भारतीय दंड संहिता के तहत समझौता करने योग्य और समझौता न करने योग्य अपराध कौन से है compoundable offence and non compoundable offence under indian penal code

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नमस्कार दोस्तों,
आज का यह लेख उन लोगो के लिए बहुत खास है, जो यह जानना चाहते है कि भारतीय दंड संहिता के तहत समझौता करने  योग्य और समझौता न करने योग्य अपराध कौन से है।

 भारतीय दंड संहिता के तहत समझौता करने योग्य और समझौता न करने योग्य अपराध कौन से है compoundable offence and non compoundable offence under indian penal code

सामान्यतः भारतीय कानून के अनुसार अपराधों को इन निम्न श्रेणियों में विभाजित किया गया, जिससे यह स्पष्ट मालूम होता है कि अपराध कितने कितने प्रकार के होते है।
  1. संज्ञेय अपराध या गैर संज्ञेय अपराध। 
  2. समझौता योग्य या असमझौते योग्य अपराध। 
  3. जमानतीय अपराध या गौर जमानतीय अपराध। 
ऊपर वर्णित अपराधों की श्रेणियों में से आज हम बात करेंगे "समझौता योग्य और असमझौता योग्य अपराध" के बारे में। 

1. समझौता करने योग्य अपराध किसे कहते है -  compoundable offence 
समझौता करने योग्य अपराध वे अपराध होते है जिनमे शिकायतकर्ता अपराध की गंभीरता के आधार पर पुलिस से की गयी शिकायत को अभियुक्त के निवेदन करने वापस लेता है। यदि अभियुक्त पर मुकदमा दर्ज हो गया है, तो भी अभियुक्त के आवेदन करने पर शिकायतकर्ता उस अमुक मामले में समझौता कर मुकदमा समाप्त कर सकता है। समझौते के लिए आवेदन पत्र उसी न्यायालय में दाखिल करना होगा जिसके समक्ष मामला विचाराधीन है। समझौता करना या न करना यह शिकायतकर्ता / पीड़ित / पीड़िता पर निर्भर करता है। 
  1.  समझौता करने योग्य अपराध सामान्य प्रकृति के होते है। 
  2. समझौता करने योग्य अपराध में कम सजा का प्रावधान है। 
  3. समझौता करने योग्य अपराध में पुलिस अभियुक्त को वारण्ट के बिना नहीं गिरफ्तार कर सकती है। 
समझौता करने योग्य अपराध के उदाहरण -
  1. धारा 298 - धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आशय से किया गया कोई भी कार्य। 
  2. धारा 312 - गर्भपात कारित करना। 
  3. धारा 322  - स्वेच्छया से घोर उपहति कारित करना -  किसी व्यक्ति पर के शरीर पर गंभीर चोट करना। 
  4. धारा 334 - प्रकोपन पर स्वेच्छया उपहित कारित करना।
  5. धारा 335 - प्रकोपन पर स्वेच्छया घोर उपहित कारित करना। 
  6. धारा 340 - सदोष परिरोध - किसी व्यक्ति को चार दीवारी में बंद कर देना।
  7. धारा 341 - सदोष अवरोध के लिए दंड।
  8. धारा 343- तीन दिन या अधिक दिनों के लिए सदोष परिरोध। 
  9. धारा 344 - दस या अधिक दिनों के लिए सदोष परिरोध। 
  10. धारा 346- गुप्त स्थान पर किसी को बंद रखना। 
  11. धारा 355 -  हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
  12. धारा 379 - चोरी। 
  13. धारा 403 - बेईमानी से किसी की संपत्ति हथियाना, गबन करना या दुरुपयोग करना। 
  14. धारा 407 - वाहक, आदि के द्वारा आपराधिक न्यासभंग।
  15. धारा 411 -  चुराई गयी संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना। 
  16. धारा 414 - चुराई हुई सम्पत्ति को छिपाने में सहायता करना। 
  17. धारा 415 - छल करना। 
  18. धारा 416 - प्रतिरूपण द्वारा छल। 
  19. धारा 421 - लेनदार में वितरण को रोकने के लिए संपत्ति का बेईमानी से या कपटपूर्ण हटाना या छिपाना। 
  20. धारा 422 - ऋण को लेनदारों के लिए उपलब्ध होने से बेमानी से या कपटपूर्वक रोकना। 
  21. धारा 423 - अंतरण के ऐसे विलेख का , जिसमे प्रतिफल के सम्बन्ध में झूठा कथन सम्मिलित है,  बेईमानी या कपटपूर्वक निष्पादित करेगा। 
  22. धारा 424 - बेमानी या कपटपूर्वक संपत्ति हटाना या छिपाना।
  23. धारा 441 - आपराधिक अतिचार।
  24. धारा 442 - गृह अतिचार। 
  25. धारा 481- मिथ्या, गलत, नकली संपत्ति चिन्ह को उपयोग में लाना।
  26. धारा 483 - अन्य व्यक्ति द्वारा उपयोग में लाये गए संपत्ति चिन्ह का कूटकरण करना। 
  27. धारा 486 - नकली संपत्ति चिन्ह से चिन्हित माल को बेचना। 
  28. धारा 491 - असहाय व्यक्ति चाहत और उसकी आवश्यतकता की पूर्ति करने के लिए की गयी संविदा का उललंघन। 
  29. धारा 497 -व्यभिचार।
  30. धारा 498 - विवाहित स्त्री को आपराधिक आशय से फुसलाकर ले जाना या उसको रोकना, बैठाये रखना या हिरासत में लेना। 
  31. धारा 499- मानहानि। 
  32. धारा 501 - मानहानिकारक जानी हुई बातो को छापना या उत्कीर्ण करना। 
  33. धारा 502 - मानहानिकारक विषय रखने वाली छपी हुई वस्तु या उत्कीर्ण वस्तु को बेचना। 
  34. धारा 504 - शांतिभंग करने के इरादे से जानभबूझकर कर अपमान करना।  
  35. धारा 508 - किसी व्यक्ति को यह मानने के लिए प्रेरित करना कि वह दैवी अप्रासद का भाजन होगा।
2.  समझौता न करने योग्य अपराध किसे कहते है - non-compoundable offence 
समझौता न करने योग्य अपराध वे अपराध होते है जिनमे समझौता करने का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता है, क्योकि ये अपराध गंभीर प्रकृति के होते है। 
  1. समझौता न करने योग्य अपराध गंभीर प्रकृति के होते है। 
  2. समझौता न करने योग्य अपराध में अधिक सजा का प्रावधान किया गया है। 
  3. समझौता न करने योग्य अपराध में पुलिस अभियुक्त को बिना वारण्ट के गिरफ्तार कर सकती है। 
समझौता न करने योग्य अपराध के उदाहरण -
  1. धारा 300 - हत्या। 
  2. धारा 304 b - दहेज़ मृत्यु।
  3. धारा 375, धारा 376,- बलात्संग, रेप। 
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2 comments:

  1. Dhara379,411me bell Lene Ka tarika Janna Chahiye he chori ke Saman baramat abshtha me hajir me entisupreti me

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