भारतीय दंड संहिता की धारा 300,302 का क्या मतलब है। (What is the meaning of Section 300 OR Section 302 of the Indian Penal code 1860)

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भारतीय दंड संहिता की धारा 302 का क्या मतलब है।  (What is the meaning of Section 302 of the Indian Penal code 1860)

अक्सर आप लोग  समाचार पत्र में पढ़ते है कि किसी वयक्ति को धारा 302 के तहत मृत्यु की सजा सुनाई गयी है या तो फिर उम्र कैद की। और यहाँ तक की आप लोगो ने इस धारा 302 के बारे में टेलेविज़न में आने वाली फिल्मे, समाचार और एक मशहूर टीवी चनेल है लाइफ ओके उसमे एक सीरियल भी आता है जिसका नाम है सावधान इंडिया जिसमे क्राइम से सतर्क रहने के बारे में बताया जाता है नाट्यरूपन्तरो के माध्यम से।
परन्तु कई लोग उस सीरियल के अंत में बताई जाने वाली धाराओं के बारे में ध्यान से नहीं सुनते है। अक्सर इसमें धारा 302 का जिक्र किया जाता है। और तो कई लोग ऐसे भी जो इस धारा 302 के बारे में जानते ही नहीं बल्कि  इसका नाम भी नहीं सुने होंगे, तो कोई बात नहीं है आज हम आप लोगो को भारतीय दंड संहिता की धारा 300 और धारा 302  बारे में बताएँगे।

भारतीय दंड संहिता की धारा 302 का क्या मतलब है। 
भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के अनुसार सजा का प्रावधान है यदि किसी व्यक्ति द्वारा अन्य व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है और मृत्यु करने वाले का दोष साबित हो जाता है तो उस वयक्ति पर जिसने यह अपराध किया है उस व्यक्ति को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत सजा दी जाती है।
यह सजा भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के अनुसार कत्ल के दोषी व्यक्ति को उम्रकैद की सजा होती या तो फांसी की सजा भी हो सकती है ,और जुर्माना भी देना पड़ता है,या इनमे से दोनों प्रकार की सजा उस कत्ल के दोषी व्यक्ति को दी जा सकती है।

कत्ल के हर मामले में खासतौर पर कत्ल करने वाले व्यक्ति के इरादों को धयान दिया जाता है। इस तरह के मामलो में पुलिस को साक्ष्य  साथ के साबित करना होता है कि यह कत्ल आरोपी व्यक्ति ने ही किया है, आरोपी के पास कत्ल करने का इरादा था और वह कत्ल करने का मकसद भी रखता था।

भारतीय दंड संहिता की धारा 302  कब नहीं लगती।
हत्या के कई  मामलो  में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 नहीं लगती है , यह ऐसे  मामले होते है जहाँ  किसी व्यक्ति का कत्ल तो होता  है पर कत्ल वाले का यह इरादा नहीं होता की उस व्यक्ति को मरना ही चाहता था।
ऐसे अपराधों  मामलो में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के बजाए भारतीय दंड संहिता की धारा 304 का प्रावधान  गया है, इस धारा के अनुसार आने वाले मानव वध  में भी दंड का प्रावधान है।

भारतीय दंड संहिता की  धारा 300 (Section 300 Murder)  हत्या  का दोषी  व्यक्ति कब कहलाता है। -एक अभियुक्त हत्या का दोषी तभी ठहराया जा सकता है अगर वह कत्ल करने का इरादा रखता हो या कत्ल करने का उसके पास कोई कारण हो। 

कत्ल का इरादा रखते हुए यदि एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को ऐसी शारीरिक क्षति पहुँचायी जाती है जिसके कारण उस व्यक्ति की मौत हो जाने की संभावना है।

यदि उस व्यक्ति को मालूम है कि उसके द्वारा किये  जाना वाला कार्य बहुत खतरनाक है जिसके कारण से किसी व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है। 

कुछ उदहारण के द्वारा  भारतीय दंड संहिता की  धारा 300 (Section 300 Murder)  हत्या को समझने   में  आसानी होगी। 

यदि क के द्वारा गोली इस इरादे से चलाई जाती है की ब की  मौत हो जाये तो, गोली चलाने वाला क हत्या का दोषी माना जायेगा।

क यह जानत हुए भी की य ऐसे रोग से ग्रस्त है और यह संभावना है कि य पर एक प्रहार करने से य की मौत हो जाएगी फिर भी क, य के ऊपर एक जोरदार प्रहार करता है जिसके परिणामस्वरूप य की मौत हो जाती, तो इस मामले में क, य की हत्या का दोषी मन जायेगा।

क द्वारा लाठी और तलवार से य को घायल करने के इरादे से  उस पर प्रहार किया जाता है  परन्तु इस प्रहार से य की मौत हो जाती, जहाँ क का हत्या करने का इरादा नहीं था बल्कि य को घायल करने से था। परिणामस्वरूप य की मौत हो जाती है, यहाँ क हत्या का दोषी माना जायेगा।

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भारतीय दंड संहिता की धारा 300,302 का क्या मतलब है। (What is the meaning of Section 300 OR Section 302 of the Indian Penal code 1860) भारतीय दंड संहिता की धारा  300,302 का क्या मतलब है।  (What is the meaning of Section 300 OR Section 302 of the Indian Penal code 1860) Reviewed by Lawyer guru ji on रविवार, जुलाई 09, 2017 Rating: 5

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