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दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 2(d) परिवाद Complaint किसे कहते है। Criminal Procedure Code,1973 Section 2(d) Complaint

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नमस्कार दोस्तों,
आज के इस पोस्ट में आप सभी को दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 , की धारा 2(d) परिवाद (Complaint) के बारे में बताने जा रहा हु।
दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 , की धारा 2(d) परिवाद (Complaint) किसे कहते है। Criminal Procedure Code,1973 Section 2(d) Complaint.

परिवाद किसे कहते है ?
दण्ड प्रक्रिया संहिता,1973 की धरा 2(d) के अनुसार परिवाद से मतलब मजिस्ट्रेट द्वारा कार्यवाही किये जाने के लिए उसको मौखिक या लिखित रूप में दिया गया वह अभिकथन है जिसमे यह स्पष्ट होता है की किसी व्यक्ति ने, चाहे वह ज्ञात है या अज्ञात, अपराध किया गया है।

  1. परिवाद संज्ञेय या असंज्ञेय दोनों प्रकार के अपराधों के सम्बन्ध में किया जा सकता है , 
  2. परिवाद मजिस्ट्रेट के समक्ष ही प्रस्तुत किया जाता है ,
  3. परिवाद दाखिल करते ही उस अपराध के मामले में मजिस्ट्रेट को संज्ञान प्राप्त हो जाता है,
  4. मजिस्ट्रेट के समक्ष परिवाद प्रस्तुत किये जाने से ही पुलिस अधिकारी उस अपराध के मामले में इन्वेस्टीगेशन करने का अधिकार नहीं होता है, 
  5. मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही पुलिस अधिकारी उस अपराध के मामले से सम्बंधित इन्वेस्टीगेशन कर सकता है।  

चलिए परिवाद को हम और ही आसान शब्दो में समझते है।
जब किसी व्यक्ति के साथ कोई आपराधिक घटना घटती है, तो वह उस अपराध की सूचना पुलिस को देता है ताकि उस अपराध की सूचना के आधार पर प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखी जाये, यदि उक्त सूचना के आधार पर पुलिस थाने का इंचार्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखने से मना कर देता है, तो पीड़ित व्यक्ति या उसके रिश्तेदार द्वारा मजिस्ट्रेट के समक्ष परिवाद प्रस्तुत किया जा सकता है,ताकि उक्त अपराध किये जाने वाले अपराधी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जा सके।

परिवाद के आवश्यक तत्व क्या है ?  

  1. परिवाद एक लिखित या मौखिक कथन होता है, जिसमे किसी अपराध से संबंधित तथ्य होते है और जिन पर विश्वास किया जाता है,
  2. परिवाद मजिस्ट्रेट के समक्ष किया जाता है कि किसी ज्ञात या अज्ञात व्यक्ति ने कोई आपराधिक कार्य  है,
  3. परिवाद में लिखे गए कथन में मजिस्ट्रेट से स्पष्ट रूप से यह प्रार्थना की जाती है की मजिस्ट्रेट उस ज्ञात या अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दण्ड प्रक्रिया संहिता में दिए गए प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही की जाये,
  4. समाज का कोई भी व्यक्ति मजिस्ट्रेट के समक्ष परिवाद प्रस्तुत कर सकता है।  

5 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. आप इस घटना के खिलाफ ऑनलाइन एफ़आईआर दर्ज करा दीजिये,या ऑनलाइन साइबर क्राइम वेब पोर्टल पर इसिकी शिकायत दर्ज करा दे ।

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  2. sir mere ghar walo par juti riport police station par karna chata police ne riport nahi likhi kort parivad dayar kar diya aap muze isse bachane ka upay batye

    जवाब देंहटाएं
  3. Sir mere dada ji ke jamin ko koi aur patwari recod me patwari se mil karbled se kharocha kar apne nam me kra liya hai. Police se sikayat karne par koi karywahi nhi ki ja rhi hai. 2year ho gya hai

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. पहले ये पता करो की उसके नाम जमीन किसके आदेश से आई, कब आयी, ये सब पता कर बताओ ?

      हटाएं

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