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कैसे और कहाँ भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ शिकायत दर्ज करे। how to register a complaint against misleading advertisement

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नमस्कार दोस्तों,
आज का यह लेख आप सभी लोगो के लिए बहुत खास है, क्योकि आज के इस लेख में आप सभी को यह बताने जा रहा हु कि "कैसे और कहाँ भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ शिकायत दर्ज करे।" देश की सभी कंपनियां हर साल ने नए-नए प्रोडक्ट का उत्पादन करती रहती है और इन उत्पादन की बिक्री के लिए सलाना विज्ञानपानों पर लाखों रुपया खर्च कर आप तक ये विज्ञापन टेलीविज़न, रेडियो, मोबाइल, या पोस्टर के माध्यम से पहुँचाती रहती है। इन्ही विज्ञापनों के माध्यम से ही आप सभी को यह जानकारी मिलती है कि आज बाजार में कौन सी कंपनी का नया प्रोडक्ट आया है। ये कंपनी प्रोडक्ट की बिक्री के लिए इतने लुभावने तरीके से विज्ञापन बनाते है और विज्ञापन में प्रोडक्ट को लेकर कई प्रकार के दावे भी किये जाते है और आप इन्ही विज्ञापन के दावों करे आधार पर कंपनी के द्वारा बाजार में भेजा गया प्रोडकट फ़ौरन खरीद लेते है। प्रोडक्ट खरीद लेने के बाद इस्तेमाल करने पर ये प्रोडक्ट कंपनी के द्वारा किये गए दावों पर खरे नहीं उतरते बल्कि इससे कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ जाता है।

कैसे और कहाँ भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ शिकायत दर्ज करे। how to register a complainant against misleading advertisement .

तो, ऐसे में भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ शिक़ायत कहाँ और कैसे दर्ज करे इसके बारे में जान ले। 
उससे पहले हम आपको भ्रामक विज्ञापनों के बारे में और कुछ बाटे बता दे जिनके बारे में आप सभी को जानना चाहिए।

विज्ञापन हमे कैसे प्रभावित करता है कि हम उस विज्ञापन के आधार पर वह प्रोडक्ट खरीद लेते है। 
हम आप सभी रोज टेलीविज़न, मोबाइल या समाचार पत्र जरूर देखते है और इसमें रोज न रोज नए-नए  विज्ञापनों को देखा करते है, इन विज्ञापनों का प्रचार और कोई नहीं बल्कि हमारे सीरियल एक्टर, फिल्म एक्टर और खिलाड़ियों के द्वारा ही किया जाता है। इन सबके प्रशंसकों (फैंस) की संख्या भी अधिक होती है। इन्ही के द्वारा किये जा रहे विज्ञापनों को देखने के बाद हम लोग यही सोचते है कि अगर हमारा सुपरस्टार इस विज्ञापन को कर रहा है, तो इसका मतलब वो भी इसका इस्तेमाल करता होगा और हम यही सब सोच कर विज्ञापनों के आधार पर अनेक प्रकार के उत्पादों को बिना सोचे समझे खरीद लेते है।

भ्रामक विज्ञापन से अभिप्राय है ?
साधारण शब्दों में भ्रामक विज्ञापनों से अभिप्राय यह है कि टेलीविज़न, रेडियो, मोबाइल, समाचार पत्र, बैनर, पोस्टर, होर्डिंग, दिवार-लेखन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से कई कम्पनियों के द्वारा अपने उत्पादन की बिक्री हेतु अलग अलग लुभावनों तरीको से उत्पादों का प्रचार प्रसार कर अधिक जनसँख्या तक अपने प्रोडक्ट के विज्ञापनों को पहुँचाना ताकि कंपनी के उत्पादों की बिक्री अधिक मात्रा में हो सके और ये अधिक लाभ अर्जित कर सके।
  1. ये विज्ञापन भ्रामक तब हो जाते है जब उत्पादनों से सम्बंधित गलत सूचना दे कर उपभोक्ताओं को गुमराह करते है,
  2. उत्पादनों से सम्बंधित झूठे दावे करना,
  3. विज्ञापन कोड के किसी अन्य प्रावधानों का उल्लंघन करना आदि। 
तो ऐसे विज्ञापनों को भ्रामक विज्ञापन कहा जायेगा क्योकि ऐसे गलत सूचना देने वाले, झूठा दावा करने वाले विज्ञापनों को दिखा कर उपभोक्ताओं को गुमराह किया जा रहा है। 

एक विज्ञापन भ्रामक विज्ञापन कब साबित होता है ?
एक विज्ञापन भ्रामक विज्ञापन कब साबित हो जाता है, उसके लिए हम आपको कुछ ऐसी ही स्थितीयां बताने जा रहे जिसमे किसी वस्तु या सेवा के सम्बन्ध में किये जा रहे विज्ञापन भ्रामक हो जाते है। 
  1. प्रलोभन भरे विज्ञापन।
  2. उत्पादनों या सेवाओं को अधिक बढ़ा चढ़ा कर विज्ञापन दिखाना।
  3. समाज व् उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों का विज्ञापन करना।
  4. उत्पाद व् सेवाओं से सम्बंधित विज्ञापनों में विषयवस्तुओँ का प्रदर्शन उचित ढंग से न करना। 
  5. उपभोक्ताओं के सुरक्षा के अधिकार का उल्लंघन करने वाले विज्ञापन। 
  6. उपभोक्ताओं के चुनने के अधिकार का उल्लंघन करने वाले विज्ञापन। 
  7. उपभोक्ताओं के सूचना के अधिकार का उल्लंघन करना। 
  8. बच्चो को निशाना बना कर विज्ञापनों का जोर शोर से प्रकाशित किया जाना जिसके कारण से इन बच्चो में हिंसा की भावना का उत्त्पन होना।
भ्रामक विज्ञापनों के क्या प्रभाव हो सकते है ?
भ्रामक विज्ञापनों का हमारे समाज में बहुत ही गलत प्रभाव पड़ता है जैसे कि :-
  1. भ्रामक विज्ञापन उपभोक्ताओं को उनके कई उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन करता है जैसे की उत्पाद चुनने का अधिकार, सुरक्षा का अधिकार और सूचना का अधिकार।
  2. विज्ञापनों में दिखाए जाने वाले दृश्य बच्चो के मन और दिमाग में गहरा प्रभाव डालते है।
  3. विज्ञापन में दिखाए  जाने वाले हिंसक और उत्तेजिक दृश्यों को देखर वे भी इन विज्ञापनों की नकल उतारने लगते है। 
  4. इन भ्रामक विज्ञापनों को देख कर उपभोक्ता कई बार ऐसी वस्तुओं हुए सेवाओं का इस्तेमाल कर लेता गई जो उसके स्वास्थ्य और जीवन के लिए हानिकारक साबित हो जाता है। जिसके कारण से उपभोक्ता को शारीरिक मानसिक और आर्थिक क्षति होती है। 
भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ शिकायत कहाँ और कैसे दर्ज करे ताकि उपभोक्ताओं की सुरक्षा हो सके। 
भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए सरकार ने कई कानून बनाये है उन्ही में से हम आपको दो ऐसे ही तरीको के बारे में बताने जा रहे है जिनकी मदद से आप भ्रामक विज्ञापनों  के खिलाफ शिकायत जकर सकते है। अगर इन भ्रामक विज्ञापनों के कारण क्षति हुई है, तो आप शिकायत कर क्षतिपूर्ति पा सकते है। 
  1. ऑनलाइन पोर्टल  भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ शिकायत के माध्यम से । (GAMA )
  2. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986, के तहत मुकदमा दर्ज कर । 

1. भ्रामक विज्ञापन के खिलाफ शिकायत पोर्टल में ऑनलाइन शिकायत कैसे दर्ज आकर। 
  1. आपको अपने कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल के ब्राउज़र के माध्यम से GAMA पोर्टल की अधिकृत वेबसाइट जाना होगा।  लिंक http://gama.gov.in 
  2. ऑनलइन शिकायत दर्ज करने के लिए आपको पंजीकृत होना पड़ेगा।
  3. पंजीकृत होने के लिए  पोर्टल की वेबसाइट पर जाना होगा। 
  4. लॉगिन पर क्लिक करे और आवश्यक विवरण को भरे और साइनअप करे। 
  5. आपके ईमेल पर अकाउंट वेरिफिकेशन के लिए लिंक भेजी जाएगी जिसके माध्यम से आपको अपना अकाउंट वेरीफाई करना होगा। 
  6. एक बार अकाउंट वेरीफाई होने के बाद आपका अकाउंट बन जाएगा और आप विज्ञापन के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए तैयार है। 
  7. आपके द्वारा बनाया गया यूजर आईडी और पासवर्ड का उपयोग करते हुए पोर्टल पर लॉगिन करना होगा। 
  8. विज्ञापन से सम्बंधित अपनी शिकायत का विवरण भरे। 
  9. यदि आवश्यक ऑडियो, वीडियो, पेपर क्लिप या फोटो जो उपलब्ध हो साथ में लगा दे। 
  10. सब कुछ हो जाने के बाद सबमिट बटन पर क्लिक कर अपनी शिकायत दर्ज करे। 
2. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर। 
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986, इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं का अनुचित व्यपार प्रथाओं और भ्रामक विज्ञापनों से सुरक्षित करना और शिकार हुए उपभोक्ताओं को न्याय दिलाना है। यदि किसी भी वस्तु या सेवाओं के इस्तेमाल करने से उपभोक्ता को किसी भी प्रकार से क्षति पहुँचती है, तो वह उस वस्तु व् सेवाओं के खिलाफ उपभोक्ता न्यायालय में मुदकमा दर्ज कर क्षतिपूर्ति पाने का अधिकारी है। 
  1. वस्तु व् सेवाओं की कीमत के बराबर धन की वापसी।
  2. वस्तु व् सेवाओं के इस्तेमाल से हुई क्षति के लिए क्षतिपूर्ति। 
  3. न्यायालय उपभोक्ता को उसके मुदकमे की लागत भी दिला सकती है। 
  4. विपक्ष को भ्रामक विज्ञापन के प्रभाव को समाप्त करने के लिए सुधारात्मक विज्ञापन चालू करने का आदेश दे सकती है। 



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