विवाह का रजिस्ट्रेशन करवाना क्यों है जरुरी।( Why marriage registration is necessary ) विवाह प्रमाण पत्र के लाभ। (Benefits of Marriage Certificate)

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 विवाह का रजिस्ट्रेशन करवाना क्यों है जरुरी।( Why marriage registration  is necessary )
विवाह प्रमाण पत्र के लाभ।  (Benefits of Marriage Certificate)
विवाह का रजिस्ट्रेशन करवाना क्यों है जरुरी।( Why marriage registration  is necessary ) विवाह प्रमाण पत्र के लाभ।  (Benefits of Marriage Certificate)

 हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 8 में  विवाह के रजिस्ट्रेशन का प्रावधान बताया गया है। 
विवाह सम्पूर्ण हो जाने के बाद हर विवाहित जोड़े को अपने विवाह का रजिस्ट्रेशन करवा लेना चाहिए क्योकि कई अधिकारों को प्राप्त करने के लिए इस विवाह प्रमाण पत्र की जरुरत पड़ती है।
इस विवाह प्रमाण पत्र की जरुरत उस समय पड़ती है जब विवाह के बाद संयुक्त बैंक खाता खुलवाना हो। स्पाउस(Spouse) वीसा लेना हो। इन सब जगह में आपको अपने विवाह का प्रमाण पत्र दिखाना पड़ता है ताकि आपको कोई दिक्कत न आए इन सब कार्यो को करने लिए।
वैसे तो विवाहित होने का प्रमाण विवाह के समय की फोटग्राफ, विवाह  कार्ड और पंडित द्वारा जारी किया गया विवाह प्रमाण पत्र, लेकिन इन सभी दस्तावेजों को हर जगह साथ लेकर नहीं जाया जा सकता है। ऐसे में हर विवाहित जोड़े को अपने विवाह का रजिस्ट्रेशन करवा के विवाह प्रमाण पत्र ले लेना चाहिए।
यह विवाह का प्रमाण पत्र  हर विवाहित जोड़े को कई प्रकर के लाभ पंहुचा सकता है।

विवाह प्रमाण पत्र के लाभ।  (Benefits of Marriage Certificate). 
  1. भारतीय नागरिक होने के कारण यह हर विवाहित जोड़े के विवहित होने का कानूनी प्रमाण पत्र होता है। 
  2. पति पत्नी को संयुक्त बैंक खाता खोलने की लिए इस प्रमाण पत्र की जरुरत होती हैं। 
  3. पति पत्नी को अपना पासपोर्ट बनवाने के लिए। 
  4. जब कोई विवाहित जोड़ा ट्रेवल वीसा या किसी देश में स्थायी निवास के लिए आवेदन करता है तो विवाह प्रमाण पत्र की कॉपी लगती है। 
  5. जीवन बिमा के लाभ के लिए भी विवाह प्रमाण पत्र की जरुरत पड़ती है। 
  6. विवाह प्रमाण पत्र होने से महिलाओ में विश्वास और समाजिक सुरक्षा एहसास जगता है। 
  7. पति पत्नी के आपसी विवाद होने की स्थिति में यह विवाह प्रमाण पत्र काफी मददगार होता है जैसे :दहेज और तलाक गुजाराभत्ता लेने अदि में। 
  8. विवाह प्रमाण पत्र बल विवाह पर रोक लगाता है क्योकि विवाह उन्ही दोनों के बीच होता है जहाँ लड़का 21 वर्ष की उम्र पूरी कर लेता है ,और लड़की 18 वर्ष की उम्र पूरी कर लेती  है। दोनों के बीच विवाह को लेकर आपसी सहमति होती है। 
  9. विवाहित होने में और तलाकशुदा होने में  दोनों में ही विवाह प्रमाण पत्र  काम आता है। 
  10. विवाह प्रमाण पत्र महिलाओ के लिए ज्यादा उपयोगी होता है क्योकि तलाक के बाद महिलाओ को आर्थिक और समाजिक सुरक्षा दोनी की ही जरुरत पुरषों की तुलना में ज्यादा होती है। 
धोखाधड़ी होने पर दोषी को पकड़ने के लिए। 
यदि पति या पत्नी दोनों में से कोई विवाह के बाद धोखा देकर भाग जाता है तो यह विवाह प्रमाण पत्र दोनों के लिए मदगार साबित होता है , क्योक इसी विवाह प्रमाण पत्र के जरिये  पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत दर्ज करवा सकता है या सकती है। आवेदन के साथ सम्बंधित दस्तावेजों की मदद से पुलिस दोषी को आसानी से पकड़ लेती है। 

तलाक लेने में आसानी। 
यदि पति या पत्नी दोनों में से कोई इस विवाह को आगे नहीं बढ़ाना चाहता तो वह तलाक लेकर अलग हो सकते है, इस विवाह प्रमाण पत्र की जरुरत तलाक की अपील करने के लिए भी पड़ती है।  

नौकरी के लिए। 
यदि पति या पत्नी दोनों में से कोई किसी प्रकार की नौकरी करना चाहता है तो उसे मैरिड सर्टिफिकेट की जरुरत पड़ती है। 
सिंगल मदर  या तलाकशुदा औरत के लिए नौकरी में आरक्षण का  लाभ लेने के लिए तलाक के दस्तावेज दिखाना होता है। 
तलाक के बाद गुजाराभत्ता पाने के लिए भी विवाह प्रमाण पत्र  दिखाना पड़ता है।  

विवाह के रजिस्ट्रेशन करने  की प्रक्रिया ( Process of Marriage Registration )
 हिन्दू विवाह अधिनियम 1954 
स्पेसेल मैरिज अधिनयम 1954 

हिन्दू विवाह अधिनियम 1954 और स्पेसेल मैरिज अधिनयम 1954 के अनुसार विवाह का रजिस्ट्रेशन कराना बहुत ही आसान होता है। 
  1. पति पत्नी दोनों को ही विवाह रजिस्ट्रेशन के लिए एक आवेदन पत्र सब  डिविशनल मजिस्ट्रेट के यहाँ देना होता है। 
  2. इस आवेदन पत्र पर दोनों ही पति पत्नी  को हस्ताक्षर करना होता है। 
  3. आवेदन देते वक्त संबंधित दस्तावेजों की जांच होती है उसके बाद विवाह के लिए एक दिन तय होता है जिसकी सुचना विवहित जोड़े को दे दी जाती है। 
  4. सुचना मिलने पर विवाहित जोड़े को कार्यालय पहुंच कर विवाह का रजिस्ट्रेशन करवाना होता है। 
  5. विवाह के रजिस्ट्रेशन के समय एक गैजेटेड असधिकारी का  भी मौजूद होना जरुरी होता है  और उसी दिन विवाह प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। 
विवाह रजिस्ट्रेशन के समय आवश्यक दस्तावेज। (Important document at the time of marriage registration)
  1. सबसे पहले तो विवाह प्रमाण पत्र के के आवेदन को पूरी तरह से भरना होता है उसमे पति और पत्नी दोनों का ही नाम स्पष्ट रूप से लिखा हो। 
  2. निवास प्रमाण पत्र जैसे : वोटर आईडी, राशन कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, पति और पत्नी का जन्म प्रमाण पत्र।
  3. पति पत्नी दोनों की दो  पासपोर्ट साइज फोटो। 
  4. पति पत्नी के विवाह की एक फोटोग्राफ। 
  5. यदि कोई लड़का या लड़की किसी वदेशी लड़की  या लड़के से विवाह करने जा रही है तो उस देश की एम्बेसी से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना होगा। 
  6. पति पत्नी दोनों के द्वारा अलग अलग शपथ पत्र देना होता है  जो की 10 रुपया का नॉन जुडिसियल स्टाम्प पेपर होता है। 
  7. यदि विवाह किसी धार्मिक स्थल में हुआ है तो वहाँ के पंडित द्वारा जारी किया गया विवाह प्रमाण पत्र। 
  8. विवाह का निमंत्रणपत्र भी साथ लगाना होता है। 
  9. ये सारे दस्तावेज सेल्फ अटेस्टेड होने चाहिए। 
  10. जहाँ विवाह का रजिस्ट्रेशन करवाना है , पति पत्नी दोनों उस तहसील के निवासी हो। 
विवाह का रजिस्ट्रेशन करवाना क्यों है जरुरी।( Why marriage registration is necessary ) विवाह प्रमाण पत्र के लाभ। (Benefits of Marriage Certificate) विवाह का रजिस्ट्रेशन करवाना क्यों है जरुरी।( Why marriage registration  is necessary ) विवाह प्रमाण पत्र के लाभ।  (Benefits of Marriage Certificate) Reviewed by Lawyer guru ji on शुक्रवार, अक्तूबर 06, 2017 Rating: 5

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