पशुओं का उस स्थिति में जब्त कर ली जाएँगी, जब ऐसे व्यक्ति के पास यह विश्वास करने का कारण जो कि  ऐसा विमान, जलाशय, गाड़ी, अन्य प्रवाहन या पशु इस अधिनियम के प्रावधान के अधीन जब्त करने योग्य है। 
  3. किन्ही ऐसी लेख -पुस्तक और दस्तावेजों का जब्त किया जाना, जो ऐसे व्यक्ति के विचार में इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही के लिए उपयोगी या सुसंगत हो या वह व्यक्ति, जिसकी अभिरक्षा से ऐसी लेख-पुस्तक या दस्तावेजों  को जब्त किया गया है, उस अधिकारी की उपस्थिति में , जिसकी अभिरक्षा  लेख-पुस्तक या दस्तावेजों है उनकी प्रतियां बनाने या उनसे उद्धरण लेने का हक़दार होगा। 
धारा  3 (उपधारा 3) - जहँ कोई व्यक्ति किसी आवश्यक वस्तु का विक्रय उपधारा 2 खंड (च) के प्रति निर्देश से किये गए किसी  आदेश के अनुपालन में  करता है वहां उसके लिए ऐसी कीमत दी जाएगी जो इसमें इसके पश्चात उपबंधित है,
(क) :-  जहँ कीमत, इस धारा के अधीन नियत नियंत्रित कीमत से, यदि कोई हो, संगत रह कर करार पाई जा सकती है वहां या ह करार पाई गयी कीमत,

(ख) :- जहाँ ऐसा कोई करार नहीं हो सकता वहां नियंत्रित कीमत के, यदि कोई हो , प्रति निर्देश के हिसाब से गणना की  गयी कीमत ,

(ग) :- जहाँ न तो खंड (क) और न ही खण्ड  (ख) ही लागु होता है वहां उस परिक्षेत्र में विक्रय की तारीख से प्रचलित बाजार दर पर गणना की गयी कीमत। 

 आवश्यक वस्तुओ की कीमत व् जमाखोरी के सम्बन्ध में क्या प्रावधान है ?

  उपधारा 3 क (1 ) :-  यदि केंद्र सरकार का यह विचार है कि किसी परिक्षेत्र में किन्ही खाद्य परतडतो में कीमतों के चढ़ाव को नियंत्रित करने या उनमे जमाखोरी को रोकने के लिए ऐसा करना आवश्यक है , तो वह शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निर्देश दे सकेगी कि उपधारा 3 में उपबंधित कीसी बात के होते हुए भी, वह कीमत, जिस पर की उस परिक्षेत्र में खाद्य पदार्थ की बिक्री उपधारा 2 के खंड च के प्रति निर्देश  आदेश के अनुपालन  किया जायेगा, इस उपधारा के उपबंधों के अनुसार विनियमित की जाएगी। 

2. इस उपधारा के अधीन जारी की गयी कोई अधिसूचना 3 माह से अधिक की ऐसी अवधि के लिए लागु रहेगी जैसा उस अधिसूचना में लिखित हो।
 
3.जहाँ उपधारा के अधीन अधिसूचना के जारी होने के बाद कोई व्यक्ति उसमे लिखित किसी प्रकार के खाद्य पदार्थ का और ऐसे विनिर्दिष्ट परिक्षेत्र में , बिक्री उपधारा 2 खंड च के प्रति निर्देश से किये गए किसी आदेश के अनुपालन में करता है वहां उसके लिए विक्रेता को निम्न लिखित कीमत दी जाएगी 

(क ) :-  जहाँ कीमत, इस धारा के अधीन नियत खाद्य पदार्थ की नियंत्रित कीमत से, यदि कोई हो, संगत रह कर करार पाई जा सकती है वहां करार पाई गयी कीमत दी जाएगी। 

(ख) :- जहाँ ऐसा कोई करार नहीं हो सकता वहां नियंत्रित कीमत के, यदि कोई हो, तो प्रति निर्देश के हिसाब से गणना की गयी कीमत दी जाएगी।  

(ग) :-  जहाँ न तो खंड क और न खंड ख ही लागु होता है वहां अधिसूचना की तारीख से ठीक आगे आने वाले 3 महीने की कालावधि के दौरान उस परिक्षेत्र में प्रचलित औसतन बाजार के हिसाब से प्रति निर्देश से गणना कर कीमत दी जाएगी। 

उपधारा 3 ख  :- जहाँ उपधारा 2 के खंड च  के प्रति निर्देश से किये गए किसी आदेश द्वारा किसी व्यक्ति से यह उम्मीद की गयी है कि  वह केंद्र सरकार या किसी राज्य सरकार के अवामित्वधीन  द्वारा नियंत्रित किसी निगम को ,किसी ऐसी श्रेणी या किस्म के खाद्यान्नों, खाद्य , तिलहनों या खेद तेलों,की बिक्री करे जिनके सम्बन्ध में उपधारा 3क के अधीन या तो कोई अधिसूचना जारी हो नहीं की गयी है या ऐसी अधिसूचना जररी की गयी है परन्तु लागु नहीं है , वहां सम्बंधित व्यक्ति को , उपधारा 2 में किसी प्रतिकूल  बात के होते हुए भी , उतनी कीमत का भुगतान , जो राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट , यथास्थित , ऐसे खाद्यान्नों खाद्य तिलहनों या खाद्य तेलों की वसूली कीमत के बराबर हो , निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखते हुए किया जायेगा :-

(क) - यदि ऐसी श्रेणी या किस्म के खाद्यान्नों, खाद्य तिलहनी या खाद्य तेलों के लिए कोई नियंत्रित कीमत इस धारा के अधीन या उस समय लागु किसी अन्य विधि द्वारा या उसके अधीन नियत की गयी है तो उस नियत कीमत का ध्यान रखा जायेगा,

(ख) - फसल की साधारण संभावनाओं का ध्यान रखा जायेगा ,
 
(ग)- उपभोक्ता को विशेष रपोप से उन उपभोक्ताओं के कमजोर वर्गों को, ऐसी श्रेणी या किस्म के खाद्यान्न , खाद्य तिलहन या खाद्य तेल उचित  कीमत पर उपलब्ध कराने की आवश्यकता को ध्यान में रखा जायेगा,

(घ )- यदि सम्बंधित श्रेणी या किस्म के खाद्यान्नों, खाद्य तिलहनों या खाद्य तेलों की कीमत के सम्बन्ध में कृषि मूल्य अयोग्य की सिफारिशें , यदि कोई है ,तो उन शिफारिशों को ध्यान में रखा जायेगा। 

उपधारा 3 ग :- जहाँ उपधारा 2 के खंड  च के प्रति निर्देश से किए गए किसी आदेश द्वारा किसी उत्पादक से यह  उम्मीद की जाती है कि वह किसी प्रकार की चीनी चाहे केंद्र सरकार या किसी राज्य सरकार या ऐसी सरकार के किसी अधिकारी या अभिकर्ता को या किसी अन्य व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को चाहे उपखण्ड 3 क  के अंतर्गत ऐसी अधिसूचना जारी की गयी हो या नहीं, वहां उपधारा 3 लिखित किसी  बात के होते हुए भी , उसके लिए उत्पादक को केवल ऐसी कीमत दी जाएगी, जैसी केंद्रीय सरकार निम्नलिखित को ध्यान में रखते हुए आदेश द्वारा निर्धारित करे :-

(क ) - उचित एवं लाभप्रद कीमत , यदि कोई हो , जो इस धारा के अधीन केंन्द्रीय सरकार द्वारा गन्ने के लिए नियत की गयी हो,

(ख )- चीनी की विनिर्माण लागत को ध्यान में रखा जायेगा,

(ग)- वह शुल्क या कर , यदि कोई हो , जो इस पर भुगतान किया गया है या भुगतान किया गया हो,

(घ )- चीनी कारोबार में लगाई गयी पूंजी पर उचित वापसी को ध्यान में रखा जायेगा। 

 परन्तु यह कि केंद्रीय सरकार विभिन्न क्षेत्रो या कारखानों या शक्कर की किस्मो के लिए, समय समय पर अलग अलग कीमते निर्धारित  कर सकेगी। 

परन्तु, आगे यह भी कि,जहाँ चीनी मौसम 2008 -2009 तक उत्पादित चीनी के लिए लेवी -चीनी की अंतिम कीमत का निर्धारण किया गया हो, कीमत का अंतिम निर्धारण अक्टूबर 2009 के पहले दिन ठीक पहले मौजूद इस उपखण्ड के प्रावधानों के अनुसार किया जा सकेगा। 

स्पष्टीकरण ;- उपधारा 3 ग के उपखंडों के उद्देश्य के लिए यह सपष्ट करना आवश्यक है कि :-

(क ) -  उचित और लाभप्रद कीमत - उपखण्ड  क के अंतर्गत उचित और लाभप्रद कीमत से अभिप्राय केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित गन्ने  की कीमत से है। 

(ख )- चीनी विनिर्माण लागत -  चीनी विनर्माण लागत से अभिप्राय यह है , उत्पादक द्वारा धारण किये जाने की सीमा तक खरीदी केंद्र से कारखाने के द्वार तक गन्ने के परिवहन  करने में अये हुए शुद्ध खर्च को शामिल करते हुए, गन्ने को शक्कर में परिवर्तन करने में आया शुद्ध खर्च शामिल होगा। 

(ग ) उत्पादक - उत्पादक से अभिप्राय  चीनी विनिर्माण का कारोबार करने वाले व्यक्ति से है। 

(घ )- कारोबार में लगाई गयी पूंजी पर उचित वापसी -  कारोबार में लगाई गयी पूंजी पर उचित वापसी से अभिप्राय यह है, शुद्ध सुनिश्चित आस्तियों पर वापसी एवं शक्कर विनर्माण के सम्बन्ध में उत्पादक द्वारा लगाई गयी कार्यशील पूंजी , जिसमे गन्ने के उगाही के लिए इस खंड द्वारा निर्धारित उचित और लाभप्रद कीमत शामिल है। 

स्पष्टीकरण 2-  शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि  इस उपधारा  क में लिखित "उचित और लाभप्रद कीमत " खंड ख में लिखित "चीनी की विनिर्माण लागत " और लहंद घ में लिखित "लगाई गयी पूंजी पर उचित वापसी " में किसी राज्य सरकार क्र किसी आदेश या अधिनियम के अधीन  संदत्त या संदेय  या उत्पादक और गन्ने उगने वाले या गन्ने उगने वालो की किसी सहकारी समिति के बीच तय की गयी कोई कीमत, शामिल नहीं है। 

 उपधारा 3 घ -  केंद्रीय सरकार यह निर्देश दे सकेगी कि कोई उत्पादक, उत्पादकर्ता या नियातकर्ता किसी प्रकार की चीनी की बिक्री नहीं करेगा या नहीं ही उपयोग करेगा और न ही वितरण करेगा या कारखाने के बंधित गोदाम से किसी प्रकार की चीनी को नहीं हटाएगा, जिसमे उसे उत्पादित किया जाता है, चाहे ऐसा गोदाम कारखाने के परिसर के भीतर या बाहर स्थित है या आयातकर्ता और निर्यातकर्ता के जैसी स्थित हो, भण्डारगार  हटाएगा , सिवाय सरकार द्वारा जारी किये गए निर्देश के अधीन और सरकार के अनुसार ही बिक्री करेगा। 

परन्तु यह उपधारा किसी उत्पादक या आयातकर्ता द्वारा अनुस्कोहित बैंक के पक्ष में जैसा कि भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 2 के खंड ड में परिभाषित है या बैंक कार कंपनी का अर्जन और अंतरण अधिनियम 1970 की धारा 3  गठित किसी उसी के जैसी नए बैंक पक्ष में ऐसी चीनी के गिरवी रखने को प्रभावित नहीं करेगा, इसलिए यह कोयो ऐसा बैंक केंद्रीय सरकार द्वारा जारु किये गए निर्देश के अधीन और निर्देश के अनुसार सिवाय उस बैंक को गिरवी रखी गयी चीनी की बिक्री नहीं करेगा। 

उपधारा 3 ड -    केंद्रीय सरकार, समय समय से , असाधारण या विशेष आदेश द्वारा, किसी उत्पादक या उत्पादकर्ता या नियातकर्ता या मान्यता प्राप्त व्यापारी  किसी वर्ग या मान्यता प्राप्त व्यापारियों को निर्देश में विनिर्दिष्ट ढंग से चीनी के किसी प्रकार  उत्पादन , स्टाक के रखरखाव , भंडारण , बिक्री, श्रेणीकरण, पैक करने , चिन्हीकरण , तौल , उपयोग, परिदान और वितरण से सम्बंधित कार्यवाही करने का निर्देश देसकेगी :-
(क) :- उत्पादक से अभिप्राय  चीनी के विनिर्माण का कारोबार करने वाला व्यक्ति से है ,

(ख ) :- मान्यता प्राप्त व्यापारी से अभिप्राय चीनी खरीद बिक्री या वितरण का कारोबार करने वाले व्यक्ति से है ,

(ग) :-  चीनी  से अभिप्राय रोपण , सफ़ेद चीनी , कच्ची चीनी या शुद्ध चीनी शामिल है, चाहे देश में उत्पादित हो या बहार से मंगवाई गयी हो। 

उपधारा 4  - केंद्रीय सरकार का यह विचार हो कि किसी आवशयक वस्तु  के उत्पादन और आपूर्ति को बनाये रखने या बढ़ाने के लिए ऐसा करना आवश्यक है तो वह आदेश द्वारा किसी व्यक्ति को जो इसके पश्चात इसमें अधिकृत नियंत्रक के रूप में निर्दिष्ट है उस वस्तु के उत्पादन और आपूर्ति में लगा किसी ऐसे उद्योग या उसके किसी भाग के सम्बन्ध , जैसा कि  उस आदेश में विनिर्दिष्ट हो , नियंत्रण कैसे कार्यो का प्रयोग करने के लिए अधिकृत कर सकेगी जैसे उसमे उपबंधित किये जाएं और जब तक ऐसे आदेश किसी उद्योग या उसके किसी भाग के सम्बन्ध में लागु है,

(क) :- जो भी आदेश अधिकृत नियंत्रक को केंद्रीय सरकार द्वारा दिए जाएं उसके अनुसार वह अपने कृत्यों का प्रयोग करेगा, किन्तु  इस प्रकार कि उसे उद्योग के प्रबंध के भारसाधक व्यक्तियों के कृत्यों का अवधारण करने वाली किसी अधिनियमित या किसी लिखित के उपबंधों से असंगत कोई निदेश वहां तक के सिवाय, जहाँ तक कि  आदेश द्वारा विनिर्दिष्टतया उपबंधित हो , देने की शक्ति नहीं होगी,और 

(ख ) :- आदेश के उपबनधो के अधीन अधिकृत नियंत्रक द्वार जो भी आदेश दिए जाएँ उनके अनुसार उद्योग या उसके भाग को चलाया जायेगा और उस भाग के सम्बन्ध में प्रबंध के किन्ही कृत्यों से सम्बन्ध कोई भी व्यक्ति ऐसे सभी निर्दशों का अनुपालन करेगा। 

उपधारा 5 - इस धारा  के अधीन दिया गया कोई भी आदेश :-
(क) :- सामान्य प्रकार के या व्यक्तियों के किसी वर्ग को प्रभावित करने वाले आदेश की दशा में , शासकीय राजयपत्र में अधिसूचित  किया जायेगा ;

(ख) :- किसी विनिर्दिष्ट व्यक्ति को निर्दिष्ट आदेश की दशा में , ऐसे व्यक्ति पर :-
  1. उस व्यक्ति को देकर या देने के लिए प्रस्तुत करके तामील किया जायेगा , या 
  2. यदि वह इस प्रकार दिया या देने के लिए प्रस्तुत नहीं  किया जा सकता तो उसे उन परिसरों में जिनमे वह व्यक्ति रहता है बाहरी दरवाजे या किसी अन्य सरलता से दिखने वाले भाग पर लगाकर तामील  किया जायेगा और उसकी एक लिखित रिपोर्ट तैयार की जाएगी और पड़ोस में रहने वाले दो व्यक्तियों द्वारा साक्षित की जाएगी। 
उपधारा 6 - केंद्रीय सरकार द्वारा या केंद्रीय सरकार , के किसी अधिकारी या प्राधिकारी द्वारा इस धारा के अधीन किया गया हर एक आदेश, किये जाने के बाद जहँ तक हो सके जल्द ही संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखी जाएगी। 

आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 7 क्या कहती है ?

आवश्यक अवतु अधिनियम की धारा 7 दंड का प्रावधान करती है, यदि कोई व्यक्ति धारा 3के अधीन किये गए  किसी भी आदेश का उल्लंघन करेगा, तो वह दण्डित किया जायेगा। 

क (1 ):- धारा 3 की उपधारा 2 के खंड ज या झ के प्रति निर्देश से किये गए आदेश की दशा में कारावास से दण्डित किया जायेगा जिसकी अवधि 1 वर्ष तक कारावास से हो सकेगी और जुर्माने से भी दंडनीय होगा। 

क (2 ):- किसी अन्य आदेश की दशा में, कारावास से दण्डित किया जायेगा जिसकी अवधि 3 महीने कम न होगी किन्तु 7 वर्ष तक कारावास हो सकेगी और जुर्माने से भी दंडनीय होगा। 

लेकिन, न्यायालय किन्ही पर्याप्त और विशेष कारणों के आधार पर, जिनका निर्णय में उल्लेख,  3 माह से कम की अवधि के कारावास से दण्डित किये जाने का आदेश दे सकेगा। 

(ख ) :-  उपधारा 3 के अधीन निर्देश किसी भी आदेश के उल्लंघन पर ऐसी संपत्ति जिसके सम्बन्ध में आदेश का उल्लंघन किया गया है, तो सरकार के पक्ष में वह सम्पति जब्त कर ली जाएगी। 

(ग ):-  उपधारा 3 के अधीन निर्देशित किसी भी आदेश का उल्लंघन होता है ,तो पैकेज, डब्बा य पात्र जिसमे संपत्ति पाई गयी हो और कोई पशु-गाड़ी, जलयान या ने प्रवाहनो जिसे संपत्ति  शामिल किया गया हो, न्यायालय के द्वारा आदेश दिए जाने पर सरकार के पक्ष में जब्त कर ली जाएगी। 

उपधारा 2 - यदि कोई व्यक्ति धारा 3 की उपधारा 4 के खंड ख के अधीन निर्देश दिया गया हो उस निदेश के अनुपालन करने के असफल रहेगा तो वह कारावास से जिसकी अवधि 3 माह से कम न होगी किन्तु 7 वर्ष तक हो सकेगी और जुर्माने से भी दण्डित  किया जायेगा। 

परन्तु, न्यायालय किन्ही  विशेष कारणों के आधार पर, जिसका निर्णय में उल्लेख किया जायेगा, 3 माह से कम अवधि के कारावास से दण्डित किये जाने का आदेश दे सकेगी। 

उपधारा 2 (क) यदि उपधारा 1 के खंड क के उपखण्ड 2 के अधीन या उपधारा 2 के अधीन दोषसिद्ध ठहराया गया कोई व्यक्ति उसी उपबंध के अधीन अपराध के लिए दुबारा दोषसिद्ध ठहराया जायेगा तो, वह दूसरे और हर  एक पहले अपराध के लिए कारावास से जिसकी अवधि 6 माह से कम न होगी किन्तु 7 वर्ष तक कारावास की सजा से दण्डित होगा और जुर्माने से भी दंडित किया जायेगा। 

परन्तु, न्यायालय किन्ही पर्यात्प व् विशेष कारणों के आधार पर जिसका उल्लेख निर्णय में किया जायेगा 6 माह से कम अवधि के कारावास से दण्डित किये जाने का आदेश दे सकेगा। 

उपधारा 2 खंड ख :- उपधारा 1 , उपधारा 2 और उपधारा 2क के उद्देश्य के लिए यह बात कि उपधारा 1  खंड क के उपखण्ड 2 के अधीन या उपधारा 2 के अधीन किसी अपराध से जनसाधारण या किसी व्यक्ति को कोई खास हानि हुई है, तो उस स्थति में 3 माह या 6 माह से कम की अवधि के लिए कारावास से दण्डित करने का आदेश देने का पर्याप्त व् विशेष कारण होगा। 

उपधारा 3 :- जहाँ उपधारा 1 के अधीन किसी अपराध से दोषसिद्ध हुआ कोई व्यक्ति,  किसी आवश्यक वस्तु के सम्बन्ध में किसी आदेश के उल्लंघन करने  उपधारा के अधीन किसी अपराध में दुबारा दोषसिद्ध होता है  वहां न्ययालय जिसके द्वारा ऐसा व्यक्ति दोषसिद्ध किया जाये उस किसी  दंड के अतिरिक्त, जो उस धारा केअधीन उस पर अधिरोपित, आदेश द्वारा निदेश दे सकेगा कि वह व्यक्ति उस आवश्यक वस्तु में 6 महीने की कालावधि तक, जैसा न्यायलय द्वारा आदेश में लिखित किया जाये, कोई कारोबार नहीं करेगा। 
 

जाने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955, की धारा 3 व् धारा 7 क्या कहती है ?   जाने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955, की धारा 3 व् धारा 7 क्या कहती है ? Reviewed by Advocate Pushpesh Bajpayee on April 15, 2020 Rating: 5

1 comment:

  1. 3 बटा 7 और 3 बटा 8 के लिए बेल के लिए आयु

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