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गिरफ़्तारी पर जमानत कैसे मिलती है ? How to get a bail on arrest ?

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नमस्कार मित्रों,
आज के इस लेख में आप सभी को गिरफ़्तारी पर जमानत कैसे मिलती है इसके बारे में बताने जा रहा हु। जमानत को लेकर आपके मन में कई तरह के सवाल उठ रहे होंगे, जैसे कि :-
  1. जमानत क्या होती है ?
  2. जमानत कैसे मिलती है ?
तो चलिए आपके इन्ही सब सवालो के जवाब हम विस्तार बताने वाले है। 
  
Giraftari par Jamaanat kaise milti hai ? ( How to get a bail on arrest ?)

जमानत क्या होती है और कैसे मिलती है  ?


पुलिस द्वारा गिरफ़्तारी। 
जब किसी व्यक्ति द्वारा कोई ऐसा कार्य किया जाता है जो कि कानून की नजरों में अपराध माना गया है जिसके तहत ऐसा अपराध करने वाले व्यक्ति को दण्डित किये जाने का प्रावधान किया है। जहाँ किसी अपराध के घटित होने की सूचना पीड़ित या उसके रिश्तेदार द्वारा थाने में दी जाती है या किसी अपराध के घटित होने की जानकारी पुलिस को होती है , तो पुलिस उस सूचना व् जानकारी के आधार पर अपराध करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार करती है। 
 
जमानत की अर्जी। 
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये गए व्यक्ति की जमानत के लिए परिवारजनों द्वारा किसी अधिवक्ता के जरिये उस न्यायालय में जमानत की अर्जी दाखिल की जाती है जिस न्यायालय द्वारा उस अभियुक्त के मामले का विचारण हो रहा होता है । 

इस जमानत की अर्जी में अभियुक्त की रिहाई से सम्बंधित आधार लिखे जाते है, जिनपर मजिस्ट्रेट विचार करता है।  जब मजिस्ट्रेट के समक्ष जमानत की अर्जी  पेश होती है तो ऐसे में अभियुक्त और पीड़ित/पीड़िता के वकील मुक़दमे की  पुकार होने में मजिस्ट्रेट के समक्ष हाजिर होते है। 

जमानत की अर्जी पर बहस। 

इस जमानत की अर्जी पर दोनों ओर के वकीलों द्वारा बहस की जाती है यानी अभियुक्त के वकील द्वारा जमानत पर रिहा किये जाने की प्रार्थना की जाती है जहाँ अभियुक्त के वकील द्वारा अभियुक्त के रिहा किये जाने के आधार बताये जाते है कि अभियुक्त को क्यों जमानत पर रिहा किया जाये और पीड़ित /पीड़िता के वकील द्वारा अभियुक्त को जमानत पर न छोड़े जाने के आधार बताये जाते है। 

दोनों पक्ष के वकीलों द्वारा मजिस्ट्रेट के समक्ष अपने पक्ष प्रस्तुत किये जाने के बाद मजिस्ट्रेट द्वारा उन दोनों की दलीलों व् जमानत दिए जाने व् जमानत न दिए जाने के आधारों पर और अभियुक्त के द्वारा किये अपराधों की गंभीरता पर विचारण हो जाने के बाद मजिस्ट्रेट जैसा उचित समझता है अभियुक्त को जमानत पर रिहा किये जाने व् जमानत पर रिहा न किये जाने का अपना आदेश सुना सकता है। 

जमानत की अर्जी मंजूर होने पर। 

जमानत की अर्जी मंजूर होने पर अभियुक्त के वकील द्वारा बेल बांड जो कि एक निर्धारित फॉर्म होता है इसको भर कर न्यायालय में दाखिल किया जाता है। हर एक अभियुक्त पर दो जमानती लगते है यानी वे व्यक्ति जो जमानत ले रहे है।  जो व्यक्ति जमानत ले  रहे है उनको उस अभियुक्त की जिम्मेदारी लेनी होती है कि वह व्यक्ति जमानत की अवधि के दौरान सजा से बचने के लिए अपने निवास स्थान को छोड़कर भाग न जाये उसके लिए जमानत लेने वाले व्यक्ति को प्रतिभूति यानी सिक्योरिटी के रूप में बांड भरना होता है।  

जमानत लेने वाले व्यक्ति को न्यायालय द्वारा बताये गए मुचलके यानी धनरशि के बराबर की सिक्योरिटी के रूप में कुछ लगाना होता है।  

जैसे कि :-
  1. खतौनी,
  2. वाहन पंजीकरण प्रमाण पत्र। 
न्यायालय द्वारा जमानती का परिक्षण। 
अभियुक्त के वकील द्वारा अभियुक्त की जमानत के लिए  बेल बांड न्यायालय में दाखिल कर देने के बाद जमानत लेने वाले व्यक्तियों का परिक्षण किया जाता है कि :-
  1. जमानत लेने वाला व्यक्ति कौन है।  
  2. अभियुक्त और जमानत लेने वाले के मध्य क्या रिश्ता है वे एक सूरे को कैसे जानते है। 
  3. अगर जमानत खतौनी पर ली जा रही है तो उस खतौनी का लेखपाल के कार्यालय से प्रमाणीकरण होगा,
  4. अगर जमानत वाहन पंजीकरण प्रमाण पत्र पर ली जा रही है तो उस वाहन पंजीकरण प्रमाण पत्र का RTO से प्रमाणीकरण होगा।  
न्यायालय के समाधान हो जाने पर जमानत लेने वाले व्यक्तियों के प्रमाणीकरण होने के बाद अभियुक्त की रिहाई के आदेश दे दिए जाते है। 

रिहाई कैसे होगी ?

न्यायालय के रिहाई के आदेश उस जेल के पैरोकार के द्वारा जेल में दिया जाता है और जेल से ही अभियुक्त को रिहा कर दिया जाता है। 

अधिक जानकारी के लिए वीडियो देखे 👇👇👇👇👇👇👇👇

 

  अपराध कितने प्रकार के होते है ?
दंड प्रक्रिया संहिता 1973 के अनुसार अपराधों को 2 भागों में उनकी गंभीरता के आधार पर विभाजित किया गया है। 
  1. जमानतीय अपराध। 
  2. गैर जमानतीय अपराध। 
इन दोनों को विस्तार से समझे। 

1. जमानतीय अपराध - जमानतीय अपराध जैसे की इसके नाम से ही आप लोगो ने अंदाजा लगा लिया होगा की ऐसे अपराध जिसमे जमानत मिल ही जाती है। जमानतीय अपराध ऐसे अपराध होते है जो कि कम गंभीर प्रकृति के होते है जो असंज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते है। ये अपराध जैसे कि :-
  1. मारपीट,
  2. लड़ाई झगड़ा,
  3. चोरी,
  4. धमकी,
  5. लापरवाही से वाहन चलाना,
  6. अन्य असंज्ञेय अपराध। 
2. अजमानतीय अपराध - अजमानतीय अपराध जैसा कि इसके नाम से ही मालूम हो रहा है कि ऐसे अपराध जिसमे जमानत मिलने का कम चांस होता है। अजमानतीय अपराध ऐसे अपराध होते है जो गंभीर प्रकृति के अपराध होने के कारण संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते है। ये अपराध जैसे कि :-
  1. हत्या,
  2. चोरी के साथ हत्या,
  3. लूट के साथ हत्या,
  4. बलात्कार, सामूहिक बलात्संग,
  5. अन्य संज्ञेय अपराध। 

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